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वेल्डिंग जोड़ों का वगीकरण (Classification Of Welding Joints) और वेल्डिग तकनीक (Welding Technique)


इस पोस्ट में हम जानेंगे वेल्डिंग जोड़ों का वगीकरण (Classification Of Welding Joints) और वेल्डिग तकनीक (Welding Technique) जसे - Leftward Welding तथा Right Hand Welding के बारे में |


वेल्डिंग जोड़ों का वगीकरण (Classification Of Welding Joints)

Classification-Of-Welding-Joints-And-Welding-Technique

 
वेल्डिंग 
जोड़ मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं |

गैस वैल्डिंग (Gas Welding) गैस वैल्डिंग के प्रकार (Types Of Gas Walding) तथा गैस वैल्डिंग में प्रयुक्त उपकरण

 इस पोस्ट में हम जानेंगे गैस वैल्डिंग (Gas Welding) गैस वैल्डिंग के प्रकार (Types Of Gas Walding) तथा गैस वैल्डिंग में प्रयुक्त उपकरण एवं गैस वेल्डिंग ज्वाला और दोष (Gas Welding Flame) आदि |

Gas-Walding-And-Types-Of-Gas-Walding


गैस वैल्डिंग (Gas Welding)

जिस वैल्डिंग में जोड़े जाने वाली धातु के किनारों को गैसों के द्वारा ताप देकर गलनांक तक पहुँचाया जाता है, उसे गैस वैल्डिंग कहते है |
गैस वैल्डिंग में ताप प्राप्त करने के लिए अधिकतर ऑक्सीजन तथा एसीटिलीन गैसें प्रयोग की जाती हैं।
इस गैसों में जलने का कार्य एसीटिलीन गैस करती है तथा जलाने का कार्य ऑक्सीजन गैस करती है।
ऑक्सी-एसीटिलीन गैसों के जलने से तीन प्रकार की ज्वालाएँ बनती हैं - उदासीन ज्वाला, कार्बुराइजिंग ज्वाला तथा ऑक्सीडाइजिंग ज्वाला।
गैस वैल्डिंग में कुछ अन्य प्रकार की ज्वलनशील गैसें भी प्रयोग की जाती हैं। जैसे - प्रोपने (Propane), ब्यूटेन (Butane), हाइड्रोजन (Hydrogen), कोल गैस (Coal Gas), पैट्रोल गैस (Petrol Gas) तथा प्राकृतिक गैस (Natural Gas) इत्यादि।
गैस वैल्डिंग के द्वारा पतली चद्दरों को पिघलाकर खाली स्थान को उसी धातु की वैल्डिंग रॉड के द्वारा जोड़ा जाता है।

गैस वैल्डिंग के प्रकार (Types Of Gas Walding)

  1. लो प्रेशर गैस वैल्डिंग (Low Pressure Gas welding)
  2. हाई प्रैशर गैस वैल्डिंग ( High Pressure Gas Welding)

लो प्रैशर गैस वैल्डिंग (Low Pressure Gas welding)

इस वैल्डिंग विधि में एसीटिलीन गैस को लो प्रेशर एसीटिलीन जैनरेटर में तैयार करके प्रयोग की जाती है और ऑक्सीजन गैस को सिलैण्डर से प्राप्त करते हैं।

हाई प्रेशर गैस वैल्डिंग ( High Pressure Gas Welding)

इस प्रकार की वैल्डिंग विधि में एसीटिलीन गैस सिलैण्डर में भरी होती है, जिसका दबाव' 15.5 kgm/cm' होता है। इस विधि में भी ऑक्सीजन सिलैण्डर में भरी होती है। इस सिलैण्डर में गैस का दाब 12.5 kgm/em होता है।

गैस वैल्डिंग में प्रयुक्त उपकरण

ऑक्सीजन सिलैण्डर (Oxygen Cylinder)

  • ऑक्सीजन सिलैण्डर का रंग काला होता है।
  • यह सिलैण्डर एलॉय स्टील का बना होता है और इसके आउटलेट वाल्व में दायें हाथ की चूड़ियाँ (Right Hand Thread) कटी होती हैं। इसके ऊपर रैगुलेटर फिट किया जाता है।
  • यह सिलैण्डर एसीटिलीन सिलैण्डर की अपेक्षा लम्बा और पतला होता है।
  • ये सिलैण्डर 3400, 5200 तथा 6800 लीटर की क्षमता में मिलते हैं।
  • इस सिलैण्डर में दाब (Pressure) 120 kgm/cm2 से 150 kgm/cm') तक होता है।

