चूड़ियों (थ्रेड) को चेक करने के लिए मापने वाले यंत्र

 इस पोस्ट में हम चूड़ियों (थ्रेड) को चेक करने के लिए मापने वाले यंत्र जैसे- स्क्रु पिच गेज, थ्रेड गेज, रिंग गेज, स्क्रु थ्रेड कैलीपर गेज, स्क्रु थ्रेड माइक्रोमीटर, थ्री वायर विधि आदि के बारे में विस्तार से जानेंगे |

चूड़ियों (थ्रेड) को चेक करने के लिए मापने वाले यंत्र

चूड़ी बनाने के बाद उनकी एक्यूरेसी एवं उनकी उपयोगिता के आधार पर जो एक निश्चित माप होनी चाहिए उसको चेक करने के लिए हम चूड़ियों को विभिन्न प्रकार के गेज के माध्यम से जांच करते हैं जो निम्नलिखित हैं|
1. स्क्रु पिच गेज(screw pitch gauge)
2. थ्रेड गेज(thread gauge)
3. थ्रेड रिंग गेज(thread ring gauge)
4. स्क्रु थ्रेड कैलीपर गेज(screw thread caliper gauge)
5. स्क्रु थ्रेड माइक्रोमीटर(screw thread micrometre)
6. थ्री वायर विधि(3 wire process)

स्क्रु पिच गेज(screw pitch gauge)

screw-pitch-gauge
screw-pitch-gauge


स्क्रु पिच गेज के द्वारा चूड़ी के आंतरिक भाग तथा बाहरी भाग को चेक किया जाता है |
इसमें पिच के अनुसार अलग-अलग ब्लेड लगे होते हैं तथा इन ब्लेडो पर नंबर और साइज लिखा होता है|
पिच की शुद्धता चेक करने के लिए स्क्रु पिच गेज एक अच्छा साधन है|

थ्रेड गेज(thread gauge)

थ्रेड गेज से यह चेक किया जाता है की चूड़ी की दी गई टोलरेंस लिमिट में है अथवा नहीं |
इस गेज से किसी जॉब की आंतरिक चूड़ियों को चेक किया जाता है|
Thread-gauge


इस गेज के GO सिरे की तरफ से प्रोफाइल कौण, पिच, मेजर डायमीटर, माइनर डायमीटर, और प्रभावी व्यास आदि को चेक किया जाता है|

थ्रेड रिंग गेज(thread ring gauge)

यह गेज GO तथा NOT GO दो गेज के सेट के रूप में मिलते हैं|
Thread-ring-gauge


थ्रेड रिंग गेज की सहायता से बाहरी चूड़ियों को शुद्धता से चेक किया जा सकता है|
इसके द्वारा यह चेक किया जाता है कि किसी जॉब कि थ्रेड दी गई टोलरेंस लिमिट में है अथवा नहीं|

स्क्रु थ्रेड कैलीपर गेज(screw thread caliper gauge)

इस गेज का इस्तेमाल(उपयोग) अन्य गेजो की तुलना में अधिक किया जाता है|
इस प्रकार की गेज का प्रयोग बाहरी चूड़ियां चेक करने के लिए किया जाता है|
Screw-thread-caliper-gauge


स्क्रु थ्रेड कैलीपर गेज 2 एंन्विल  लगे होते हैं, जिनके बीच में चूड़ियों को लगाकर चेक किया जाता है|
यह गेज एक उच्च प्रभावी गेज होता है|

स्क्रु थ्रेड माइक्रोमीटर(screw thread micrometre)

यह माइक्रोमीटर आउटसाइड माइक्रोमीटर की तरह ही बना होता है|
Screw-thread-micrometre


इसके द्वारा स्क्रु थ्रेड के प्रभावी व्यास(effective diameter) को चेक किया जा सकता है|
इस माइक्रोमीटर की एंन्विल तथा स्पिंडल के प्वाइंटों को बदला जा सकता है|

थ्री वायर विधि(three wire process)

यह एक प्रकार का आउटसाइड माइक्रोमीटर होता है|
इसके स्पिंडल के सिरे पर एक तार(wire) तथा एंन्विल के सिर पर दो तार होल्डरों में फिक्स होते हैं|

three-wire-process
three-wire-process


यह तीनों तार उच्च डिग्री की शुद्धता पर फिनिश करके बनाए जाते हैं|
इस विधि से थ्रेड के प्रभावी व्यास तथा फ्लैंक की आकार को चेक किया जाता है|

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चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार तथा पिच और लीड में अंतर

इस पोस्ट में हम चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार तथा पिच और लीड के बीच अंतर एवंम सिंगल स्टार्ट चुड़ी तथा मल्टी स्टार्ट चूड़ियों में अंतर के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे|

चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार

चाल के आधार पर चूड़ियां तीन प्रकार की होती हैं
1. सिंगल स्टार्ट थ्रेड(single start thread)
2. डबल स्टार्ट थ्रेड(double start thread)
3. मल्टी स्टार्ट थ्रेड(multi start thread)

सिंगल स्टार्ट थ्रेड(single start thread)

इन चूड़ियों में चूड़ी केवल एक स्थान से शुरू होकर अंत तक चली जाती है|
सिंगल स्टार्ट थ्रेड चूड़ी की लीड चूड़ी के पिच के बराबर होती है|

डबल स्टार्ट थ्रेड(double start thread)

डबल स्टार्ट थ्रेड मैं चूड़ी कि लीड चूड़ी की पिच के 2 गुना हो जाती है|
इस प्रकार की चूड़ियों में दो चूड़ियां दो अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर अंत तक चली जाती हैं|

मल्टी स्टार्ट थ्रेड(multi start thread)

मल्टी स्टार्ट थ्रेड मे तीन या अधिक चूड़ियां अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर अंत तक चली जाती है|
इन चूड़ियों में जितने स्टार्ट की चूड़ियां होती हैं उसमें लीड उस की पिच की उतने ही गुनी हो जाती है, जैसे- तीन स्टार्ट वाली चूड़ी की पिक्चर की तीन गुनी होगी|

पिच और लीड में अंतर(difference between pitch and lead)

1. पिच(pitch)

एक चूड़ी के केंद्र से दूसरी चूड़ी तक के बीच की दूरी को पिच कहते हैं |
पिच चूड़ियों के प्रति इन संख्या पर निर्भर करती है अर्थात पिच= 1/T.P.I.
एक मुंह वाली चूड़ी की पिच व लीड समान होती है|

लीड(Lead)

बोल्ट या पेच एक चक्कर पूरा करने में अपनी दूरी पर जितनी दूर आगे पीछे बड़ता है, उस दूरी को लीड कहते हैं |
लीड चूड़ी की पिक और उसके स्टार्ट पर निर्भर करती है अर्थात लीड= पिच×नंबर ऑफ स्टार्ट
जितने मुंह की चूड़ी होती है लिड पिच से उतनी ही गुना होती है |

सिंगल स्टार्ट चुड़ी तथा मल्टी स्टार्ट चूड़ियों में अंतर(difference between single start thread and multi start thread)

इकहरी चाल चूड़ी(single start thread)

यह एक चाल की चूड़ी होती है |
इन चूड़ियों का प्रारंभिक सिरा एक होता है |
इकहरी चाल चूड़ियां की पूरी लंबाई मैं केवल एक ही चूड़ी शुरू से अंत तक चलती है |
इकहरी चाल चूड़ी मैं लीड और पिच बराबर होते हैं|
यह चूड़ियां दो या दो से अधिक पार्ट्स को जोड़ने के लिए प्रयोग की जाती है|

बहु चाल चूड़ी(multi start thread)

यह चूड़ियां एक से अधिक चाल की जुड़ी होती है|
इन चूड़ियों में एक से अधिक प्रारंभिक सिरे होते हैं|
बहु चाल चूड़ी में समान दूरी पर दो या तीन या इससे अधिक एक ही माप वाली अलग-अलग चूड़ियां एक दूसरे के समांतर चलती हैं |
इस प्रकार की चूड़ी मे जितनी चूड़ियां अधिक होती है लिड उतनी ही गुना हो जाती है|
यह चूड़ियां शीघ्र चाल(quick drive) हेतु प्रयोग में लाई जाती है |

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स्क्रु थ्रेड (पेच चूड़ियों) के प्रकार और उपयोग

 इस पोस्ट में हम पेच चूड़ियों(screw threads) के प्रकार V चूड़ियों के प्रकार तथा स्क्वेअर एवं स्क्वेअर संशोधित चूड़ियों के बारे में विस्तार से जानेगे

स्क्रु थ्रेड(पेच चूड़ियों) के प्रकार | types of screw threads

स्क्रु थ्रेड(पेच चूड़ियों) को निम्नलिखित दो वर्गों में बांटा जा सकता है -
1. V चूड़ियां(V - threads)
2. स्क्वेयर एंड स्क्वेयर संशोधित चूड़ियां(square and Square modified threads)

1. V चूड़ियां(V - threads)

इस प्रकार की चूड़ियां अंग्रेजी के अक्षर V के आकार की होती है|
यह चूड़ियां मानक साइज(STANDARD SIZE) में पाई जाती है|

V चूड़ियों के प्रकार(types of V threads)

V चूड़ियां सात प्रकार की होती है-
1. ब्रिटिश स्टैंडर्ड विटवर्थ थ्रेड(B.S.W.)
2. ब्रिटिश स्टैंडर्ड फाइन थ्रेड(B.S.F.)
3. ब्रिटिश स्टैंडर्ड पाइप थ्रेड(B.S.P.)
4. ब्रिटिश एसोसिएशन थ्रेड(B.A.)
5. शार्प वी थ्रेड(Sharp V threads)
6. अमेरिकन नेशनल थ्रेड(American national thread)
7. भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड(Indian standard thread)

ब्रिटिश स्टैंडर्ड विटवर्थ थ्रेड(B.S.W.)

