माइक्रोमीटर की शुन्य त्रुटि और ठीक करने की विधियां|micrometer zero error

शुन्यांक त्रुटि|zero error

माइक्रोमीटर की शुन्यांक त्रुटि चेक करने के लिए माइक्रोमीटर के स्पिंडल को रैचेट की सहायता से एन्विल के संपर्क में लाकर यह देखा जाता है कि थिंबल की शुन्य स्लीव या बैरल कि डेटम लाइन के साथ मिल रही है अथवा नहीं|
यदि थिंबल की शुन्य डेटम लाइन के एकदम सामने मिल रही है तो माइक्रोमीटर में कोई भी शुन्यांक त्रुटि नहीं है|
यदि थिंबल की शुन्य डेटम लाइन के एकदम सामने नहीं मिल रही है तो माइक्रोमीटर में  शुन्यांक त्रुटि अवश्य है|

शुन्यांक त्रुटि के प्रकार|types of zero error

शुन्यांक त्रुटि दो प्रकार की होती है
1. धनात्मक त्रुटि|positive error
2. ऋणात्मक त्रुटि|negative error

धनात्मक त्रुटि|positive error

यदि थिंबल की शुन्य स्लीव की डेटम लाइन से पीछे रह जाती है तो इसे धनात्मक त्रुटि कहते हैं|
इसे पाठ्यांक लेने के पश्चात कुल पाठ्यांक मैं से घटाकर सही रीडिंग ज्ञात कर लेते हैं|

ऋणात्मक त्रुटि|negative error

यदि थिंबल की शुन्य स्लीव की डेटम लाइन से आगे बढ़ जाती है तो ऐसी ऋणात्मक त्रुटि कहते हैं|
इसे पाठयांक लेने के पश्चात कुल पाठयांक में जोड़कर सही  रीडिंग ज्ञात कर लेते हैं|

शुन्यांक त्रुटि ठीक करने की विधियां|method of of removing zero error

शुन्यांक त्रुटि दो विधियों से ठीक की जा सकती है
1. सी स्पिनर के द्वारा|by C spanner
2. एन्विल स्क्रू के द्वारा|by anvil screw

सी स्पिनर के द्वारा|by C spanner

माइक्रोमीटर के स्लीव या बैरल पर बने छेद में सी-स्पेनर को फसा कर शुन्य त्रुटि ठीक की जा सकती है|

एन्विल स्क्रू के द्वारा|by anvil screw

कुछ माइक्रोमीटर की शुन्य त्रुटि को एंन्विल स्क्रू को समायोजित करके ठीक किया जा सकता है

टेस्ट पीस(test piece)

यह एक अलांय स्पात का गोल आकार में बना एक पीस होता है यह अच्छी तरह से ग्राइण्ड किया हुआ एवं हार्ड एवं टेम्पर  किया हुआ होता है यह कई साइज में मिलते हैं|
जैसी 25 मिलीमीटर 50 मिलीमीटर तथा 1 इंच,2इंच
इसका उपयोग माइक्रोमीटर में शुन्यांक त्रुटि चेक करने के लिए किया जाता है|

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गहराई माइक्रोमीटर|depth micrometer

 गहराई माइक्रोमीटर |depth micrometer

डेप्थ माइक्रोमीटर की द्वारा इसी कार्यखण्ड या जॉब के स्लॉट छेद या ग्रूव की गहराई को 0.01 की शुद्धता मैं मापा जा सकता है|

इसमें फ्रेम के स्थान पर स्टील का आधार लगा होता है|

इसकी फ्रेम के साथ अलग-अलग गहराई मापने के लिए विस्तार छड़(extension road)का सेट होता है प्रत्येक विस्तार छड़ पर उसका साइज लिखा हुआ होता है|

Depth Micrometer, गहराई माइक्रोमीटर,
Depth Micrometer


इस प्रकार की माइक्रोमीटर के स्लीव या बैरल पर ग्रेजुएशन विपरीत दिशा से शुरू होती है और शुन्य सबसे ऊपर होती है|

माइक्रोमीटर लीड और पिच अथवा नट और बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है|

डेप्थ माइक्रोमीटर का अल्पतमांक|depth micrometer least count

गहराई माइक्रोमीटर का अल्पतमांक मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर होता है तथा ब्रिटिश प्रणाली में गहराई माइक्रोमीटर का अल्पतमांक 0.001 इंच होता है|


Depth micrometre ke bhago ke naam|depth micrometre parts name

Depth-Micrometer-parts-name, डेप्थ माइक्रोमीटर के भागों के नाम


1. आधार|base

2. स्लीव या बैरल|sleeve aur barel

3. थिंबल|thimble

4. गहराई रोंड|death road

5. रैचट|ratcht

6. लॉक रिंग|lock ring

गहराई माइक्रोमीटर के लिए अंशांकन|depth micrometre graduation

गहराई माइक्रोमीटर की ग्रेजुएशन दो प्रकार से पढ़ी जा सकती है 1.मैट्रिक गहराई माइक्रोमीटर के लिए ग्रेजुएशन और 2. ब्रिटिश गहराई माइक्रोमीटर के लिए ग्रेजुएशन


मैट्रिक गहराई माइक्रोमीटर के लिए ग्रेजुएशन|graduation of metric system for micrometre

इस प्रणाली में गहराई माइक्रोमीटर पर आउटसाइड माइक्रोमीटर की तरह ही ग्रेजुएशन बनी होती है परंतु अंतर केवल इतना होता है कि इसकी ग्रेजुएशन आउटसाइड माइक्रोमीटर की अपेक्षा विपरीत दिशा में शुरू होती है|

इसकी ग्रेजुएशन स्लीव पर आधार की ओर से शुरू होती है जैसे 25,20,15,10,5,0 आदि निशान और थिंबल पर 50,45,40,35,30,25,20,15,10,5,0 आदि निशान अंकित होते है|

मीट्रिक प्रणाली में गहराई माइक्रोमीटर की विस्तार छड़ 25 मिलीमीटर की रेंज में पाई जाती है|