एसीटिलीन सिलैण्डर (Acetylene Cylinder)

  • एसीटिलीन सिलैण्डर का रंग मैरून होता है। यह सिलैण्डर आक्साजन सिलैण्डर की अपेक्षा छोटा तथा मोटाई में ज्यादा होता है।
  • ये सिलैण्डर एलॉय मेरून स्टील के बनाए जाते हैं।
  • एसीटिलीन सिलैण्डर के वाल्व पर बायें हाथ (Left Hand Thread) की चूड़ियाँ कटी होती हैं।
  • यह सिलैण्डर 150 k.g/cm दाब पर भरे जाते हैं।
  • एसीटिलीन गैस सिलैण्डरों में उच्च दाब पर बनी नहीं रहती
  • इसलिए ये अलग-अलग क्षमता में उपलब्ध होते है।
  • ऑक्सीजन गैस रैगुलेटर (Oxygen Gas Regulator)
  • ऑक्सीजन गैस सिलैण्डरों में उच्च दाब (High Pressure) में भरी होती है। जब वैल्डिंग में गैस प्रयोग की जाती है तो यह प्रेशर कम होता जाता है। इसलिए कार्यखण्ड तक एक समान प्रेशर बनाए रखने के लिए प्रेशर रेगुलेटर का प्रयोग किया जाता है।
  • प्रेशर रेगुलेटर से निकलने वाली गैस का दाब एक समान ही रहता है।
  • सिलैण्डर का दाब (Pressure) तथा रेगुलेटर से निकलने वाली गैस का दाब (Pressure) जानने के लिए इस रेगुलेटर पर दो दाब गेज (Pressure Gauge) लगे होते हैं।
  • ऑक्सीजन रेगुलेटर का रंग काला होता है। ये रेगुलेटर बनावट के आधार पर दो प्रकार के होते हैं

(i) सिंगल-स्टेज रेगुलेटर (Single Stage Regulator)
(ii) टू-स्टेज रेगुलेटर (Two Stage Regulator)

एसीटिलीन गैस रैगुलेटर (Acetylene Gas Regulator)

Acetylene-Gas-Regulator-In-Hindi


  • यह रेगुलेटर, ऑक्सीजन गैस रेगुलेटर की तरह ही प्रयोग में लाया जाता है।
  • एसीटिलीन गैस रैगुलेटर बाएं हाथ की चूड़ियाँ (Left Hand Thread) कटी होती हैं। यह रैगुलेटर मैरून रंग का होता है।
  • एसिटिलीन गैस सिलैण्डर में गैस दाब (Pressure) और ब्लो पाईप से एसीटिलीन गैस को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • यह रेगुलेटर ऑक्सीजन रेगुलेटर की अपेक्षा भार में हल्का होता है।

एसीटिलीन जनरेटर (Acetylene Generator)

  • कम दाब वैल्डिंग (Low Pressure Welding) में एसीटिलीन गैस तैयार करने के लिए एसीटिलीन जनरेटर की आवश्यकता होती है |
  • इसका प्रयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ एसीटिलीन की खपत अधिक मात्रा में हो।
  • इस जेनरेटर में कैल्शियम कार्बाइड में पानी मिलाकर एसीटिलीन गैस उत्पन्न की जाती है। 
  • इसके लिए दो विधियाँ प्रयोग करते हैं

(i) वाटर-टू कार्बाइड टाइप (Water To Carbide Type)

Water-To-Carbide-Type-Acetylene-Generator


(ii) कार्बाइड-टू वाटर टाइप (Carbide to Water Type)

Carbide-To-Water-Type-Acetylene-Generator


होज पाईप (Hose Pipe)

  • होज पाईप के द्वारा गैस को ब्लो पाईप (Blow Pipe) तक
  • पहुंचाया जाता है।
  • यह पाईप रबड़ और कपडे से मजबूती से बनी होती है।
  • यह इतनी मजबूत होती है कि गैस के दाब (Pressure) को आसानी से सहन कर लेती है।
  • इसके अन्दरूनी व्यास से इसका साइज लिया जाता है, जो अलग-अलग होता है।
  • ऑक्सीजन गैस के लिए हौज पाईप का रंग काला तथा एसीटिलीन गैसे के हौज पाईप का रंग लाल होता है।
  • हौज पाईप की लम्बाई 5 मीटर से 20 मीटर तक होती है |