इन चूड़ियों को बीएसडब्ल्यू चूड़ियां भी कहते है|
B.S.W. चूड़ियों का आविष्कार जोसफ विट वर्थ ने सन 1841 ईस्वी में किया|
B.S.W-thread,
B.S.W-thread


यह चूड़ियां मानक साइज(standard size) मैं मिलती हैं |
B.S.W. चूड़ियों का उपयोग साधारण कार्यों नट बोल्ट स्टड तथा पेचो में किया जाता है|
B.S.W. चूड़ियों कार कोण 55 डिग्री होता है|
इन चूड़ियों की गहराई=0.6403P होती है|

ब्रिटिश स्टैंडर्ड फाइन थ्रेड(B.S.F.)

यह चूड़ियां B.S.W. चूड़ियों के समान ही होती हैं परंतु अंतर केवल इतना होता है कि इन की पिच बारीक होती है|
B.S.W. चूड़ियों की अपेक्षा B.S.F. चूड़ियों की प्रति इंच संख्या अधिक होती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर प्रयोग कंपन्न वाले पार्ट के साथ किया जाता है |
चूड़ियों का उपयोग अधिकतर ऑटोमोबाइल्स वायुयान या मशीन टूल्स में किया जाता है|
B.S.F. चूड़ियों का कोण 55 डिग्री होता है |
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.)
चूड़ियों की गहराई =0.6403 P होती है|
चूड़ियों की त्रिज्या =0.1373 P होती है|

ब्रिटिश स्टैंडर्ड पाइप थ्रेड(B.S.P.)

इस प्रकार की चूड़िया पानी गैस तथा भाप के पाइपों में काटी जाती है|
B.S.P. चूड़ियों का उपयोग वाटर जॉइंट बनाने के लिए किया जाता है |
इस प्रकार की चूड़ियां व्यास में प्रति फुट 3/ 4 इंच टेपर होती हैं|
B.S.P. चूड़ियों का कोण 55 डिग्री होता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.) होती है|

ब्रिटिश एसोसिएशन थ्रेड(B.A.)

यह चूड़ियां बहुत बारीक होती है और यह छोटे-छोटे पेचों में काटी जाती है |
British-association-thread
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यह चूड़ियां 0 से 25 नवंबर तक होती है|
परंतु कार्यशाला मैं अधिकतर जीरो से 10 नंबर तक ही चूड़ियां प्रयोग की जाती है|
जीरो नंबर की इन चूड़ियों का आउटसाइड डायमीटर 6 मिलीमीटर तक होता है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग रेडियो घड़ियों कैमरो तथा टेलीफोन आदि में किया जाता है |
इन चूड़ियों को बीए (B.A.) चूड़ियां भी कहते हैं|
इन चूड़ियों का कौन 47 1/2 डिग्री होता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.) होती है|
B.A चूड़ियों की गहराई = 0.6P होती है|
इनकी त्रिज्या = 2×P/11=0.1818P होती है|

शार्प वी थ्रेड(Sharp V threads)

इस  की चूड़ियां V आकृति में बनी होती है
इन चूड़ियों की रूट और क्रेस्ट बहुत ही नुकीले होते हैं तथा यह बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं |
इन चूड़ियों का कौन 60° डिग्री होता है
इन चूड़ियों की गहराई =0.866P होती है|

अमेरिकन नेशनल थ्रेड(American national thread)

इन चूड़ियों को सेलर चूड़ियां(seller thread) भी कहते हैं|
यह चूड़ियां अमेरिकन मशीनों में पाई जाती हैं|
यह कौरस और फाइंन दो ग्रेडों में पाई जाती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग हवाई जहाज मोटर गाड़ी आदि बनाने में किया जाता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की रूट और क्रेस्ट चपटे(flat)
होते हैं|
इन चूड़ियों का कौन 60° डिग्री होता है|

भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड(Indian standard thread)

यह चूड़ियां भारतीय मानक संस्थान आई एस आई,(I. S. I.) से मान्यता प्राप्त होती हैं|
Indian-standard-thread
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यह चूड़ियां आई एस आई के अनुसार जीरो  0.25 मिलीमीटर से 300 मिली मीटर तक के व्यासों में पाई जाती हैं|
भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड का कोण 60 डिग्री होता है|

स्क्वेयर एंड स्क्वेयर संशोधित चूड़ियां(square and Square modified threads)

यह चूड़ियां V आकार की चूड़ियों से अधिक मजबूत होती हैं तथा ये निम्नलिखित प्रकार में पाई जाती हैं|
1. स्क्वेयर थ्रेड(square thread)
2. एक्मे थ्रेड(acme thread)
3. नकल थ्रेड(knuckle thread)
4. बटरैस थ्रेड(buttress thread)

स्क्वेयर थ्रेड(square thread)

यह चूड़ियां अधिक मजबूत होती हैं|
स्क्वेयर थ्रेड का अधिकतम उपयोग वॉइस के स्पिण्डल, प्रेस, स्क्रु जैक, आदि में किया जाता है |
इन चूड़ियों के लिए फ्लैट की मोटाई = 0.5P होती है|
इन चूड़ियों के लिए स्पेस की मोटाई = 0.5P होती है|

एक्मे थ्रेड(acme thread)

यह चूड़ियां बहुत ही अधिक मजबूत होती है|

acme-thread
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इनका अधिकतर प्रयोग पावर संचरण(power transmission) मैं किया जाता है|
लेथ मशीन की लीड स्क्रु पर इस प्रकार की चूड़ियां बनाई जाती है, जिससे स्प्लिट नट को आसानी से जोड़ करने और अलग करके ऑटोमेटिक फिड ली जा सकती है|
एक्मे चूड़ियों का कौण 29 डिग्री होता है|

नकल थ्रेड(knuckle thread)

नकल चूड़ियों में चूड़ी के रूट और क्रेस्ट अर्ध्द गोल(half round) बने होते हैं|
यह चूड़ियां रोल करके बनाई जाती है क्योंकि रोल करके बनाई गई चूड़ी टुल से बनी चूड़ी की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग रेलवे कपलिंग बनाने के लिए किया जाता है|

बटरैस थ्रेड(buttress thread)

यह चूड़ियां एक साइड अक्ष के समकोण पर तथा दूसरी साइड 45 डिग्री के कोण पर बनी होती है|

buttress-thread
buttress-thread


इन चूड़ियों का अधिकतर प्रयोग वहां किया जाता है जहां एक ही दिशा में अधिक दबाव पड़ता हो |
बटरैस चूड़ी का कोण 45 डिग्री होता है |

चूड़ियों का परिचय, उपयोग, गति के आधार पर प्रकार, और चूड़ी के भाग

आज हम जानेंगे चूड़ियों(threads) का परिचय, कार्य के अनुसार चूड़ियों के उपयोग, गति के आधार पर चूड़ियों के प्रकार, तथा चूड़ी के भाग के बारे में |

चूड़ियों का परिचय(introduction of threads)

किसी गोल आकार को जॉब के बाहरी या भीतरी सतह पर एक समान दूरी से लगातार बढ़ती हुई घुमावदार झुकी हुई झिर्रियों(grooves) को चूड़ियां कहते हैं|

बाहरी चूड़ियां(external threads)

जॉब के बाहरी सतह पर बनी चूड़ियों को बाहरी चूड़ियां(external threads) कहते हैं| जैसे-बोल्ट, स्टड, पेच और स्पिन्डल आदि में कटी चूड़ियां |

भीतरी चूड़ियां(internal threads)

जॉब के गोल छेद में कटी चूड़ियों को भीतरी चूड़ियां(internal threads) कहते हैं, जैसे- नट, या जॉब के अन्य छेदो में कटी चूड़ियां |

कार्य के अनुसार चूड़ियों के उपयोग (threads use according to works)

अलग-अलग कार्यों के अनुसार चूड़ियों का उपयोग निम्न प्रकार से कर सकते हैं|
1. बंधक की तरह(as a fastener)
2. गति देने के लिए(for transmit motion)
3. भार उठाने के लिए(for load lifting)
4. सही माप के लिए(for accurate measurement)
5. गति को कम करने के लिए(for speed reduction)
6. समायोजन के लिए(for adjustment)

बंधक की तरह(as a fastener)

पेच चूड़ियों(screw threads) की सहायता से दो या दो से अधिक भागों(parts) को आपस में आसानी से जोड़ा जा सकता है, जैसे- नट, बोल्ट, तथा स्क्रू द्वारा

गति देने के लिए(for transmit motion)

पेच चूड़ियों की सहायता से गति भी दी जा सकती है, जैसे-लेथ मशीन की लीड स्क्रु और रैक एवं पिनियन |