जैसे-0 से 25 मिलीमीटर,25 से 50 मिलीमीटर आदि|

गहराई माइक्रोमीटर के लिए ब्रिटिश प्रणाली में ग्रेजुएशन|graduation of British system for depth micrometer

इसकी स्लीव या बैरल पर इसके आधार(base) की ओर से 0,9,8,7,6,5,4,3,2,1 आदि निशान और थिंबल पर 0,20,15,10,5 आदि निशान अंकित रहते हैं|

ब्रिटिश गहराई माइक्रोमीटर 0 से 6 इंच सेट वाला प्रयोग में लाया जाता है|जिससे 0"से 1",1"से2"  2"से 3",3"से 4",4"से 5",5"से 6"साइज की 6 विस्तार छड़ (extension road) आती है|

गहराई माइक्रोमीटर की परिशुद्धता चेक करना|depth micrometer accuracy

गहराई माइक्रोमीटर से कार्य करने से पहले इसकी सुन्यांक त्रुटि अवश्य चेक करनी चाहिए

इसका जीरो एरर चेक करने के लिए 0.25 मिली मीटर की गहराई छड़ को माइक्रोमीटर के साथ फिट करके माइक्रोमीटर के आधार को सरफेस प्लेट के ऊपर रखकर इसके रेचट की सहायता से थिंबल को घुमाना चाहिए

जब गहराई छड सतह के साथ स्पर्श करेगी तो थिंबल घूमना बंद कर देता है

इसके बाद यह देखना चाहिए कि थिंबल की शुन्य स्लीव या बैरल की डेटम लाइन की सिध मैं है अथवा नहीं

यदि थिंबल की 0 स्लीव की डेटम लाइन के आगे या पीछे रह जाती है तो समझना चाहिए कि माइक्रोमीटर में शुन्य त्रुटि है|

इसे ठीक करके ही माइक्रोमीटर काम में लेना चाहिए|


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क्यों जरूरी है डिजिटल माइक्रोमीटर

 क्यों जरूरी है डिजिटल माइक्रोमीटर

इस माइक्रोमीटर के द्वारा छोटी से छोटी माप को ज्ञात किया जा सकता है तथा इसमें लगी डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से इससे काफी पारदर्शी एवं परिशुद्ध माप लिया जाता है डिजिटल माइक्रोमीटर से माप लेने पर माप को पढ़ने और समझने मैं आसानी रहती है
डिजिटल माइक्रोमीटर से रीडिंग लेते समय त्रुटि की संभावना ना के बराबर रहती है

डिजिटल माइक्रोमीटर|digital micrometer

यह एक विशेष प्रकार का आधुनिक माइक्रोमीटर होता है इसके फ्रेम पर लॉकिंग स्क्रु के नीचे एक डिजिटल डायल लगा होता है जिसे डिजिटल काउंटर कहते हैं|

Digital micrometer, डिजिटल माइक्रोमीटर,
Digital micrometer


इस डिजिटल काउंटर पर रैचट तथा थिंबल द्वारा लिया गया माप अंकित होता है क्योंकि डिजिटल काउंटर का संबंध गियरो द्वारा माइक्रोमीटर के स्पिंडल से होता है
इस प्रकार की माइक्रोमीटर से पाठयांक सुविधा पूर्वक पढ़ सकते हैं क्योंकि कार्य खंड या जॉब की माप डिजिटल काउंटर पर स्वयं अंकित हो जाती है जिससे समय की बचत भी होती है|
इस माइक्रोमीटर से पाठयांक(reading) लेते समय भूल की संभावना नहीं रहती है क्योंकि इससे पाठयांक लेने से पहले ही त्रुटि ठीक कर दी जाती है|

डिजिटल माइक्रोमीटर का अल्पतमांक|least count of digital micrometer

इस माइक्रोमीटर का अल्पतमांक(least count) मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तथा इससे भी अधिक परिशुद्धता में 0.001 मिलीमीटर होता है|
तथा ब्रिटिश प्रणाली में 0.001 इंच तथा इससे भी अधिक परिशुद्धता में 0.0001 इंच होता है|

माइक्रोमीटर के बारे में और अधिक जाने click here

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वर्नियर माइक्रोमीटर|vernier micrometer

 वर्नियर माइक्रोमीटर|vernier micrometer

इस प्रकार का माइक्रोमीटर साधारण आउटसाइड माइक्रोमीटर की तरह होता है अंतर केवल इतना है कि इसके स्लीव या बैरल पर डेटम लाइन के समांतर 10 रेखाएं अंकित होती हैं|इसे ही वर्नियर पैमाना कहते हैं|
मीट्रिक वर्नियर माइक्रोमीटर में यह 10 रेखाएं(line) थिंबल के 9 भागों के या 0.09 मिलीमीटर के बराबर होती है|
इस प्रकार की माइक्रोमीटर के द्वारा 1/1000 मिलीमीटर या 0.001 मिली मीटर की परिशुद्धता में माप ले सकते हैं|
अर्थ अर्थ मीट्रिक वर्नियर माइक्रोमीटर का अल्पतमांक 0.001 मिलीमीटर होता है|
ब्रिटिश वर्नियर माइक्रोमीटर में भी स्लीव या बैरल की डेटम लाइन के समांतर 10 रेखाएं अंकित होती हैं जिसे बर्नियर पैमाना (vernier scale) कहते हैं|यह 10 रेखाएं थिंबल केेेेे 9 भागों के बराबर होती है|
 ब्रिटिश प्रणाली में बर्नियर पैमाने के 10 भाग=0.009
ब्रिटिश प्रणाली में वर्नियर माइक्रोमीटर के द्वारा कम से कम 1/10000 इंच अथवा 0.0001 इंच की परिशुद्धता में मापा जा सकता है|
अर्थात इस प्रणाली में अल्पतमांक(least count)0.0001 इंच होता है

Vernier micrometer, vernier micrometre


वर्नियर माइक्रोमीटर का सिद्धांत|principle of vernier Micrometer

वर्नियर माइक्रोमीटर 2 सिद्धांतों पर आधारित होता है|
1. यह नट और बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है तथा
2. यह दो पैमानों (मुख्य पैमाना व वर्नियर पैमाना) के अंतर के सिद्धांत पर कार्य करता है