ब्लो पाईप (Blow Pipe) या गैस वैल्डिंग टॉर्च (Gasw
Torch)

  • ऑक्सीजन गैस तथा एसीटिलीन गैस को आवश्यक मात्रा में ज्वाला (Flame) उत्पन्न करने के लिए ब्लो पाईप का उपयोग किया जाता है।
  • इसके हैण्डल के पीछे ऑक्सीजन और एसीटिलीन गैस कनैक्शन बने होते हैं। इन कनैक्शन में होज पाईप फिट की
  • जाती है |
  • ऑक्सीजन कन्ट्रोल वाल्व से ऑक्सीजन नियंत्रित होती हुई मिक्सिंग चैम्बर के बीच में पहुंचती है।
  • यह मिली हुई गैस नौजल से बाहर निकलकर ज्वाला (Flame) उत्पन्न करती है।
  • ब्लो पाईप के प्रकार

  1. लो प्रेशर ब्लो पाइप (Low Pressure Blow Pipe) 
  2. हाई प्रेशर ब्लो पाइप (High Pressure Blow Pipe)
  3. ऑटोमेटिक या इक्विल प्रेशर ब्लो पाईप (Automatic or Equal Pressure Blow Pipe)

फिलर रॉड तथा फ्लक्स (Filler Rod and Flux)

  • गैस वैल्डिंग में वैल्डिंग की जाने वाली धातु के किनारों के जोड़ के बीच का खाली स्थान भरने के लिए फिलर रॉड (Filler Rod) का प्रयोग किया जाता है।
  • फिलर रॉड का चुनाव वैल्ड किए जाने वाली धातु के आधार पर किया जाता है।
  • ऑक्सीकरण (Oxydation) तथा अन्य रासायनिक क्रियाओं को रोकने के लिए फ्लक्स (Flux) का प्रयोग किया जाता है। अलग -अलग धातुओं के लिए भिन्न-भिन्न फ्लक्स प्रयोग किए जाते हैं।

वैल्डर ड्रेस (Welder Dress)

गैस वैल्डिंग करते समय वैल्डर द्वारा अपने शरीर की सुरक्षा के लिए जिन साधनों का प्रयोग किया जाता है, उसे वैल्डर ड्रेस कहते हैं।
इसमें मुख्य रूप से 4 वस्तुएँ प्रयोग की जाती हैं -
(i) एप्रन (Apron)
(ii) ऐनक (Goggles)
(iii) दस्तानें (Gloves)
(iv) जूते (Shoes)
  • एप्रन (Apron), दस्ताने (Gloves) तथा जूते (Shoes) चमड़े के बने होते हैं।
  • इनको गैस वैल्डिंग में होने वाले स्पार्क की चिंगारियों से सुरक्षा के लिए प्रयोग किया जाता है। जब फीडर रॉड छोटी रह जाती है तो हाथों के जलने का भय रहता है इसलिए हाथों की सुरक्षा के लिए दस्तानों (Gloves) का प्रयोग किया जाता है।
  • वैल्डिंग करते समय ज्वाला (Flame) की तेज रोशनी का आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए आंखों की सुरक्षा के लिए ऐनक (Goggles) का प्रयोग किया जाता है।
  • एप्रन (Apron) का शरीर से आगे के भाग पर इस्तेमाल किया जाता है।

टॉर्च लाइटर (Torch Lighter)

यह एक चिमटे के आकार का यन्त्र है। इसमें एक पत्थर फिट होता है, जिसे घुमाने पर आग उत्पन्न होती है। जो टिप के साथ लगाकर गैसों को जलाती है, जिससे ज्वाला (Flame) बनती है। टॉर्च लाइटर के बिना यदि दियासिलाई से जलाया जाए तो हाथ के जलने का भय रहता है। यदि टॉर्च लाइटर न हो तो इसके लिए जलती हुई रस्सी प्रयोग की जा सकती है।

चाबी और स्पैनर (Key and Spanner)