भार उठाने के लिए(for load lifting)

पेच चूड़ियों(screw threads) की सहायता से कम बल लगाकर अधिक भार को आसानी से उठाया जा सकता है, जैसे-स्क्रु जैक की सहायता से भारी वाहनों को आसानी से उठाया जा सकता है |

सही माप के लिए(for accurate measurement)

पेच चूड़ियों(screw threads) का प्रयोग करके सही माप ले सकते हैं, जैसे- माइक्रोमीटर द्वारा मांप लेना |
गति को कम करने के लिए(for speed reduction)
चूड़ियों की सहायता से गति को कम किया जा सकता है|जैसे- वर्म तथा वर्म व्हील  के द्वारा गति को कम करना |

समायोजन के लिए(for adjustment)

चूड़ियों(threads) की सहायता से किसी वस्तु को समायोजन कर सकते हैं, जैसे- डाई स्टॉक में समायोजन(adjustment) करना |

गति के आधार पर चूड़ियों के प्रकार(types of threads according to speed)

गति के आधार पर सभी चूड़ियां दो प्रकार की होती हैं|
1. वामाव्रत चूड़ियां(left hand threads)
2. दक्षिणावर्त चूड़ियां(right hand threads)


वामाव्रत चूड़ियां(left hand threads)

Left-hand-threads,वामावर्त-चुडिया
Left-hand-threads


यह चूड़ियां घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में घूमाते समय कसी जाती है|
इन चूड़ियों का झुकाव(inclination) बायी और होता है |

दक्षिणावर्त चूड़ियां(right hand threads)

Right-hand-threads,दक्षिणावर्त-चूड़ियां
Right-hand-threads


दक्षिणावर्त चूड़ियां घड़ी की सुई की दिशा(clockwise) में घूमाते समय कसी जाती हैं |
इन चूड़ियों का झुकाव(inclination) दायीं और होता है | इन चूड़ियों का उपयोग अधिकतर इंजीनियरिंग कार्यों में किया जाता है |

चूड़ी के भाग(parts of threads)

चूड़ी के भागों को आप इस चित्र के माध्यम से देख व समझ सकते हैं|

Parts-of-threads,चूड़ी-के-भाग
Parts-of-threads

1. मेजर डायमीटर(major diameter)

यह किसी चूड़ी का सबसे बड़ा व्यास होता है|

2. माइनर डायमीटर(minor diameter)

यहां किसी चूड़ी का सबसे छोटा व्यास होता है |

3. पिच डायमीटर(pitch diameter)

यह किसी चूड़ी का काल्पनिक व्यास होता है जो कि मेजर डायमीटर तथा माइनर डायमीटर के बीच में स्थित होता है यदि मेजर डायमीटर में से चूड़ी की अकेली गहराई घटा दी जाए तो पिच डायमीटर ज्ञात हो जाता है |

4. अक्ष(axis)

किसी पेज(screw) के बीचो बीच केंद्र(centre) से उसकी पूरी लंबाई तक गुजरती हुई सीधी रेखा को अक्ष(axis) कहते हैं |

5. पिच(pitch)

एक चूड़ी(thread) के केंद्र(centre) से दूसरी चूड़ी के केंद्र के बीच की दूरी को पिच कहते हैं |

6. लीड(lead)

पेज चूड़ी(screw thread) एक चक्कर में जितनी दूरी तय करती है वह उसकी लीड कहलाती है सिंगल स्टड वाली चूड़ी में लीड और पिच बराबर होती है |

7. क्रेस्ट(crest)

चूड़ी की दोनों साइडें ऊपर की तरफ जिस स्थान पर आकर मिलती हैं उसे क्रेस्ट कहते हैं |
8. रूट(root)
पेच चूड़ी की दोनों साइडें नीचे की तरफ जिस स्थान पर आकर मिलती हैं उसे रूट कहते हैं |

9. फ्लेंक या साइड(falank aur side)

यह चूड़ी की तिरछी सतह होती है, जो क्रेस्ट और रूट को मिलाती है |

10. चूड़ी का कोण(angle of thread)

पेज चूड़ी की दोनों साइड आपस में मिलने के बाद जो कौण बनता है उसे चूड़ी का कौण कहते हैं |

11. हेलिक्स कोण(helix angle)

पिच डायमीटर अक्ष के लंबवत पेच चूड़ी के हेलिक्स के द्वारा बनाया हुआ कोण हेलिक्स कोण कहलाता है |

12. चूड़ी की गहराई(depth of threads)

पेच चूड़ी के क्रेस्ट और रूट के बीच की दूरी को यदि अक्ष के लंबवत मान लिया जाए तो वह चूड़ी की गहराई कहलाती है |

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समानान्तर ब्लॉक और उसके प्रकार

 इस पोस्ट में हम जानेंगे समानान्तर ब्लॉक किस धातु के बनाए जाते हैं समानांतर ब्लॉक का उपयोग क्या है तथा यह कितने प्रकार के होते हैं|

समानान्तर ब्लॉक | parallel blocks

समानांतर ब्लॉक एक समान आकृति में बनाए गए बहुत सारे ब्लॉक  होते हैं यह ग्रेड तथा नंबरों के आधार पर कार्य करते हैं जोकि इन ब्लॉकों पर मार्किंग के द्वारा अंकित किया जाता है|

समानान्तर ब्लॉक किस धातु के बनाए जाते हैं

समानांतर ब्लॉक हाई कार्बन स्टील के द्वारा बनाये जाते है तथा इनको हार्ड एवं टैम्पर किया जाता है|

समानांतर ब्लॉक का उपयोग | use of parallel block

इनका उपयोग किसी जॉब या कार्यखण्ड की मशीनींग करते समय जॉब की सेटिंग के लिए किया जाता है|
यह चौड़ाई और मोटाई में समान्तर होते हैं|

समानान्तर ब्लॉक के प्रकार | types of parallel blocks

समानांतर ब्लॉक दो प्रकार के होते हैं|
1. ठोस समानान्तर ब्लॉक(solid parallel blocks)
2. समायोज्य समानान्तर ब्लॉक(adjustable parallel blocks)

ठोस समानान्तर ब्लॉक(solid parallel blocks)

इस प्रकार के समानान्तर ब्लॉक का अधिकतम प्रयोग किया जाता है|
ठोस समानान्तर ब्लॉकों पर नंबर अंकित होते हैं |
यह 2 ग्रेड में ग्रेड A तथा ग्रेड B मैं बनाये जाते है|
ग्रेड A वाले समानान्तर ब्लॉक अधिक परिशुद्ध होते हैं इसलिए इनका प्रयोग टूल रूम में किया जाता है|
और ग्रेड B वाले समानांतर ब्लॉक का प्रयोग कार्यशाला में सामान्य कार्यों के लिए किया जाता है|

solid-parallel-blocks,thos-samanantar-block,
solid-parallel-blocks


इनको टाइप ग्रेड साइज तथा नंबर आदि से नामित किया जाता है जैसे-  सोलिड पैरेलर AS×10×100 IS : 42 41 आदि |

ठोस समानान्तर ब्लॉक के साइज (table size of solid parallel blocks)

ठोस समानांतर ब्लॉक की साइज आप निम्नलिखित टेबल में चित्र के माध्यम से देख व समझ सकते हैं|

size-of-solid-parallel-blocks,ठोस-समानांतर-ब्लॉक-का-साइज
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समायोज्य समानान्तर ब्लॉक(adjustable parallel blocks)

समायोज्य समानांतर ब्लॉक 2  सेट के रूप में मिलते हैं|
यह टेपर में बने होते है और परस्पर यह एक दूसरे पर स्लाइड करते हैं|
Adjustable-parallel-blocks,समायोजित-समानांतर-ब्लॉक
Adjustable-parallel-blocks


इनके सेट में एक ब्लॉक में खांचा(groove) कटा होता है तथा दूसरे ब्लॉक में टैंग बनी होती है|
इस प्रकार के ब्लॉक का उपयोग जॉब की मशीनींग करते समय जॉब की सेटिंग में वॉइस टेबल पर जॉब तो सहारा देने के लिए तथा जॉब को ऊंचाई में सेट करने के लिए किया जाता है |
समायोजित समानांतर ब्लॉक को इसकी टाइप साइज तथा मानक नंबर से नामित किया जाता है |
जैसे- adjustable parallel 10×131.5 : 42 41

समायोज्य समानांतर ब्लॉक की साइज(table size of adjustable parallel block)

समायोज्य समानांतर ब्लॉक की साइज आप निम्नलिखित  टेबल में देख सकते हैं|

size-of-adjustable-parallel-block, समायोजित-समानांतर-ब्लॉक-का-साइज
size-of-adjustable-parallel-block


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डायल टेस्ट इन्डिकेटर के सिद्धांत, भागों के नाम, अल्पतमांक, और प्रकार,

दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे डायल टेस्ट इन्डिकेटर के सिद्धांत उसके भागों के नाम, डायल टेस्ट इंडिकेटर का अल्पतमांक, और उसके प्रकारों के बारे में |