वर्नियर माइक्रोमीटर के अल्पतमांक निकालने का सूत्र|Vernier micrometer least count formula

निम्नलिखित सूत्र के द्वारा आप माइक्रोमीटर का लिस्ट काउंट निकाल सकते हैं|
अल्पतमांक(least count)=पिच/वृत्ताकार पैमाने पर कुल भाग×बर्नियर पैमाने के भाग

माइक्रोमीटर का उपयोग|use of  micrometer

जब हमें बहुत ही सटीक माप की आवश्यकता होती है तो हम एक माइक्रोमीटर का उपयोग करेंगे। मापने की आवश्यकता के आधार पर कई अलग-अलग प्रकार के माइक्रोमीटर हैं। यह बाहर से किसी पाइप, उपकरण या वस्तु के आकार का हो सकता है। यह एक पाइप, आकार या अन्य खोखली वस्तु की अंदर की चौड़ाई हो सकती है। या यह एक छेद या अवकाश की गहराई हो सकती है।
यह वे उपकरण हैं जिन तक आप पहुंचेंगे जब सटीकता सबसे महत्वपूर्ण कारक है। चलती भागों वाली मशीनों के लिए यह अक्सर सच होता है। उदाहरण के लिए, पिस्टन के तरह एक दूसरे से अंदर और बाहर जाने वाले भागों को एक स्थिर, सीधी रेखा में रहने की आवश्यकता होती है। यदि इन भागों में थोड़ा सा भी अंतर है, तो वे विफल होना शुरू कर सकते हैं। यह अन्य अनुप्रयोगों में भी सच है, जैसे कि बीयरिंग का उपयोग। अन्य अनुप्रयोग जिन्हें सबसे सटीक माप की आवश्यकता होती है, वे हैं पाइप फिटिंग- खासकर यदि पाइप बहुत छोटे और हल्के अणुओं जैसे हीलियम के साथ गैसों को स्थानांतरित कर रहा हो। शीट धातुओं जैसी वस्तुओं की मोटाई को मापने के लिए माइक्रोमीटर ही पसंदीदा उपकरण हैं। माइक्रोमीटर के द्वारा हम किसी भी उपकरण को या जॉब को बारीकी से माप सकते हैं|

माइक्रोमीटर को कैसे पढ़ें?|how to read micrometer?

किसी भी माप के लिए उपयोग करने से पहले यह जांचना महत्वपूर्ण है कि माइक्रोमीटर अंग्रेजी है या मीट्रिक है अथवा नहीं। सुनिश्चित करें कि आप एक ऐसे उपकरण का उपयोग कर रहे हैं जिसमें माप की वही इकाई (मैट्रिक या ब्रिटिश) है जिसके साथ आप पहले से काम कर रहे हैं।
अधिकांश माइक्रोमीटर एक इंच (0.001") के 1000वें हिस्से को पढ़ सकते हैं।
लेकिन वर्नियर माइक्रोमीटर एक इंच के 10000वें हिस्से (0.0001") तक पढ़ सकते हैं।
एक बार माइक्रोमीटर को उचित माप में घुमाने के बाद, माप लिया जा सकता है। इसके लिए स्पिंडल और थिम्बल पर अंकित किए गए नंबरों को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता होती है जो आपको सटीक माप देगा। माइक्रोमीटर के प्रकार और डिज़ाइन के आधार पर आप जो नंबर चाहते हैं उस माप को आप आसानी से प्राप्त कर सकते हैं|

माइक्रोमीटर के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें   माइक्रोमीटर

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आउटसाइड माइक्रोमीटर|Outside micrometer

आउटसाइड माइक्रोमीटर|Outside micrometers

इस प्रकार के माइक्रोमीटर का उपयोग किसी कार्यखण्ड या जॉब के बाहरी व्यास अथवा बाहरी माप चेक करने के लिए किया जाता है|
Outside-micrometer, बहारी माइक्रोमीटर
Outside micrometer

इस प्रकार के माइक्रोमीटर के द्वारा मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर की शुद्धता में तथा ब्रिटिश प्रणाली में 0.001 इंच की शुद्धता में मापा जा सकता है
इस प्रकार की माइक्रोमीटर लीड तथा पिच सिद्धांत पर कार्य करते हैं

 माइक्रोमीटर|micrometer

माइक्रोमीटर एक सूक्ष्म मापी यंत्र होता है

इसके द्वारा किसी कार्यखंड या जॉब को मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर या इससे भी अधिक परिशुद्धता में 0.001 मिलीमीटर की सूक्ष्मता से चेक किया जा सकता है तथा ब्रिटिश प्रणाली में 0.001 इंच तक चेक किया जा सकता है|

माइक्रोमीटर का सिद्धांत|principle of micrometer

माइक्रोमीटर लीड और पिच किस सिद्धांत पर कार्य करता है| या यू कहे की नट और बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है|


आउटसाइड माइक्रोमीटर की भागों के नाम|parts name of outside micrometer

1. फ्रेम|frame
2. स्पिंडल|spindle
3. स्लीव या बैरल|sleeve or barel
4. एन्विल|anvil
5. थिंम्बल|thimble
6. रैचेट स्टॉप|ratchet stop
7. लॉक नट|lock nut

फ्रेम|frame

यह एक C के आकार का फ्रेम है यह एक कठोर हिस्सा है जिसमें किसी जॉब या वस्तु को मापने के लिए दोनों होल्डिंग पॉइंट होते हैं। इसका आकार माइक्रोमीटर मापने की सीमा पर निर्भर करता है इसलिए सी फ्रेम का आकार बढ़ता है क्योंकि सीमा बड़ी हो जाती है।
इसका मुख्य कार्य एक माइक्रोमीटर की बुनियादी संरचना प्रदान करना है जिसमें एक छोर पर स्थित स्थिर निहाई और चलने योग्य धुरी सी फ्रेम के दूसरे छोर से अंदर या बाहर की ओर स्लाइड करती है।