गैस सिलैण्डरों के वाल्व को खोलने के लिए कभी भी संडासी (Tongs) या प्लास (Plier) का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
इनको खोलने के लिए विशेष प्रकार की चाबियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं।
वैल्डिंग टॉर्च की टिप बदलने के लिए स्पैनर का इस्तेमाल किया जाता है।
वैल्डिंग में प्रयुक्त अन्य उपकरण
(i) हथौड़ा (Hammer)
(ii) जॉब पकड़ने के लिए संडासियाँ (Tongs For Clamp-          Of Jobs)
(iii) छैनी (Chisel)
(iv) रेती (Files)
(v) वाइस (Vice)
(vi) ग्राईंडर (Grinder)

गैस वेल्डिंग ज्वाला (Gas Welding Flame)

  • गैस वैल्डिंग करते समय टिप पर जो दोनों गैसों के मिलने से एक लौ उत्पन्न होती है, उसे ज्वाला (Flame) कहते हैं। ज्वाला के जलने से जो ताप पैदा होता है, उससे ही धातु को पिघलाया जाता है।
  • ऑक्सी-एसीटिलीन गैस के जलने से तीन प्रकार की ज्वाला उत्पन्न होती है, जो निम्नलिखित हैं :

उदासीन ज्वाला(Neutral Flame)

Gas-Walding-Neutral-Flame


  • उदासीन ज्वाला का प्रयोग वैल्डिंग के कार्यों में सबसे अधिक होता है।
  • इस प्रकार की ज्वाला में ऑक्सीजन और एसीटिलीन गैस को ब्लो पाईप (Blow Pipe) में बराबर मात्रा में मिलाकर जलाया जाता है |
  • इस ज्वाला के भीतरी कोन (Inner Cone) की लम्बाई अधिक और आगे से गोलाकर होती है।
  • उदासीन ज्वाला का तापमान 3600°C के लगभग होता है। उदासीन ज्वाला का प्रयोग माइल्ड स्टील (Mild Steel), स्टैनलैस स्टील (Stainless Steel), तांबा (Copper), कास्ट आयरन (Cast Iron), तथा ऐल्यूमिनियम (Aluminium) की वैल्डिंग में किया जाता है।

कार्बुराइजिंग ज्वाला (Carburising Flame)

Gas-Walding-Carburising-Flame


  • इस ज्वाला में ऑक्सीजन गैस की तुलना में एसीटिलीन गैस की मात्रा अधिक होती है।
  • इस ज्वाला में बीच का भाग (Intermediate Zone) भी होता है। इस ज्वाला को रिड्यूसिंग ज्वाला (Reducing Flame) भी कहा जाता है।
  • यदि उदासीन ज्वाला (Neutral Flame) में दी जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा घटा दी जाए तो यह कार्बुराइजिंग ज्वाला बन जाती है।
  • कार्बुराइजिंग ज्वाला का तापक्रम 3038°C तक ही होता है। इस ज्वाला का प्रयोग हार्ड फेसिंग के लिए तथा फ्लेम क्लीनिंग के लिए किया जाता है।
  • कार्बुराइजिंग ज्वाला का प्रयोग - हाई कार्बन स्टील (High Carbon Steel), एलॉय स्टील (Aloy Steel) तथा ऐल्युमिनियम (Aluminium) की वैल्डिंग में भी किया जाता है।

ऑक्सीडाइजिंग ज्वाला (Oxydising Flame)

Gas-Walding-Oxydising-Flame


  • इस ज्वाला में एसीटिलीन गैस की तुलना में ऑक्सीजन गैस की मात्रा अधिक होती है। उदासीन ज्वाला (Neutral Flame) बनाने के बाद यदि ऑक्सीजन गैस की मात्रा बढ़ा दी जाए तो यह बनने वाली ज्वाला ऑक्सीडाइजिंग ज्वाला बन जाती है। यह ज्वाला उदासीन ज्वाला की तरह ही होती है अन्तर केवल इतना होता है कि इसका अन्दरूनी कोन (Inner Cone) उदासीन ज्वाला की अपेक्षा छोटा और पतला होता है।
  • यह ज्वाला ऑक्सीकृत (Oxidise) करती है, जिससे यह ज्वाला वैल्डिंग करने में कमजोर होती है।
  • ऑक्सीडाइजिंग ज्वाला का प्रयोग - स्टील (Steel), पीतल (Brass), कास्ट आयरन (Cast Iron) तथा काँसे की वैल्डिंग में किया जाता है।