डायल टेस्ट इंडिकेटर | dial test indicator

यह एक सूक्ष्म मापी यंत्र होता है|
डायल टेस्ट इंडिकेटर को डायल गेज या इन्डिकेटर गेज भी कहते हैं|
डायल टेस्ट इंडिकेटर का उपयोग किसी कार्य खंड्या जॉब के प्रष्ठ(surface), की समतलता (flatness), समानांतरता(parallelism), टेपरनैस(ढलान) छड़ों की उभारपन(ovelness), सीधापन(straightness) चेक करने में किया जाता है|इसके अलावा लेथ मशीन पर जॉब की सत्यता(trueness) भी चेक कर सकते हैं|

डायल टेस्ट इंडिकेटर का अल्पतमांक | dial test indicator list count

डायल टेस्ट इंडिकेटर का अल्पतमांक मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तथा इससे भी अधिक परिशुद्धता में 0.001 मिली मीटर होता है|
और ब्रिटिश प्रणाली में इसका अल्पतमांक 0.001 इंच तथा इससे भी अधिक परिशुद्धता में 0.0001 इंच होता है|

डायल टेस्ट इंडिकेटर की नीडिल के चक्कर निकालने का सूत्र

मीट्रिक प्रणाली में=ड्राइवर/ड्रिवन

ब्रिटिश प्रणाली में=ड्रिवन/ड्राइवर

डायल टेस्ट इंडिकेटर का सिद्धांत | principle of dial test indicator

डायल टेस्ट इंडिकेटर रैंक और पीनियन के सिद्धांत पर कार्य करता है अथवा डायल टेस्ट इंडिकेटर में रैंक ओर पिनियन के द्वारा साइज के अंतर को यांत्रिक विधि (mechanical process) के द्वारा बड़ा करके डायल पर दिखाया जाता है|


डायल टेस्ट इंडिकेटर के भागों के नाम | dial test indicator parts name

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1. प्वाइंटर(pointer)
2. घूमने वाला बैजल(rotateble bazzel)
3. बैजल क्लेम्प(bazzel clamp)
4. बैक लग(back lug)
5. ट्रांसपेरेंट डायल कवर(transparent dial cover)
6. स्टैम(stam)
7. प्लंजर(plunger)
8. एन्वील(anvil)
9. रिवोलवेशन काउंटर(Revolvation counter)

डायल टेस्ट इंडिकेटर के प्रकार | types of dial test indicator

1. प्लन्जर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर (plunger type dial test indicator)
2. लीवर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर(lever type dial test indicator)

प्लन्जर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर (plunger type dial test indicator)
प्लन्जर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर एक साधारण डायल टेस्ट इंडिकेटर होता है ऊपर दिखाए गए सभी भाग प्लन्जर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर की ही भाग है|

लीवर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर(lever type dial test indicator)

इस प्रकार का डायल टेस्ट इंडिकेटर लीवर और स्क्रोल की चाल पर निर्भर करता है|
इसके अगले सिरे पर एक स्टाइलस लगा होता है तथा स्टाइलस के अगले भाग पर एक गेंद बनी होती है |
लीवर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर का उपयोग ऐसी जगह किया जाता है, जहां पर प्लन्जर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर का प्रयोग नहीं किया जा सकता हो|

लीवर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर के भाग | parts name of lever type dial test indicator

लीवर टाइप डायल टेस्ट इंडिकेटर के मुख्यत: 10 भाग होते हैं| 
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Lever-type-dial-test-indicator-ke-bhag

1. होल्डर(holder)
2. बॉडी(body)
3. स्टाइलस(stylus)
4. डायल(dial)
5. घूमने वाला बैजल(rotateble bazzel)
6. पीवट(pivet)
7. लिवर(lever)
8. नीडिल(needle)
9. स्क्रोल(scroll)
10. रिटर्न स्प्रिंग(return spring)

डायल टेस्ट इंडिकेटर के आधार

कार्य एवं उपयोग के अनुसार डायल टेस्ट इंडिकेटर के साथ विभिन्न प्रकार के आधार प्रयोग किए जाते हैं जो मुख्यतः है|
1. ठोस आधार(solid base)
2. समतल आधार(plane base)
3. वी प्रकार का आधार(v type base)
4. लचीला पोस्ट चुंबक सहित(flexible post with magnetic stand)


डायल टेस्ट इंडिकेटर के साथ अटैचमेंट (attachment)

डायल टेस्ट इंडिकेटर के साथ निम्नलिखित अटैचमेंट प्रयोग किए जाते हैं| 
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1. सी क्लैम्प (c clamp)
2. स्तंभ(piller)
3. इंडिकेटर(indicator)
4. लीवर(lever)
5. कैस या डायल(case or dial)
6. स्नग(snug)

डायल टेस्ट इंडिकेटर के स्टेण्ड के प्रकार | types of dial test indicator stand

डायल टेस्ट इंडिकेटर के साथ तीन प्रकार के स्टैंड प्रयोग किए जाते हैं| 
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Universal-clamp-sahit-chumbakiy-stand


1. यूनिवर्सल क्लेम सहित चुंबकीय स्टैंड(magnetic stand with universal clamp)

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Lachile-post-sahit-chumbakiy-stand


2. लचीले पोस्ट सहित चुंबकीय स्टैंड(magnetic stand with flexible post)

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3. कास्ट आयरन बेस के साथ साधारण होल्डर(general purpose holder with cast iron base)


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साइन बार का परिचय, धातु, साइज, सिद्धांत, तथा माप लेने की विधि

 दोस्तों इस पोस्ट में हम साइन बार का परिचय साइन बार किस धातु के बने होते हैं इनकी परिशुद्धता क्या होती है साइन बार का सिद्धांत तथा माप लेने की विधि  के बारे में विस्तार से जानेंगे|

साइन बार का परिचय |introduction of sine bar

जब किसी कार्यखण्ड या जॉब की वर्नियर बेवल प्रोटेक्टर से भी अधिक परिशुद्धता में यदि किसी कोण को चेक करना हो तो वह साइन बार के द्वारा ही चेक किया जाता है|
तथा साइन बार के द्वारा टेपर भी अधिक परिशुद्धता से चेक की जाती है|

साइन बार कि धातु एवं बनावट

साइन बार को औजार इस्पात(tool Steel) कि आयताकार छड़ से बनाया जाता है|
इसके दोनों सिरों पर स्टेप बने होते हैं | इन स्टेपों मैं दो रोलर  पेचों(screw) की सहायता से फिट कर देते हैं|
इसके साइड में 4, 5, छेद बने होते हैं जिनमें आवश्यकता पड़ने पर कार्य खंड या जॉब को क्लैंप किया जा सकता है|
साइन बार की ऊपरी और निचली सतह एक दूसरे के समान्तर होती है|
इसकी प्रत्येक सतह अच्छी तरह से परिशुद्ध(finish) की हुई होती है|

साइन बार का साइज

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साइन बार का साइज एक रोलर के केंद्र,(centre) से दूसरे रोलर के केंद्र के बीच की दूरी से लिया जाता है|
साइन बार मीट्रिक प्रणाली में 100 मिलीमीटर, 200 मिलीमीटर, तथा 300 मिलीमीटर, साइज में और ब्रिटिश प्रणाली में 5 इंच 10 इंच तथा 20 इंच साइज में मिलते हैं|


साइन बार की परिशुद्धता | accuracy of sine bar

साइन बार की परिशुद्धता अंग्रेजी के अक्षर A तथा B से प्रकट की जाती है|
A साइन बार 0.0001 प्रति इंच तथा B साइन बार 0.0002 प्रति इंच की परिशुद्धता में बने होते हैं |


साइन बार का सिद्धांत | principle of sine bar

साइन बार त्रिकोणमितिय अनुपात (trigonometrical ratio) पर कार्य करता है|
त्रिकोणमिति में समकोण त्रिभुज के किसी कोण का साइन निकालने के लिए उस त्रिभुज के लंब में कर्ण का भाग देना चाहिए|
अतः sin A= लंम्ब / करण = a/b
अर्थात sin A=स्लिप गेज की ऊंचाई/साइन बार की लंबाई

साइन बार से माप लेने की विधि | method of sine bar measurement

साइन बार की सहायता से किसी जॉब के कोण को चेक करने के लिए सर्फेस प्लेट, स्लिप गेज, तथा डायल गेज सेट की आवश्यकता होती है |
इससे चेक करने के लिए सबसे पहले सरफेस प्लेट को साइन बार पर रखकर उस पर उस जॉब को रखा जाता है, जिसका कोण मापना हो |
इसके बाद जॉब के मापे  जाने वाले कोण की तरफ वाले साइन बार के रोलर के नीचे स्लिप गेज लगाते हैं | यह स्लिप गेज जब तक लगाए जाते हैं तब तक जॉब की ऊपरी सतह सरफेस प्लेट की तरह समांतर नहीं हो जाती है |
जॉब की ऊपरी सतह समांतर हुई है अथवा नहीं इसकी जांच डायल गेज से की जाती है |
जब जॉब की ऊपरी सतह समांतर हो जाती है तो उसमें लगे स्लिप गेज की साइज को जोड़ लिया जाता है |
स्लिप गेजो के योग (लम्ब) में साइन बार की साइज (कर्ण) कहां भाग देने पर कोण का ज्या निकल आता है |
फिर इस मान को डिग्री और मिनट में साइन की तालिका(table) से ज्ञात कर लेते हैं |