स्पिंडल( धुरी)|spindle

यह सामान्यत क्रोमियम स्टील का बना होता है
यह एक बेलनाकार लंबा हिस्सा जो अन्य सभी भागों आस्तीन, लॉक नट और थिम्बल के माध्यम से जुड़ा होता है। यह चलने योग्य हिस्सा है और इसका शाफ़्ट के साथ संबंध है क्योंकि हम शाफ़्ट को दक्षिणावर्त घुमाते हैं या वामावर्त घुमाते हैं, धुरी वस्तु के आकार की तुलना में इसे समायोजित करने के लिए बाहर या अंदर की ओर स्लाइड करती है।

स्लीव या बैरल|sleeve or barel

यह एक बैरल प्रकार का बेलनाकार भाग है जो धुरी पर लगा होता है और माइक्रोमीटर का मुख्य पैमाना होता है क्योंकि आस्तीन पर मुख्य पैमाना उकेरा जाता है। थिम्बल के नीचे और धुरी के चारों ओर घूमता है। इसका मुख्य कार्य बाहरी माइक्रोमीटर के मामले में मिलीमीटर में पढ़ने का संकेत है यह क्रोमियम स्टील का बना होता है|

एन्विल|anvil

यह क्रोमियम स्टील से बना होता है|  यह माइक्रोमीटर का एक छोटा स्थिर बेलनाकार हिस्सा है जो सी-फ्रेम के दूसरे छोर में स्थित है और वस्तुओं को मापने के लिए एक होल्डिंग पॉइंट के रूप में कार्य करता है। तो हम कह सकते हैं कि यह माइक्रोमीटर के कठोर माप और धारण बिंदु में से एक है|

थिंम्बल|thimble

थिम्बल को स्पिंडल  के साथ जोड़ा है और थिम्बल की परिधि के चारों ओर एक पैमाना लिखो जाता है। थिम्बल का कार्य पैमाना अंश में माप का मान दिखाना है।

रैचेट स्टॉप|ratchet stop

यह थिंबल की एक सिरे से जुड़ा होता है यह मापने की प्रक्रिया के लिए स्पिंडल को वांछित दिशा में घुमाने के लिए एक घुंघराला थंब ग्रिप है, जिसमें मापने वाली वस्तु में माइक्रोमीटर के अधिक कसने से बचने के लिए लचीली क्रिया प्रदान की जाती है और यह प्रत्येक माप के समान दबाव बल भी सुनिश्चित करता है।
जैसे ही पाठयाक सही आता है तो रैचेट की सहायता से दो बार चट चट की आवाज लेनी चाहिए|

लॉक नट|lock nut

पाठयांक लेने के बाद स्पिंडल को लॉक करने के लिए एक लॉक नट लॉकिंग युक्ति का प्रयोग किया जाता है यह फे्म के साथ जुड़ा होता है|

माइक्रोमीटर की परास|micrometer range

माइक्रोमीटर की द्वारा ली जाने वाली मांप की सीमा को ही माइक्रोमीटर की परास कहते हैं
बाहरी माइक्रोमीटर विभिन्न प्रकार के स्पिंडल और एविल कॉन्फ़िगरेशन में उपलब्ध हैं ताकि ऑपरेटर को वर्कपीस पर मुश्किल-से-पहुंच सुविधाओं को मापने की अनुमति मिल सके। एक विशिष्ट आउटसाइड माइक्रोमीटर पर मापने की सीमा 1" (25 मिमी) होती है। कुछ विशेष अनुप्रयोग माइक्रोमीटर में 1" (25 मिमी) से छोटी या अधिक सीमा होती है। वाइड रेंज आउटसाइड माइक्रोमीटर (विनिमेय एविल माइक्रोमीटर) उपलब्ध हैं और एक ही रेंज (आमतौर पर एक 6 "रेंज) को कवर करने के लिए अलग-अलग माइक्रोमीटर की लागत की तुलना में एक माइक्रोमीटर सेट की लागत को कम करते हैं।
माइक्रोमीटर मानकों का उपयोग माइक्रोमीटर पर शून्य-ओपनिंग स्थिति को सत्यापित करने करने के लिए किया जाता है, जब माइक्रोमीटर स्पिंडल माइक्रोमीटर एविल से संपर्क नहीं करता है, जैसे कि 1" (25 मिमी) से अधिक माइक्रोमीटर|
माइक्रोमीटर की परास निशानों के रूप में स्लीव या बैरल पर अंकित की जाती है इसके अलावा इसके फ्रेम पर भी लिखी हुई होती है|

माइक्रोमीटर कैसे पढ़ें|how to read micrometer

स्लीव या बैरल पर निशान लाइनों के दो सेट के रूप में मिलते हैं
स्पिंडल पर सटीक ग्राउंड थ्रेड एक माइक्रोमीटर की उच्च सटीकता और रिज़ॉल्यूशन का आधार है। एक अंग्रेजी माइक्रोमीटर स्पिंडल 40 TPI का उपयोग करता है। स्पिंडल की एक क्रांति मापने वाले चेहरे को .025 तक आगे बढ़ाती है। स्लीव को हर .025" में ग्रैजुएट किया जाता है और थिम्बल को हर .001" में ग्रेजुएट किया जाता है। माइक्रोमीटर रीडिंग .0001"।
एक माइक्रोमीटर स्लीव को 40 बराबर भागों में बांटा गया है। प्रत्येक विभाजन को एक ऊर्ध्वाधर रेखा द्वारा इंगित किया जाता है जो एक इंच या .025 के चालीसवें हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक चौथी पंक्ति को एक लंबी रेखा और एक संख्या द्वारा चिह्नित किया जाता है जो एक सौ-हजारवें हिस्से को दर्शाता है। उदाहरण: आस्तीन पर रेखा "1" के रूप में चिह्नित है ".100" का प्रतिनिधित्व करता है, "2" के रूप में चिह्नित लाइन .200 का प्रतिनिधित्व करती है|
माइक्रोमीटर थिम्बल को 25 बराबर भागों में बांटा गया है। थिम्बल का एक पूरा घुमाव आस्तीन पर सबसे छोटे विभाजन के साथ मेल खाता है। इस प्रकार, थिम्बल पर विभाजन .025" या .001" का पच्चीसवां हिस्सा है।
एक 10000 को पढ़ने के लिए एक अतिरिक्त पैमाने की आवश्यकता होती है जिसे वर्नियर स्केल कहा जाता है। एक नियमित माइक्रोमीटर के मामले में, वर्नियर में 10 डिवीजन होते हैं, जो स्लीव पर चिह्नित होते हैं, जो थिम्बल स्केल के 9 डिवीजनों के भीतर होते हैं। इसलिए, वर्नियर पर प्रत्येक विभाजन थिम्बल की तुलना में एक 10 वा हिस्सा छोटा है, इस प्रकार .0001 का प्रतिनिधित्व करता है।