गैस वैल्डिंग में ज्वाला में उत्पन्न दोष

ज्वाला का कांपना (Flickering of Fire)

इस दोष में ज्वाला समान रूप से नहीं जलती अर्थात् ज्वाला कांपती हुई जलती है। यह दोष वाटर सील से होज पाईप में पानी आने से उत्पन्न होता है।
निवारण : वाटर सील में पानी का तल चैक कर लेना चाहिए। वैल्डिंग टॉर्च को होज पाईप से निकालकर गैस के वाल्व को खोलकर रुका हुआ पानी बाहर निकाल लेना चाहिए।

ज्वाला का टूटना (Breaking of Flame)

गैस का दाब अधिक होने के कारण ज्वाला वैल्डिंग टॉर्च की टिप से अधिक आगे जलती हुई दिखाई देती है और बार-बार टूटती हुई दिखाई देती है।
निवारण : सिलेण्डरों के रेगुलेटरों के द्वारा दाब (Pressure) कम करने से ज्वाला (Flame) का टूटना बन्द हो जाता है,

ज्वाला के साइज का छोटा-बड़ा होना (Changing,
of Flame)

सिलैण्डरों के दाब रेगुलेटरों (Pressure Regulators) के ठीक तरह से काम न करने के कारण गैसों का दाब कम-ज्यादा रहता है। यह दोष ज्यादातर सिंगल स्टेज रेगुलेटरों में होता है।
निवारण : इस दोष के निदान के लिए सिंगल स्टेज रेगलेटरों स्थान पर डबल-स्टेज रेगुलेटरों का इस्तेमाल करना चाहिए।

बैक फायर (Back Fire)

वैल्डिंग करते समय ज्वाला का अचानक पटाखा होने के बाद बन्द हो जाना, बैक फायर कहलाता है।
निवारण : वैल्डिंग टॉर्च को बन्द करके उसकी टिप को ठण्डा करने के बाद साफ करने के बाद वैल्डिंग प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

फ्लैश बैक (Flash Back)

वैल्डिंग करते समय ज्वाला (Flame) वैल्डिंग टॉर्च के अन्दर चली जाती है तथा हैण्डल को गर्म कर देती है। इस दोष में सी - सी की आवाज भी आती है।
निवारण : इस दोष से बचने के लिए टॉर्च के दोनों नीडल वाल्व को बन्द कर देना चाहिए। वाटर सील का पानी चैक कर चाहिए। दोष को सही करके ही वैल्डिंग प्रक्रिया शुरू चाहिए।

पोपिंग (Popping)

इस दोष के कारण जलती हुई ज्वाला में पिट-पिट की
आती है। यह दोष गैस की सप्लाई कम होने के कारण पैदा है। टॉर्च को धातु पर एक जगह अधिक देर तक रखने से भी दोष उत्पन्न होता है।
निवारण : वैल्डिंग टॉर्च के नीडल वाल्व (Needle Valves) को खोलकर गैस की सप्लाई बढ़ा देनी चाहिए तथा वैल्डिंग टॉर्च को एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रखना चाहिए।

टॉर्च टिप तथा हैड का अधिक गर्म हो जाना (Torch Tip and Head becomes too Hot)

ताप के रेडियेशन के कारण ज्वाला (Flame) का सही दिशा में प्रयोग न करने के कारण टिप (Tip) तथा हैड (Head) गर्म हो जाते हैं।
निवारण : वैल्डिंग टॉर्च का अधिक गर्म होने पर उसे पानी द्वारा ठण्डा कर लेना चाहिए। ऐसा करते समय टॉर्च का वाल्व खुला रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करते समय कभी-कभी वाल्व में पानी भर जाता है।

आर्क वैल्डिंग (Arc Welding) तथा आर्क वैल्डिंग में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण

 

इस पोस्ट में हम जानेंगे आर्क वैल्डिंग (Arc Welding) तथा आर्क वैल्डिंग में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण जैसे-वैल्डिंग सैट (Welding Set) वेल्डिंग गेज (Walding Gauge) वैल्डिंग केबल (Welding Cables) चिपिंग हैमर (Chipping Hammer) आदि के बारे में |