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स्लिप गेज का उपयोग, प्रकार, ग्रेड और स्लिप गेज चयन करने की विधियां

 दोस्तों आज हम जानेंगे स्लिप गेज के बारे में| स्लिप गेज का उपयोग स्लिप गेज की ग्रेड, स्लिप गेज के प्रकार, तथा स्लिप गेज चयन करने की विधियां|

स्लिप गेज|slip gauge

स्लिप गेज को जॉनसन स्लिप गेज या गेज ब्लॉक भी कहा जाता है|
slip-gauge
slip-gauge


इनकी बनावट आयताकार पीस के रूप में होती है|
भारतीय मानक(I.S.I.) के अनुसार 10 मिलीमीटर तक साइज की ब्लॉक का अनुप्रस्थ परिच्छेद(cross section) 30×9 मिलीमीटर और 10 मिलीमीटर से बड़े साइज का अनुप्रस्थ परिच्छेद (cross section) 35×9 मिलीमीटर होता है|
यह सेट के रूप में पाए जाते हैं|


स्लिप गेज का उपयोग|use of slip gauge

स्लिप गेज का उपयोग वर्कशॉप और समरूप गेजो कि सूक्ष्मता चेक करने के लिए तथा साइन बार को किसी भी कोण में सेट करने के लिए किया जाता है|

स्लिप गेज किसका बना होता है

स्लिप गेज को उच्च क्वालिटी की टूल स्टील से बना कर कठोर कर दिया जाता है| और इनको 0.001(1 माइक्रोन) की सूक्ष्मता (accuracy) मैं फिनिश किया जाता है|
तथा इनके किनारों को चैंफर कर दिया जाता है|

आई. एस. आई. के अनुसार स्लिप गेज की ग्रेड|slip gauge grade according to ISI

भारतीय मानक के अनुसार स्लिप गेज की सूक्ष्मता को तीन ग्रेडों में बांटा गया है|
1. ग्रेड -0(great - 0)
2. ग्रेड-1(grade - I)
3. ग्रेड -2 (Grade - II)

ग्रेड -0(great - 0)

इस ग्रेड की स्लिप गेजों को बहुत ही सूक्ष्मता में बनाया जाता है| इनका उपयोग प्रयोगशाला और मानक कार्यो(standard works) के लिए किया जाता है|

ग्रेड-1(grade - I)

इस ग्रेड वाली स्लिप गेज की सूक्ष्मता(accuracy) 0 ग्रेड वाली स्लिप गेज से कुछ कम होती है|

ग्रेड -2 (Grade - II)

इस प्रकार की स्लिप गेजों का उपयोग वर्कशॉप में उत्पादन करते समय जॉब बनाते समय, जॉब बनाते समय, और उपकरणों की सूक्ष्मता चेक करने के लिए किया जाता है|

स्लिप गेज के प्रकार | types of slip gauge

स्लिप गेज के सेट मुख्यत: दो प्रकार की होती है|
1. मीट्रिक स्लिप गेज सेट | metric slip gauge set
2. ब्रिटिश स्लिप गेज सेट | British slip gauge set

मीट्रिक स्लिप गेज सेट | metric slip gauge set

अगर विश्लेषण किया जाए तो मीट्रिक स्लिप गेज के कई सेट पाए जाते हैं | परंतु M-12 वाला सेट अधिकतर प्रयोग में लाया जाता है जो निम्नलिखित है|
01-  1.001से 1.009 मिली मीटर तक 0.001 मिली मीटर के स्टेप में 9 पीस
02- 1.01से1.49 मिली मीटर तक 0.01 मिली मीटर के स्टेप में 49 पीस
03- 0.5से24.5 मिली मीटर तक 0.5 मिली मीटर के स्टेप में 49 पीस
04- 25 से 100 मिली मीटर तक 25 मिली मीटर की स्टेप में अतिरिक्त पीस 1.0005 मिली मीटर


ब्रिटिश स्लिप गेज सेट | British slip gauge set


01- 1.001 इंच से 1.009 आज तक 0.001 के स्टेप में 9 पीस इंच के स्टेप में
02- 0.101 इंच से 0.149 इंच तक 0.001 इंच 49 पीस स्टेप में
03- 0.05 इंच से 0.95 इंच तक 0.05 इंच 19 पीस के स्टेप में
04- 1 इंच से 4 इंच तक 1 इंच के स्टेप में चार पीस व एक अतिरिक्त पीस 1.005 इंच का 1 पीस
कुल योग=82 पीस

स्लिप गेजों की रिंगिंग विधि | wringing process of slip gauge

स्लीप गेजो को आपस में जोड़ने की विधि को रिंगिंग कहते हैं, जिसे निम्नलिखित पदों द्वारा समझा जा सकता है-
1. सबसे पहले दो स्लिप गेजो (गेज ब्लॉक)  को लेकर उनकी मापन सतहों को टिशू पेपर या चमोइस चमड़ा(chamois leather) अथवा कार्बन टेट्राक्लोराइड से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए|
2. साफ करने के बाद एक स्लिप गेज को दूसरी स्लिप गेज की मापन सतह पर क्रॉस में रखना चाहिए|
3. इसके बाद ऊपर वाली स्लिप गेज को हल्के दबाव से निचा करके दोनों स्लिप भेजो कि मापन सतह को एक सिध में कर लेना चाहिए|
4. इसके बाद ऊपर वाली स्लिप गेज को हल्के दबाव के साथ आगे खिसका कर उसके आधे भाग को एक दूसरी स्लिप गेज के संपर्क से बाहर कर लेना चाहिए|
5. अंत में ऊपर वाली स्लिप गेज को हल्के दबाव के साथ ही पीछे खिसकाना चाहिए और दोनों स्लिप गेजो को सामान करके छोड़ देना चाहिए| आब दोनों स्लिप गेज चुंबक के समान एक दूसरे के साथ सट जाती है | इसी को रिंगिंग क्रिया कहते हैं|

टेलिस्कोपिक गेज के भाग, प्रयोग विधि और स्मॉल होल गेज

 दोस्तों मेरा नाम है सुनिल कुमार और आज हम चर्चा करेंगे| टेलिस्कोपिक गेज के भाग, प्रयोग विधि और स्मॉल होल गेज के बारे में|

टेलिस्कोपिक गेज|telescopic gauge

टेलिस्कोपिक गेज एक अप्रत्यक्ष मापी गेज होता है|
इस गेज का प्रयोग किसी छेद स्लांट या बोर के आंतरिक माप लेने के लिए किया जाता है|
इस गेज से पाठ्यांक(reading) लेने के पश्चात उस माप को आउटसाइड माइक्रोमीटर के द्वारा ज्ञात किया जाता है|

टेलिस्कोपिक गेज से कितनी माप ले सकते है

टेलिस्कोपिक गेज 5 नंबर के सेट में मिलता है तथा इसके द्वारा 12.7 मिली मीटर से 152.7 मिलीमीटर तक माप ले सकते हैं|

टेलिस्कोपिक गेज के भाग|parts of telescopic gauge

टेलिस्कोपिक गेज के मुख्य रूप से चार भाग होते है|

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telescopic-gauge


1. दो कॉन्टैक्ट प्लन्जर(to contact plunger)
2. हत्था(handle)
3. स्प्रिंग(spring)
4. लॉकिंग स्क्रु(locking screw)

टेलिस्कोपिक गेज की प्रयोग विधि|use method of telescopic gauge

टेलिस्कोपिक गेज निम्नलिखित प्रकार से उपयोग में लाना चाहिए|
गेज के मापने वाले सिरे को माप लेने वाले छेद में डाल देना चाहिए|
प्लन्जर को हाथ से दबा कर लॉकिंग स्क्रू से लॉक कर देना चाहिए|
लॉकिंग स्क्रु को ढीला करके पाठ्याकं(reading) की सही फीलिंग(feeling) कर लेनी चाहिए|
लॉकिंग स्क्रु की सहायता से प्लन्जर को लॉक कर देना चाहिए|
गेज को बाहर निकालकर पाठ्यांक को आउटसाइड माइक्रोमीटर पर स्थानांतरण(transfer) करके पढ़ना चाहिए|

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स्मॉल होल गेज|small hole gauge

स्मॉल होल गेज का उपयोग छोटे साइज के छेदो के भीतरी व्यास(internal diameter) को चेक करने के लिए किया जाता है|
स्मॉल होल गेज की बनावट मे स्प्रिंग स्टील की दो भुजाएं(arms) होती हैं, जिनके सिरे अर्ध गोलाई(half round) में बने होते हैं|
इसके बीच में वेज(wedge) के आकार का एक पीस लगा होता है जिसको एक नर्लिंग हैड से समायोजित(adjust) किया जाता है|
जब हेड को घुमाया जाता है तो वेज आर्मस के सिरों को फैलाता है, जिससे आंतरिक माप ली जाती है|

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स्मॉल हॉल गेज से कितना माप चेक किया जा सकता है

इस गेज से 3 मिलीमीटर से 12.7 मिलीमीटर तक के माप को चेक किया जा सकता है|

स्मॉल होल गेज 7 नम्बर के सेट के रूप में पाए जाते हैं|

स्मॉल होल गेज से माप लेने की विधि

इस गेज से माप लेने के लिए गेज के सिरे को फैलाकर दीवारों के साथ स्पर्श करते हैं फिर फीलिंग करके हैंड को कसकर गेज को बाहर निकाल लेते हैं तथा पाठ्यांक को आउटसाइड माइक्रोमीटर पर स्थानांतरण करके पढ़ लेते है|