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वर्नियर कैलीपर|Vernier caliper|वर्नियर हाइट गेज|vernier height gauge

 वर्नियर कैलीपर|Vernier caliper

यह एक सूक्ष्म मापी यंत्र होता है यह जॉब को अधिक परिशुद्धता मापने के लिए काम में लिया जाता है|

Vernier-caliper, वर्नियर-कैलीपर
Vernier caliper


वर्नियर कैलिपर का आविष्कार|Invention of vernier caliper

इसका आविष्कार संन 1630 मैं फ्रांस के पैरी वर्नियर नामक एक व्यक्ति ने किया था

वर्नियर कैलिपर का उपयोग|Use of vernier caliper

इसका उपयोग किसी कार्यखंण्ड या जॉब की बाहरी माप, भीतरी माप, तथा गहराई को सूक्ष्म रूप से मापने में किया जाता है

वर्नियर कैलिपर का अल्पतमांक|least count Vernier caliper

इसके द्वारा मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप को इसका अल्पतमांक (least count) कहते ह|
इसका लिस्ट काउंट मीट्रिक प्रणाली में 0.02 मिली मीटर तथा ब्रिटिश प्रणाली में 0.001 इंच होता है

काॅमन सूत्र:-

अल्पतमांक(least count)=मुख्य पैमाने की एक खाने का मान/वर्नियर पैमाने पर कुल खानों की संख्या

वर्नियर कैलीपर किसका बना होता है|Whose Vernier Caliper is made of

वर्नियर कैलीपर निकल क्रोमियम इस्पात से बनाए जाते हैं

वर्नियर कैलीपर का साइज|Size of vernier caliper

जी मीट्रिक प्रणाली में 150 मिलीमीटर से 300 मिली मीटर तथा ब्रिटिश प्रणाली में 6 से 12 इंच तक साइज में पाए जाते हैं

वर्नियर के भाग|parts of vernier caliper

1. बीम या मुख्य पैमाना(beam aur main scale)
2. स्थिर जबडा(fixed jow)
3. चल जबड़ा(movable jaw)
4. बर्नियर पैमाना(vernier scale)
5. सक्षम समायोज्य यूनिट(fine adjusting unit)
6. लॉकिंग स्क्रु(locking screw)
7.सूक्ष्म समायोजन स्क्रू(fine adjustable screw)
8. आंतरिक मापन निब(inner measuring nibs)
9. गहराई पत्ती(depth strip)

बीम या मुख्य पैमाना(beam aur main scale)

यह एक चोड़ी धातु की पट्टी होती है जिस पर मुख्य पैमाना बना होता है
इस पर मिली मीटर और इंच में भाग अंकित होते हैं
बीम की बाई तरफ फिक्स जबड़ा होता है जिस पर बर्नियर हेड तथा फाइन समायोजन हेड स्लाइड करते हैं

स्थिर जबडा(fixed jow)

यह बीम का ही एक भाग होता है जो बीम के समकोण पर बना होता है
इस पर बाहरी एवं भीतरी माप लेने के लिए तल(face) बने होते हैं|

चल जबड़ा(movable jaw)

यह जबड़ा तथा स्थिर जबड़ा (fixed jow) दोनों के द्वारा बाहरी एवं भीतरी माप ले सकते हैं

बर्नियर पैमाना(vernier scale)

वर्नियर पैमाना वर्नियर हेड पर बना होता है|
वरनियर हैड मे एक स्थिर भुजा बनी होती है जिसमें हैंड को स्थिर करने के लिए लॉकिंग स्क्रु लगा होता है|

सक्षम समायोज्य यूनिट(fine adjusting unit)

यह बर्नियर हेड के साथ एक स्क्रू तथा नर्ल की हुई नेट के द्वारा जुड़ी होती है|
इस यूनिट का प्रयोग सूक्ष्म मापन के लिए किया जाता है|
परिशुद्ध माप लेने के लिए वर्नियर पहले बर्नियर हेड को दिए माप के लिए लगभग सेट कर लेते हैं फिर लॉकिंग स्क्रू से लॉक करके इस पर लगे फाइन एडजस्टिंग नट के द्वारा वर्नियर हेड को थोड़ा सा ऊपर या नीचे सरका कर परिशुद्ध माप प्राप्त कर लेते हैं|

लॉकिंग स्क्रु(locking screw)

लांकिंग स्क्रू बर्नियर हेड तथा फाइन एडजस्टिंग हेड पर लगे होते हैं इनके द्वारा पाठयांक लेते समय वरनियर को लॉक करके सही और परिशुद्ध पाठयांक ज्ञात कर लिया जाता है

सूक्ष्म समायोजन स्क्रू(fine adjustable screw)

सूक्ष्म समायोजन स्क्रू की सहायता से परिशुद्ध माप ले सकते हैं|
यह फाइल एडजस्टिंग यूनिट तथा वरनियर हेड के बीच लगा होता है|

आंतरिक मापन निब(inner measuring nibs)

अधिकतर बर्नियर कैलीपरो बाहरी जबडो के विपरीत दिशा में जो जबड़े बने होते हैं उन्हें आंतरिक मापन निब कहते हैं|
स्पर्श सतह कम करने के लिए इनकी धार(Edge) चाकू(knife) जैसी बनी होती है|
इन जबड़ों या नीबो का प्रयोग किसी झिरी(slots) छेद तथा अन्य भीतरी माप लेने के लिए किया जाता है|