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आर्क वैल्डिंग (Arc Welding)

  • जिस वैल्डिंग में जोड़े जाने वाली धातु के किनारों को विद्युत के करन्ट के द्वारा ताप देकर गलाया जाता है, उस वैल्डिंग को आर्क वैल्डिंग कहते हैं। 
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  • इस वैल्डिंग में धातुओं को ताप प्रदान करने के लिए वैल्डिंग रॉड़ प्रयोग किए जाते हैं, जो धातुओं और बिजली के इलैक्ट्रॉड (Electric Electrode) होते हैं। बिजली के द्वारा बनी ज्वाला (Flame) का तापमान 3600°C से 4000°C तक होता है।
  • यह ताप धातुओं तथा इलैक्ट्रॉड को पिघला देता है, जिससे ये धातुएँ आपस में जुड़ जाती हैं।
  • इस वैल्डिंग में दो प्रकार की विद्युत प्रयोग की जाती है, जिसे ए.सी. वैल्डिंग तथा डी.सी. वैल्डिंग कहा जाता है। ए.सी. वैल्डिंग में ट्रांसफार्मर (Transformer) द्वारा करंट प्राप्त किया जाता है तथा डी.सी. वैल्डिंग में डी.सी. जैनरेटर (D.C. Generator) या रैक्टीफायर (Rectifire) द्वारा करंट प्राप्त किया जाता है। 

आर्क वैल्डिंग में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण

वैल्डिंग सैट (Welding Set)

बिजली की आर्क (Arc) के लिए आवश्यक मात्रा में वोल्टेज तथा करंट को कार्यखण्ड तक पहुंचाने के लिए जिस उपकरण (Devical का प्रयोग किया जाता है, उस उपकरण को वैल्डिंग सैट (Welding Set) कहते हैं। वैल्डिंग सैट इस प्रकार के बने होते हैं कि करंट और वोल्टेज को आवश्यकतानुसार सप्लाई करें। आर्क वैल्डिंग में अधिक करंट और कम वोल्टेज की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वैल्डिंग सैट का प्रयोग किया जाता है।

वैल्डिंग सैट दो प्रकार के होते हैं

  1. डायरैक्ट करंट वैल्डिंग सैट (Direct Current Welding Set)
  2. आल्टरनेटिंग करंट वैल्डिंग सैट (Alternating Current Welding Set) 

वैल्डिंग केबल (Welding Cables) 

  • वैल्डिंग केबल बिजली की तारें होती हैं, जो वैल्डिंग सैट से कार्य- खण्ड तक तथा कार्य खण्ड से वापस वैल्डिंग सैट तक करंट ले जाने में सहायता करती है।
  • जिन केबल्स का प्रयोग वैल्डिंग सैट से इलैक्ट्रॉड होल्डर तक किया जाता है, उसे इलैक्ट्रॉड केबल कहते हैं। 
  • ये केवल ताम्बे की बनी होती है और सुपर फ्लैक्सीबल रबर से ढकी होती है, इलैक्ट्रॉड केबल और अर्थ केबल एक समान साइज की प्रयोग की जाती है। 

अर्थ क्लैम्प (Earth Clamp)

अर्थ क्लैम्प को ग्राउन्ड क्लैम्प भी कहा जाता है। 
अर्थ केबल को वैल्डिंग टेबल या जॉब के साथ जोड़ने में अर्थ क्लैम्प की आवश्यकता पड़ती है।
अर्थ क्लैम्प ताँबे या तांबे के एलॉय के बनाए जाते हैं। 

वैल्डिंग हैण्ड स्क्रीन (Welding Hand Screen) 

वैल्डिंग करते समय बिजली की तेज और हानिकारक रोशनी से ऑखों और चेहरे के बचाव के लिए वैल्डिग हैण्ड स्क्रीन का प्रयोग किया जाता है। स्क्रीन को हाथ में पकड़कर वैल्डिंग करने का प्रयोग किया जाता है |
वैल्डिंग से उत्पन्न हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणें तथा अल्फ्रारेंड किरणों से भी वैल्डिंग हैण्ड स्क्रीन बचाव करती है। 

वेल्डिंग गेज (Walding Gauge)