दोस्तों हमारे आज के इस पोस्ट में हमने टेलीस्कोपिक गेज तथा स्माल होल गेज के बारे में बताया है आप इस पोस्ट से जुड़े किसी सुझाव या शिकायत के लिए हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं|
धन्यवाद

General knowledge online test|सामान्य ज्ञान ऑनलाइन परीक्षा

 यह टेस्ट सामान्य ज्ञान के प्रश्नों से संबंधित है |

इस पत्र श्रंखला में वह प्रश्नन शामिल किए गए हैं जो पिछली अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए हैं|


आप एक टेस्ट प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी तैयारी को परख सकते हैं|

इस प्रश्न श्रंखला में 30 क्वेश्चन पूछे गए हैं जो कि आने वाले सभी कॉन्पिटिशन एग्जाम के लिए महत्वपूर्ण है|

प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है|

गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंकन नहीं है|

टेस्ट स्टार्ट करने के लिए आपको अपना ईमेल एड्रेस डालना अनिवार्य है |

टेस्ट सबमिट करने के पश्चात आप अपना स्कोर एवं सही आंसर देख सकते हैं|

अगर आप टेस्ट के लिए तैयार हूं तो start here पर क्लिक करें 

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स्नैप गेज का उपयोग और उसके प्रकार

दोस्तों मेरा नाम है सुनिल कुमार और मैं आज आपको बताऊंगा|स्नैप गेज|snap gauge के उपयोग, स्नैप गेज के प्रकार, तथा स्नैप गेज को यूज करने के तरीके के बारे में|

 स्नैप गेज|snap gauge

स्नैप गेज का प्रयोग बेलनाकार (cylindrical) जॉब के बाहरी व्यास, चौड़े जोब की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई चेक करने के लिए किया जाता है|
स्नैप गेज को कैलीपर गेज भी कहा जाता है|

snap-gauge,स्नेप-गेज
snap-gauge


स्नैप गेज के प्रकार|types of snap gauge

स्नैप गेज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है|
1 ठोस स्नैप गेज|solid snap gauge
2. समायोज्य(एडजेस्टेबल) स्नैप गेज|adjustable snap gauge


ठोस स्नैप गेज|solid snap gauge

यह गेज अंग्रेजी के C अक्षर के आकार में बनी होती है|
इसके सिरे सपाट(flat) होते हैं| जो ग्राइंडिंग तथा लैपिंग से परिशुद्ध(accurate) किए हुए होते हैं|

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स्नैप गेज एक दो मुंह (सिरो) वाली गेज है, जिसमें एक सिरा Go और दूसरा सिरा Not Go होता है|
इसका Go सिरा व्यास की उच्च सीमा(High Limit) के अनुसार तथा Not Go सिरा निम्न सीमा(low limit) साइज से थोड़ी कम साइज का बना होता है|
अनेक ठोस स्नेप गेजौं(solid snap gauges) में एक ही तरफ  Go तथा Not Go सिरे बने होते हैं|
इसके अगले भाग पर जॉब की उच्च सीमा(High Limit) तथा पीछे वाले भाग में निम्न सीमा(low limit) की माप होती है|
किसी जॉब को चेक करते समय  Go वाले सीरे में जॉब जाना चाहिए तथा Not Go वाले सिरे में जॉब नहीं जाना चाहिए|

solid-snap-gauge
solid-snap-gauge


ठोस स्नैप गेज का उपयोग|use of solid snap gauge

ठोस स्नैप गेज का उपयोग किसी बेलनाकार जॉब की बाहरी व्यास तथा आयताकार जॉब की लंबाई, चौड़ाई, और मोटाई, चेक करने के लिए किया जाता है|

समायोज्य(एडजेस्टेबल) स्नैप गेज|adjustable snap gauge

समायोज्य स्नैप गेज भी ठोस स्नैप गेज(solid snap gauge) के समान ही अंग्रेजी के C अक्षर के आकार की बनी होती है|
समायोजन स्नैप गेज के स्नैप गेज की मापन स्थान पर चार गोलाकार निहाई(anvil) फ्रेम के छिद्र में फिट रहते हैं|
इसमें एंनविल का चोड़ा सिरा ही इसकी मापक सतह होती है|
इसके एंन्विल का पेचौं(screw) के द्वारा निहाई का समायोजन करके आवश्यकतानुसार दोनों एन्विलो में बीच के गैप को सेट किया जाता है|
समायोजन स्नैप गेज का फ्रेम ढलाई (casting) द्वारा ड्राप फोर्जिग करके बनाया जाता है|

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समायोज्य स्नैप गेज का उपयोग|use of adjustable snap gauge

एडजेस्टेबल स्नैप गेज का उपयोग अलग-अलग साइज के जॉबों की बाहरी माप को चेक करने के लिए किया जाता है|

दोस्तों आपको हमारा आज का पोस्ट कैसा लगा अपने सभी शिकायत और सुझाव के लिए कृपया हमें कमेंट करें
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Fitter theory online exam|फिटर थ्योरी ऑनलाइन एग्जाम

  इस एग्जाम में फिटर थ्योरी के 50 क्वेश्चन पूछे गए यह प्रश्न कटिंग ओजारो से संबंधित है|जोकी अनेक बार आईटीआई एग्जाम और विभिन्न कंपटीशन एग्जाम में पूछे गए हैं

आप यह एग्जाम देकर अपनी तैयारी को परख सकते है|

प्रत्येक प्रश्न एक नंबर का है|

किसी प्रकार का कोई नकारात्मक अंकन नहीं है|

सभी 50 प्रश्नों के लिए 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है इसके बाद एग्जाम अपने आप सबमिट हो जाएगा

एग्जाम शुरू करने के लिए आपको अपना नाम डालना जरूरी है|

एग्जाम सबमिट करने से पहले अगर आपसे रिक्वायर्ड फॉर्म पूरी करने के लिए कहा जाए तो अपना नाम फिर से डाल दें और सबमिट बटन पर क्लिक करें

नाम डालने के बाद नेक्स्ट के बटन पर क्लिक करते ही एग्जाम स्टार्ट हो जाएगा|

अगर आपके टेस्ट देने के लिए तैयार है तो यहां क्लिक करें  start now


रिंग गेज और उसके प्रकार

 दोस्तों मेरा नाम है सुनिल कुमार और आज मैं आपको बताऊंगा रिंग गेज के बारे में |रिंग गेज किस प्रकार के गेज होते हैं|रिंग गेज कार्य के अनुसार कितने प्रकार के होते हैं उनकी बनावट कैसी होती है और रिंग गेज को कैसे काम में लिया जाता है|

रिंग गेज|ring gauge

इस प्रकार की गेज से गोलाकार(cylindrical) जॉब बाहरी व्यास मापा जाता है|

रिंग गेज गोलाकार(cylindrical) आकृति की बनी होती है|

जिसमें जांचे जाने वाले जॉब के अनुसार नॉमिनल साइज का एक छेद बनाता है|

रिंग गेज के बाहरी व्यास की सतह नर्ल की हुई होती है|

रिंग गेज के प्रकार|types of ring gauge

तीन प्रकार की रिंग गेज प्रयोग में लाई जाती है|

1. प्लेन रिंग गेज|plain ring gauge

2. टेपर रिंग गेज|taper ring gauge

3. थ्रेड रिंग गेज|thread ring gauge


प्लेन रिंग गेज|plain ring gauge

प्लेन रिंग गेज को सिलैन्डिरिकल रिंग गेज भी कहते हैं|

प्लेन रिंग गेज की रिंग गेज में 2 गेज होती है| जिसमें एक Go तथा दूसरी Not Go होती है|

Go रिंग गेज किसी सिलैंडरिकल जॉब के बाहरी व्यास पर जानी चाहिए तथा Not Go रिंग गेज नहीं जानी चाहिए|

इस प्रकार की रिंग गेजो में Go और Not Go की पहचान के लिए Not Go गेज के ऊपरी व्यास एक झिरी (groove) बना होता है|

तथा Not Go  रिंग गेज की लंबाई Go रिंग गेज से कम होती है|

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प्लेन रिंग गेज का उपयोग

प्लेन रिंग गेज का उपयोग इंडिकेट गेज के साथ किया जाता है|

इस प्रकार की गैरों का उपयोग बेलनाकार जॉब के बाहरी व्यास को चेक करने के लिए किया जाता है|

टेपर रिंग गेज|taper ring gauge

इस प्रकार की रिंग गेज एक निश्चित लंबाई तथा साइज के टेपर छिद्र युक्त बनी होती हैं|

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उपयोग

इस प्रकार की गेज के द्वारा बेलनाकार (cylindrical) जॉब के बाहरी व्यास पर बनी टेपर को चेक करने के लिए किया जाता है

थ्रेड रिंग गेज|thread ring gauge

इस प्रकार की गेज से किसी बेलनाकार जॉब के बाहरी व्यास पर बनी चूड़ियों को शुद्धता से चेक किया जाता है|