गहराई पत्ती(depth strip)

यह एक बारीक पत्ती होती है जो बीम के पीछे के हिस्से की ओर जुड़ी होती है और यह एक झिरी में स्लाइड करती हैं| यह बीम के अंतिम किनारे पर एक स्टांपर पती और दो पेचों द्वारा जुड़ी होती है अब मुख्य पैमाने पर बर्नियर पैमाने की शून्य रेखाएं आपस में मिलती हैं तब डैप्थ स्ट्रिप की टिप बीम के सिरे की सतह के बराबर रहती है इसका प्रयोग किसी झिरी या छेद(hole) की गहराई मापने में किया जाता है

वर्नियर का सिद्धांत|principle of vernier

वर्नियर कैलीपर दो पैमानों (मुख्य पैमाना तथा बर्नियर पैमाना) के अंतर के सिद्धांत पर कार्य करता है|

वर्नियर कैलीपर पढ़ने की विधि|Vernier caliper reading method

वर्नियर कैलीपर से पाठयांक लेते समय सबसे पहले यह देखते हैं कि वरनियर पैमाने की शुन्य वाली रेखा मुख्य पैमाने के कितने भाग पार कर चुकी है|
यदि आधे मिली मीटर वाली रेखा को भी यह पार कर चुकी हो तो उसको भी इसमें जोड़ देते हैं|
इसके बाद वरनियर पैमाने की कौन सी लाइन मुख्य पैमाने की किसी एक लाइन के बिल्कुल सिद्ध में है उसको नोट कर लेते हैं|
इसके बाद वरनियर पैमाने के इस पाठयांक को अल्पतम माप से गुणा करके मुख्य पैमाने के पाठयांक में जोड़ देते हैं|
सूत्र - कुल पाठयांक = मुख्य पैमाने का पाठयांक + (वरनियर पैमाने का पाठयांक) × अल्पतमांक

ब्रिटिश प्रणाली में वर्नियर कैलीपर पढ़ने की विधि|Vernier caliper reading method in British system

वर्नियर कैलीपर काम पाठयांक लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वरनियर पैमाने की 0 लाइन मुख्य पैमाने के कितने भाग व अनुभाग को पार कर गई है फिर वर्नियर पैमाने की जो लाइन मुख्य पैमाने के ठीक सामने मिल रही है उसे नोट कर लेना चाहिए और उसे अल्पआत्मांक (0.001) से गुणा करके मुख्य पैमाने के पाठयांक में जोड़ देना चाहिए|
सूत्र - कुल पाठयांक = मुख्य पैमाने का पाठयांक + (वरनियर पैमाने का पाठयांक × अल्पतमांक)

वर्नियर ऊंचाई गेज|vernier height gauge

वर्नियर  हाइट गेज का प्रयोग कार्यखण्डों तथा जॉब के विभिन्न भागों की ऊंचाइयों को मापने तथा परिशुद्ध मार्किंग करने के लिए किया जाता है|
इसके मुख्य भागों में- ऊर्ध्वाधर बीम, आधार (base), स्लाइडिंग शीर्ष, सहायक शीर्ष, फाइन समायोजित स्क्रू, ब्रेकेट, स्क्राइबर आदि होते हैं|

Vernier-height-gauge,वर्नियर-ऊंचाई-गेज
Vernier height gauge


वरनियर ऊंचाई गेज में एक भारी आधार होता है जिसकी निचली सतह अच्छी तरह मशीन द्वारा फिनिश होती है|
इसके आधार पर एक धरण(beam) ऊर्ध्वाधर(vertical) दिशा में लगी होती है और इस बीम के सामने वाले भाग पर मुख्य पैमाना(main scale) बना होता है|
इस बीम पर एक सरकने वाला शीर्ष(sliding head) लगा होता है जिस पर वर्नियर पैमाना बना होता है|
इस स्लाइडिंग हेड के साथ एक सहायक हेड फाइंड समायोजन पेज के साथ जुड़ा होता है|
सरकने वाले शीर्ष के साथ ही ब्रैकेट जुड़ा होता है इस ब्रैकेट पर एक क्लैंप लगा होता है जिसकी सहायता से बदले जा सकने वाले स्क्राइबर लगाए जाते हैं|
इन स्क्राइबर से ही सही माप व सही मार्किंग निशान लगाए जाते हैं और यह पॉइंट की तरफ से हार्ड किए हुए अथवा कार्बाइड टिप लगे हुए होते हैं|
वर्नियर हाइट गेज का सिद्धांत, अल्पतमांक, तथा इसके पढ़ने का तरीका वर्नियर कैलिपर की तरह ही होता है|

प्रतियोगी परीक्षाऔ में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रसन 

जरा नीचे दिए गए वर्नियर कलीपर से संबंधित 20 प्रश्नों और उत्तरों को देखें:

1. वर्नियर कलीपर क्या होता है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर एक मापन उपकरण है जिसका उपयोग आयामों को मापने के लिए किया जाता है।

2. वर्नियर कलीपर का उपयोग किसलिए किया जाता है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग लंबाई, चौड़ाई, गहराई और अन्य आयामों को मापने के लिए किया जाता है।

3. वर्नियर कलीपर के दो प्रमुख भाग कौन-कौन से होते हैं?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर में दो प्रमुख भाग होते हैं - मुख्य स्केल और वर्नियर स्केल।

4. वर्नियर स्केल क्या होता है?

   उत्तर: वर्नियर स्केल एक संख्यात्मक स्केल होती है जो सूक्ष्म मापन के लिए उपयोगी होती है।

5. वर्नियर कलीपर की सटीकता क्या होती है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर की सामान्य सटीकता लगभग 0.02 मिलीमीटर या 0.001 इंच होती है।

6. वर्नियर कलीपर के प्रकार क्या-क्या होते हैं?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर के प्रकार में नॉनियर वर्नियर कलीपर, डिजिटल वर्नियर कलीपर, डिप्थ गेज वर्नियर कलीपर और उल्ट्रा-प्रिसिजन वर्नियर कलीपर शामिल हैं।

7. वर्नियर कलीपर का उपयोग किस क्षेत्र में होता है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग मशीनरी, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल और साइंस क्षेत्रों में होता है।

8. वर्नियर कलीपर के उपयोग से क्या लाभ होता है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग सटीकता, निर्भरता और मापन की सुविधा प्रदान करने में मदद करता है।

9. वर्नियर कलीपर को कैसे पढ़ा जाता है?