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वेल्डिंग किए गए जोड़ में भरी गई फिलर धातु की मोटाई को मापने के लिए वेल्डिंग गेज का प्रयोग किया जाता है |
वेल्डिंग गेज की सहायता से बट और फिलेट जोड़ भी चेक किए जाते हैं |

वैल्डिंग हैल्मेट (Halmet)

वैल्डिंग हैन्ड स्क्रीन और हैल्मेट दोनों एक ही प्रकार के होते हैं। अन्तर केवल इतना होता है कि वैल्डिंग हैण्ड स्क्रीन के प्रयोग से वैल्डर का एक हाथ स्वतन्त्र होता है। परन्तु हैल्मेट के प्रयोग से वैल्डर के दोनों हाथ स्वतन्त्र होते हैं। इसमें रंगदार शीशे के साथ प्लेन शीशे लगे होते हैं। 

चिपिंग हैमर (Chipping Hammer)

वैल्डिंग की हुई सतह से मैल (Slag) उतारने या हटाने के लिए चिपिंग हैमर का प्रयोग किया जाता है। ये हैमर मिडियम कार्बन स्टील के के बनाए जाते हैं और लकड़ी का हैण्डल फिट होता है। इसके दोनों सिरे छैनी (Chiesel) के जैसे तेज बने होते हैं ताकि चिपिंग में आसानी हो। 

ऐनक (Goggles)

ये ऐनक चिपिंग ऐनक (Chipping Goggles) के नाम से भी जानी जाती हैं। इनका प्रयोग चिपिंग और ग्राइन्डिंग करते समय किया जाता है। इनको सिर पर लगाने के लिए इलास्टिक बैंड (Elastic Band) लगी होती है। इसका प्रयोग इसलिए किया जाता है कि आंखों में चिप्स ना पड़े। 

वायर ब्रुश (Wire Brush) 

यह ब्रुश लकड़ी का बना होता है, जिसमें स्टील की तारे फिट की हुई होती हैं। तारों की कार्य क्षमता लम्बे समय तक बढ़ाने के लिए इनको हार्ड एण्ड टैम्पर किया होता है। वायर ब्रुश के प्रयोग के समय इसे एक ही दिशा में चलाना चाहिए। गर्म जॉब पर वायर ब्रुश प्रयोग नहीं किए जाते क्योंकि ऐसा करने से इनकी स्ट्रेंग्थ समाप्त हो जाती है। 

दस्ताने, एप्रन तथा लैग गार्ड आदि (Gloves, Apron And Leg Guard etc.)

  • वैल्डिंग करते समय वैल्डर को अपने शरीर की सुरक्षा की बहुत आवश्यकता होती है। इसके लिए दस्ताने, एप्रन और लैग गार्ड उसकी सुरक्षा के लिए उत्तम हैं। 
  • ये चमड़े के बने हुए होते हैं। 
  • ये उड़ती हुई चिंगारियों (Sparks), फ्लैश (Flash), हीट (Heat) तथा स्पैटर्स (Spatters) आदि से बचाव करते हैं। दस्तानों (Gloves) का प्रयोग हाथों की सुरक्षा के लिए करते हैं, एप्रन (Apron) का प्रयोग शरीर के सामने की सुरक्षा के लिए करते हैं, लैग गार्ड पैरों की सुरक्षा के लिए प्रयोग किए जाते हैं तथा चमड़े के बने जूते प्रयोग किए जाते हैं। 

टूल किट (Tool Kit)

टूलं किट को टूल बॉक्स भी कहा जाता है। इसमें निम्न प्रकार के औजार होते हैं :
(A) स्टील रूल (Steel Rule)
(B) ट्राई स्क्वायर (Try Square)
(C) हैमर (Hammer)
(D) पंच (Punch)
(E) संडासियाँ (Tongs)
(F) स्क्राइबर (Scriber)
(G) रेतियाँ (Files)
(H) प्लास (Pliers)
(I) बेवल प्रोट्रेक्टर (Bevel Protractor)
(J) प्लम्बर बॉब (Plumb Bob)
(K) छैनियां (Chisels)
(L) स्प्रिट लेवल (Sprit Level) 

आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड Document upload in Aadhar Card

 इस पोस्ट में हम जानेगे आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करना क्यों जरुरी है और आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करने की प्रक्रिया क्या है | आधा...