इसमें दो प्रकार की Go रिंग गेज तथा Not Go रिंग गेज होती है|

thread-ring-gauge,थ्रेड-रिंग-गेज
thread-ring-gauge


 Go छेद जॉब के हाई लिमिट तथा Not Go छेद जॉब के लो लिमिट साइज में बना होता है|

 Go रिंग गेज बेलनाकार जॉब की बाहरी व्यास पर बनी चूड़ियों पर जानी चाहिए तथा Not Go रिंग गेज नहीं जानी चाहिए|

इस प्रकार की गेजो में Go तथा Not Go थ्रेड रिंग गेजो की पहचान के लिए Not Go रिंग गेज की बाहरी व्यास की परिधि पर एक झिरी(groove) कटी होती है तथा लंबाई में यह  Go गेज से छोटी होती है|

इस गेज को प्रयोग में लाते समय इसकी चूड़ियों को अच्छी तरह साफ करके हल्के दबाव से प्रयोग करना चाहिए|

प्लग गेज के बारे में जाने


दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी के बारे में कोई शिकायत या संदेह हो तो आप हमें कमेंट करें

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प्लग गेज और कार्य के अनुसार प्लग गेज के प्रकार

 दोस्तों मेरा नाम है सुनिल कुमार और आज मैं आपको बताऊंगा प्लग गेज के बारे में तथा कार्य के अनुसार प्लग गेज के कितने प्रकार होते हैं  तथा प्लग गेज के उपयोग किसलिए किया जाता है|

प्लग गेज|plug gauge

प्लग गेज का इस्तेमाल किसी कार्य खंड या जॉब मैं बनी आंतरिक माप को चेक करने के लिए किया जाता है|
प्लग गेजो का इस्तेमाल गोलाकार, टेपर, चूड़ीदार, वर्गाकार, आयताकार टेपर, पंचभुज और षट्भुज आकार आदि छेदो को भी शुद्धता में चेक करने के लिए किया जाता है|
किसी आंतरिक व्यास को चेक करने के लिए एक प्लग गेज जिसके सिरे बेलनाकार(cylindrical) आकार मेंGo औरNot Go के रूप में बने होते हैं|
इस गेज के Go सिरे का व्यास छेद की निम्नलिखित सीमा(Lower Limit) की साइज के बराबर और Not Go सिरे का व्यास छेद की उच्च सीमा(Upper Limit) के साइज से थोड़ा अधिक रखा जाता है|
इसके Go सिरे को छेद में प्रवेश कर आते समय यह आसानी से साधारण घर्षण या हल्के दबाव से प्रवेश कर जाता है तो छेद का व्यास ठीक होगा| इसके पश्चात Not Go सिरा डालते हैं वह इस छेद के अंदर नहीं जाना चाहिए|
इसलिए जॉब के छेद का व्यास मैं Go सिरा आसानी से जाना चाहिए और Not Go सिरा छेद में नहीं जाना चाहिए|

plug-gauge,प्लग-गेज
plug-gauge


Go और Not Go सिरे की पहचान कैसे करें

इसकी पहचान के लिए Go सिरा लंम्बा होता है तथा Not Go सिरा लंबाई में छोटा होता है|
कई लिमिट प्लग गेजो में Go और Not Go सिरे एक ही सिरे पर बने होते हैं इस प्रकार की गेजो से चेक करने में समय की बचत होती है इस प्रकार के गेजो से बंद छेद चेक नहीं किए जा सकते हैं इन गेजो का प्रयोग और आर पार(throughout)छेदो को चेक करने में होता है|

कार्य के अनुसार प्लग गेजो के प्रकार|types of plug gauge according to works)

1. बेलनाकार प्लग गेज|cylindrical plug gauge
2. थ्रेड प्लग गेज|thread plug gauge
3. टेपर प्लंग गेज|taper plug gauge
4 फार्म प्लग गेज|form plug gauge

बेलनाकार प्लग गेज|cylindrical plug gauge
cylindrical-plug-gauge,बेलनाकार-प्लग-गेज
cylindrical-plug-gauge

इस प्रकार की गैज सिंगल एंडेड(single ended) तथा डबल एंडेड(double ended) मिलती हैं|
इस प्रकार की डबल एंडेड गेज के दोनों सिरों पर Go और Not Go  गेज लगे होते हैं|
इनका Not Go वाला सिरा लंबाई मेंGo सिरे से छोटा होता है|


इस प्रकार की गेजो में प्रोग्रेसिव प्लग गेज (progressive plug gauge) भी आती है जिसके Go और Not Go सिरे एक ही तरफ बने होते हैं| Go सिरा पहले और Not Go सिरा उसके बाद बना होता है|
बेलनाकर प्लग गेज का उपयोग गोलाकार छिद्र को चेक करने में किया जाता है|

थ्रेड प्लग गेज|thread plug gauge

थ्रेड प्लग गेज मैं भी Go और Not Go बने होते हैं|
इसका भी Not Go वाला सिरा लंबाई में Go सिरे से छोटा होता है|
इसका Go सिरा किसी छेद में बनी चूड़ियों के अंदर प्रवेश करना चाहिए तथा Not Go वाला सिरा प्रवेश नहीं करना चाहिए|

thread-plug-gauge,थ्रेड-प्लग-गेज
thread-plug-gauge


इस प्रकार की गेज का उपयोग किसी चूड़ीदार छिद्र जैसे नट आदि को चेक करने के लिए किया जाता है|

टेपर प्लंग गेज|taper plug gauge

इस प्रकार की गेज में एक ही सिरे पर गेज निश्चित लंबाई में टेपर में बनी होती है|
इस प्रकार की गेज निश्चित साइज के टेपर छिद्र के लिए बनाई जाती है|

taper-plug-gauge,टेपर-प्लग-गेज
taper-plug-gauge


इस प्रकार की गेजो का उपयोग टेपर छिद्रों को चेक करने के लिए किया जाता है|

फार्म प्लग गेज|form plug gauge

इस प्रकार की प्लग गेज विशेष कार्य के लिए विशेष प्रकार की बनाई जाती है
इस प्रकार की प्लग गेज जैसे वर्गाकार षट्भुज आकार अष्टभुजाकार आकृति में बनी होती है
इस प्रकार की गेजो का उपयोग अलग-अलग आकृति में बने छिद्रों को चेक करने के लिए किया जाता है|

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Fitter theory, cutting tools online test|कटिंग टूल ऑनलाइन टेस्ट

 फिटर थ्योरी का यह सामान्य online test है

इस टेस्ट में कृतन औजारों(cutting tools) से संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं अभी इसमें कोई टाइम लिमिट निर्धारित नहीं है

आप अपना टाइम ले सकते हैं|टेस्ट को सबमिट करने के बाद आप अपने दिए गए आंसर अपना स्कोर तथा सही आंसर देख पाएंगे|

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गेज का आकार, धातु, और शुद्धता एवं प्रयोग के आधार पर गेज के प्रकार

 हेलो दोस्तों मेरा नाम है सुनिल कुमार और मैं आज आपको बताऊंगा| गेज के इस्तेमाल के लाभ के बारे में साथ ही गेज के आकार और उसकी धातु कौन सी होती है तथा शुद्धता एवं प्रयोग के आधार पर यह कितने प्रकार के होते हैं|

गेज का परिचय|introduction of gauge

अधिकतर कारखानों में एक ही साइज और आकृति के पार्ट्स का उत्पादन अधिक संख्या में होता है|उन्हें चेक करने के लिए गेजों का इस्तेमाल किया जाता है|
इन सभी पार्ट्स को चेक करने के लिए स्टील रूल वर्नियर कैलीपर वर्नियर माइक्रोमीटर आदि का इस्तेमाल किया जा सकता ह परंतु इनसे समय अधिक लगता है और बार-बार चेक करने से समय नष्ट होने के कारण उनकी कीमत बढ़ जाती है अधिक (सैकड़ों) पुर्जों को चेक करने में गलती होने की संभावना भी रहती है| इसलिए एक ही साइज के बहुत सारे पार्ट्स को चेक करने के लिए हम गेज का उपयोग करते हैं|

गेज का आकार एवं धातु|shape and material of gauge

अलग-अलग कार्य के अनुसार गेज इस प्रकार से बनाई जाते हैं| कि उनसे किसी कार्य खंड या जॉब की लंबाई, मोटाई, कौणीय सतह, छेद तथा आंतरिक एवं बाहरी चूड़ियां चेक करने के लिए किया जा सके|
कम उपयोग में आने वाली गेज हाई कार्बन स्टील (high Carbon Steel) की बनी होती है और इनको कठोर करके ग्राइंड (grind) कर लिया जाता है|
जिन गेजों का इस्तेमाल अधिक होता है और जिनके घिसने का डर रहता है, उन्हें क्रोमियम स्टील या वैनेडियम स्टील से बनाया जाता है| और उनकी इलेक्ट्रोप्लेटिंग की जाती है|

इलेक्ट्रोप्लेटिंग क्या है?