   उत्तर: वर्नियर कलीपर को पढ़ने के लिए, मुख्य स्केल पर दिखाए गए नंबर को पढ़ें और फिर वर्नियर स्केल पर दिखाए गए नंबर को जोड़ें।

10. वर्नियर कलीपर के लिए सही देखभाल कैसे की जाए?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर को साफ़ करें, उसे सुरक्षित रखें, और नमी और धूप से बचाएं। समय-समय पर उसे चेक करें और यदि आवश्यक हो तो उसे निर्माण कंपनी द्वारा जाँचबाट कराएं।

11. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय क्या ध्यान देना चाहिए?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय सही पकड़ और स्थिरता बनाए रखें, स्केल को सही ढंग से पढ़ें, और संपर्क बिंदु को सही ढंग से मिलाएं।

12. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय सावधानियाँ क्या होनी चाहिए?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय सावधान रहें, इसे भूमि पर ठीक रखें, उसे झटके न दें, और लंबे समय तक नमी या आधिकारिक तापमान में न छोड़ें।

13. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय यदि ग्रेडेशन ध्यान से पढ़ा जाए, तो कैसा होगा?

    उत्तर: यदि वर्नियर कलीपर के ग्रेडेशन को सही ढंग से पढ़ा जाए, तो सटीक माप किया जा सकता है और त्रुटि का निर्माण कम होगा।

14. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय ध्यान देने योग्य नियम क्या हैं?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करें:

    - समय-समय पर इसे जांचें और निर्माण कंपनी द्वारा सर्वेक्षण कराएं।

 - अनावश्यक संपर्क से बचें और अच्छी स्थिरता बनाए रखें।

    - उच्च और निम्न तापमान से बचें, और धूप और नमी से सुरक्षित रखें।

15. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय निम्नलिखित तत्वों को कैसे निर्धारित किया जाता है:

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय निम्नलिखित तत्वों को निर्धारित किया जाता है:

    - चौड़ाई या लंबाई: बाहरी और आंतरिक आयामों के बीच की दूरी को मापने के लिए।

    - गहराई: सतह और वस्तु के बीच की दूरी को मापने के लिए।

    - रेडियस: गोलाकार वस्तु के गोलाकार माध्यरेखा के केंद्र से सतह तक की दूरी को मापने के लिए।

16. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय अलग-अलग ध्यान देने योग्य मापों के बारे में बताएं।

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय निम्नलिखित मापों का ध्यान दें:

    - इंच: अंग्रेजी माप की इकाई है।

    - मिलीमीटर: सीएम का एक हजारवां भाग।

    - सेंटीमीटर: एक मीटर का एक सौवां भाग।

 - माइक्रोमीटर: एक मीटर का दस लाख भाग।

17. वर्नियर कलीपर का उपयोग करने के लिए सही तकनीक क्या है?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करने के लिए निम्नलिखित तकनीक का पालन करें:

    - उपयुक्त मापन ज्यामिति का चयन करें।

    - स्केल को सटीकता से खींचें और उपयुक्त दर पर रखें।

    - यथासंभव स्थिरता बनाए रखें और आवश्यकतानुसार संपर्क बिंदु बनाएं।

18. वर्नियर कलीपर का उपयोग करने के लिए सामान्य नियम क्या हैं?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करने के लिए निम्नलिखित सामान्य नियमों का पालन करें:

    - समय-समय पर मापकों की परीक्षण और निर्माण कंपनी द्वारा जांचबाट कराएं।

    - स्केल को स्वच्छ रखें और उसकी स्थिरता की जाँच करें।

    - उच्च और निम्न तापमान से बचें, और नमी और धूप से सुरक्षित रखें।

19. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय सावधानियों के बारे में बताएं।

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय निम्नलिखित सावधानियों का पालन करें:

    - ध्यान से उपयोग करें और अनावश्यक झटकों से बचें।

    - स्केल को अच्छी तरह से समायोजित और सटीक बनाए रखें।

    - संपर्क बिंदु को सही ढंग से मिलाएं और ठीक ग्रेडेशन पढ़ें।

20. वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय आप कौनसे तत्वों को माप सकते हैं?

    उत्तर: वर्नियर कलीपर का उपयोग करते समय आप चौड़ाई, लंबाई, गहराई, और रेडियस जैसे तत्वों को माप सकते हैं। इसके अलावा आप नटीजा भी माप सकते हैं और सटीक माप कर समय और वस्तुओं की गणना कर सकते हैं।

दोस्तों यह था हमारा आज का टॉपिक आपको हमारा यह ज्ञान संग्रह कैसा लगा कृपया कमेंट करके हमें सुझाव अवश्य दें धन्यवाद

Tap drill size|टेप ड्रिल साइज |Tap wrench|टेप रिंच

 Tap drill size | टेप ड्रिल साइज

आज हम जानेंगे टेप ड्रिल साइज के बारे में टेबल साइज कैसे निकालते हैं ड्रिल साइज साइज निकालने का  सूत्र क्या है साथ ही हम टेप ड्रिल साइज के कुछ प्रसन्न भी देखेंगे 
आइए देखते हैं टेप ड्रिल साइज क्या होता है
जब किसी कार्यखण्ड या जॉब में टैपिंग की जाती है तो उसमें टेप की साइज के अनुसार उससे कुछ छोटे साइज का ड्रिल छिद्र करना पड़ता है यह ड्रिल छिद्र टेपर कटी हुई चूड़ियों के कोर व्यास के बराबर होना चाहिए|
यदि ड्रिल छिद्र टेप के साइज से अधिक बड़ा हो गया तो पूरी गहराई की चूड़ी नहीं बनेगी|
यदि ड्रिंल होल टेप के साइज से छोटा बना है तो टाइपिंग करते समय टेप के टूटने का खतरा बना रहेगा इसलिए टेप के साइज के अनुसार ड्रिल होल करना अति आवश्यक है|