गेजो को जल्दी-जल्दी किसने से बचाने के लिए उनकी चेकिंग सतह (गेजिंग सतह) पर क्रोमियम की एक परत चढ़ा देते हैं, जिसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग कहते हैं|इसके बाद गेज की ग्राइंडिंग तथा लैपिंग करके उसे परिशुद्ध बना लिया जाता है|


शुद्धता एवं प्रयोग के आधार पर गेज के प्रकार|types of gauge according to accuracy and use


शुद्धता एवं प्रयोग के आधार पर गेंजों को चार प्रकार से विभाजित किया जा सकता है|
1. वर्कशॉप गेज|workshop gauge
2. इंस्पेक्शन गेज|inspection gauge
3. रेफरेंस गेज|reference gauge
4. रेडियस गेज|radius gauge

वर्कशॉप गेज|workshop gauge

इस प्रकार के गैजों का इस्तेमाल कार्यशाला (workshop) में कारीगर द्वारा कार्य करते समय किया जाता है|
इस प्रकार के गेजों की टोलरेंस अपेक्षाकृत  इंफेक्शन गेजों तथा रिफरेंस गेजो से कम रखी जाती है|

इंस्पेक्शन गेज|inspection gauge

इंस्पेक्शन गेजों का इस्तेमाल वर्कशॉप गेजो की सूक्ष्मता(accuracy) को चेक करने के लिए प्रोडक्शन इंस्पेक्टर के द्वारा किया जाता है|

रिफरेंस गेज|reference gauge

रिफरेंस गैजों का इस्तेमाल इंस्पेक्शन गेजों तथा वर्कशॉप गेजो की क्षमता को चेक करने के लिए किया जाता है|
इनको मास्टर गेज या कंट्रोल गेज भी कहते हैं|

रेडियस गेज|radius gauge

रेडियस गेज को फिलेट  गेज भी कहते है|
इस गेज के द्वारा किसी कार्य खंड या जॉब भीतरी या बाहरी रेडियस चेक की जाती है
यह सेट के रूप में पाई जाती है, जिसमें रेडियस के अनुसार कई ब्लेड होती है| इन ब्लेडों को एक नट और एक पेच की सहायता से एक होल्डर में फिट कर दिया जाता है|
radius-gauge,fillet-gauge


रेडियस गेज का साइज

भारतीय स्टैंडर्ड के अनुसार 0.6 मिलीमीटर से 25 मिलीमीटर तक साइज में पाई जाती है|
यह तीन सेटों के रूप में मिलती है
1. 0.6से0.8 मिलीमीटर
2. 1 से 6 मिलीमीटर 1,1.2,1.6,2.5,3,4,5,6 मिलीमीटर
3. 8 से 25 मिलीमीटर 8,10,12,14,16,18,20,22,25 मिलीमीटर

गेजों के इस्तेमाल के लाभ|advantage of gauge use

1. समय की बचत|time saving
2. बर्बादी से बचत|wastage saving
3. इंटरचेन्जेबिलिटी|interchangeability
4. वर्गीकरण करना|classification

समय की बचत|time saving

गेजों की सहायता से कम समय में अधिक संख्या में कार्यखण्ड या जॉब को चेक किया जा सकता है|

बर्बादी से बचत|wastage saving

कारीगर के द्वारा जॉब या कार्यखण्ड को चेक करने से गलत जॉब नहीं बन सकता जिससे धातु बर्बाद होने से बच जाती है|

इंटरचेन्जेबिलिटी|interchangeability

इंटरचेन्जेबिलिटी से पार्ट्स को अदला-बदली करने लायक बनाने में आसानी होती है|
तथा इंटरचेन्जेबिलिटी से शुद्धता आती है जिसके कारण पार्ट्स को जोड़ते समय सही-सही जुड़ते हैं|

वर्गीकरण करना|classification

गेज का इस्तेमाल करने से असेंबलिंग करते समय पार्ट्स का वर्गीकरण आसानी से किया जा सकता है|

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भीतरी(इनसाइड) माइक्रोमीटर का संपूर्ण अध्ययन|inside micrometer

 भीतरी माइक्रोमीटर|inside micrometer

इस माइक्रोमीटर का प्रयोग किसी स्लोट, ग्रुव(groove) छेद या बोर के आंतरिक व्यास या आंतरिक माप को सूक्ष्मता से जांच करने के लिए किया जाता है|

भीतरी माइक्रोमीटर का सिद्धांत|principle of inside Micrometer

यह माइक्रोमीटर लीड तथा पिच अथवा नट और बोल्ट किस सिद्धांत पर कार्य करता है|

भीतरी माइक्रोमीटर का अल्पतमांक|inside Micrometer least count

इस माइक्रोमीटर का अल्पतमांक मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तथा ब्रिटिश प्रणाली में 0.001 इंच होता है इस प्रकार के माइक्रोमीटर के द्वारा कम से कम 2 इंच तथा मीट्रिक प्रणाली में कम से कम 50 मिलीमीटर दूरी की मांप को चेक किया जा सकता है|

भीतरी माइक्रोमीटर के भागों के नाम|inside Micrometer parts name

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Inside-micrometer-parts-name


1. स्लीव या बैरल|sleeve or barel
2. थिंबल| thimble
3. एंन्विल|anvil
4. स्पेसिंग कॉलर|spacing collar
5. लोकिंग स्क्रू|locking screw
6. विस्तार छड़|extension road
7. हत्था|Handile

भीतरी माइक्रोमीटर के प्रकार|types of inside Micrometer

इंसाइड माइक्रोमीटर दो प्रकार के होते हैं
1. मीट्रिक भीतरी माइक्रोमीटर
2 ब्रिटिश भीतरी माइक्रोमीटर

मीट्रिक भीतरी माइक्रोमीटर

इसके A सेट में 6 विस्तार छड़ तथा एक 12 मिलीमीटर स्पेसिंग कॉलर होता है इससे 50 मिलीमीटर से 200 मिली मीटर तक की मांप ले सकते हैं|
इसके B सेट में 10 विस्तार छड़ तथा 12 मिली मीटर का एक स्पेसिंग कोलर होता है इससे 50 मिलीमीटर से 300 मिली मीटर तक की माप ले सकते हैं|
इसके C सेट में 4 विस्तार छड़ तथा दो 25 मिली मीटर 25 मिली मीटर लंबाई की स्पेसिंग कोलर होते हैं इसके द्वारा  200 मिली मीटर से 800 मिली मीटर तक की माप ली जा सकती है|

ब्रिटिश भीतरी माइक्रोमीटर

इस माइक्रोमीटर के पहले 2 इंच से 2 सही 1 बटा 2 इंच तक मापा जा सकता है यदि 2 सही 1 बटा 2 इंच से 3 इंच तक मामले ना हो तो 1 बटा 2 इंच का स्पेसिंग कोलर लगा दिया जाता है|
इससे भी बड़ी साइज की माप लेनी हो तो दूसरी विस्तार छड़ लगाई जाती है|
विस्तार छड़ की संख्या तथा माइक्रोमीटर की परास(Range) का दायरा अलग अलग होता है|
इसके A सेट में 6 विस्तार छड़ तथा 1 बटा 2 इंच का स्पेसिंग कोलर होता है|इसके द्वारा 2 इंच से 8 इंच तक की माप ले सकते हैं|
इसके B सैट में 10 विस्तार छड़ तथा 1 बटा 2 इंच का एक स्पेसिंग कोलर होता है इसके द्वारा 2 इंच से 12 इंच तक की माप ले सकते हैं|
इसके C सैट में 4 विस्तार छड़ तथा 1 इंच और 2 इंच की दो स्पेशल कोलर होती हैं इसके द्वारा 8 इंच से 32 इंच तक की माप की ले सकते हैं|

भीतरी माइक्रोमीटर की परिशुद्धता चेक करना

भीतरी माइक्रोमीटर की परिशुद्धता चेक करने के लिए उसे एक निश्चित पाठयांक तक खोलकर आउटसाइड माइक्रोमीटर की सहायता से चेक कर लेना चाहिए|
यदि दोनों माइक्रोमीटर का पाठयांक एक समान हो तो भीतरी माइक्रोमीटर परिशुद्ध तथा ठीक होता है|

छोटा भीतरी माइक्रोमीटर|small inside Micrometer

इस प्रकार के माइक्रोमीटर के स्लीव या बैरल और थिंबल आउटसाइड माइक्रोमीटर की तरह ही होते हैं|
लेकिन एंन्विल और स्पिंडल के स्थान पर वर्नियर कैलीपर की तरह तो जबड़े होते हैं|
इनकी जबड़ों के सिरे बहुत पतले होते हैं, इसलिए इन्हें निब कहते हैं|
इसकी स्लीव या बैरल पर विपरीत दिशा में अंशांकन किया जाता है|
छोटा भीतरी माइक्रोमीटर का उपयोग छोटे-छोटे छेदो एवं सलाटो की माप लेने के लिए किया जाता है|
मीट्रिक प्रणाली के इस प्रकार के माइक्रोमीटर से कम से कम 5 मिलीमीटर व्यास के तथा अधिक से अधिक 25 मिलीमीटर व्यास के छेद को चेक किया जा सकता है|
इस प्रकार के माइक्रोमीटर 5 से 25 मिलीमीटर तथा 25 से 50 मिलीमीटर तथा 50 से 75 मिलीमीटर तथा 75 से 100 मिलीमीटर मांप की सीमा में मिलते है|


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आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड Document upload in Aadhar Card

 इस पोस्ट में हम जानेगे आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करना क्यों जरुरी है और आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करने की प्रक्रिया क्या है | आधा...