टेप साइड से ड्रिल साइज निकालने के सूत्र |tap size se drill size nikaalne ke sutra

1. ब्रिटिश मानक चूड़ियों के लिए (British standard threads formula

ब्रिटिश मानक चूड़ियों (B.S.W, B.S.F, B.A.) का साइज इंच में होता है
अलग-अलग मानक की चूड़ियों में 1 इंच में चूड़ियों की संख्या अलग-अलग होती है

इन चूड़ियों के लिए टेप ड्रिल साइज निम्नलिखित सूत्रों से निकाला जा सकता है

1. T.D.S.=T.S.-2d जहां, T.D.S.= टेप ड्रिल साइज
T.S.= टेप साइज, d=चूड़ी की गहराई =0.64P

2. T.D.S.=T.S.×7/8-1/32 P=चूड़ी की पिच =1/no. of T.P.I

1. टेप ड्रिल साइज प्राइस दशमलव में निकलता है परंतु लेटर और नंबर ड्रिल को छोड़कर भिंन्न मे ड्रिल प्राय 1 बटा 64 के क्रम में होते हैं इसलिए ड्रिल का साइज भिन्न में 1 बटा 64 इंच की दर से बदला जाता है |
2. दशमलव साइज को 0.960 से भाग देने पर देने  पर ड्रिल का साइज निकाला जा सकता है|

2.  मिट्रिक या S.I.S. चूड़ियों के लिए टेप ड्रिल साइज सूत्र|tap drill size formula for metric or ISI thread

1. T.D.S.= T.S.-2d
अथवा T.D.S.=T.S.-1.22P
2T.D.S.=T.S.-8
जहां,T.D.S.= टिप ड्रिल साइज
T.S.=टेप साइज
d=चूड़ी की गहराई
P=चूड़ी की पिच

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर|important question answer

1. निम्नलिखित में से कौन से कटिंग पैरामीटर ड्रिल में उपयोग किए जाते हैं?

 Answer- काटने की गति फ़ीड कट की गहराई यह सभी ड्रिल में में उपयोग किए जाने वाले पैरामीटर हैं। इन मापदंडों के अलावा, मशीनिंग समय, धातु हटाने की दर भी काटने वाले पैरामीटर हैं जो ड्रिल में उपयोग किए जाते हैं।

2. काटने की गति के लिए सूत्र है______जहां d=ड्रिल का व्यास मिमी में, n=ड्रिल का आरपीएम।


Answer - (π×d×n)/1000


स्पष्टीकरण: हालांकि इस प्रश्न में काटने की गति परिधीय गति है, इसके माध्यम से तय की गई दूरी π×d के बराबर होनी चाहिए तथा n आरपीएम (RPM) है और 1000 वहां है जैसा कि हम इसे मिमी में माप रहे हैं।

3. फ़ीड को ______ में व्यक्त किया जा सकता है

Answer- mm/revolution


व्याख्या: फीड की परिभाषा के अनुसार, फ़ीड प्रति चक्कर की दूरी है। तो इसकी इकाई इस सूत्र से मेल खाना चाहिए

4. कट की गहराई का सूत्र है______जहां d=ड्रिल का व्यास।

Answer - d/2


व्याख्या:- क्योंकि  कट की गहराई उपयोग की गई ड्रिल के आधे व्यास के बराबर होती है। अतः यदि d ड्रिल का व्यास है तो उसका सूत्र d/2 के बराबर होना चाहिए।

5. यदि L = मिमी में ड्रिल की यात्रा की लंबाई, n = ड्रिल के आरपीएम, s = मिमी में ड्रिल की प्रति चक्र फ़ीड। फिर मशीनिंग समय _____ के रूप में सूत्र दिया जा सकता है

Answer- l/(n×s)


स्पष्टीकरण: L/(n×s)- मशीनिंग समय की गणना के लिए यह सही सूत्र है। यहाँ l मिमी में व्यक्त किया गया है, n चक्र/मिनट है और s मिमी में व्यक्त किया गया है। तो इन सभी इकाइयों को मशीनिंग समय के सूत्र में रखने से हमें पूरे व्यंजक की इकाई मिनट के रूप में प्राप्त होती है। तो हमारा फॉर्मूला सही है।


यहां हम टेप ड्रिल साइज के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर चित्र के माध्यम से दिखाने का प्रयास करेंगे


Tap drill size, tape drill size nikalna

Tap drill size


Tap drill size, Tap drill size question answer

Tap wrench|टेप रिंच

टेप रिंच एक ऐसा औजार है जो हस्त टैपिंग करते समय टैप के पकड़ने के लिए किया जाता है |यह रिंच अनेक प्रकार के होते हैं कार्य के अनुसार यह अलग-अलग प्रकार से प्रयोग किए जाते हैं

Types of tap wrench|टेप रिंच के प्रकार

टेप रिंच तीन प्रकार के होते हैं
1. ठोस टेप रिंच (solid Tap wrench)
2. समायोजित टेप रिंच (adjustable tap wrench)
3. टी हत्था टेप रिंच (T hand tap wrench)

 ठोस टेप रिंच (solid Tap wrench)

इस प्रकार की टेप रेंज म एक या एक से अधिक वर्गाकार खान से बने होते हैं|
एक खांचे वाले टेप रिंच में एक ही साइज के टेप फिट हो सकते है तथा अधिक कांचे वाले टेप रेंज में अलग-अलग साइज के टेप फिट हो सकते हैं|

समायोजित टेप रिंच (adjustable tap wrench)

इस प्रकार के टेप रिंच में दोनों तरफ हथे लगे होते हैं जिनमें एक स्थिर तथा दूसरा घूम सकता है|
इस प्रकार के रिंग्स के बीच में दो जबड़े लगे होते हैं जिनमें एक स्थिर तथा दूसरा समायोजित (adjusttable) होता है
समायोजन (adjusttable) जबड़े के हत्थे को घुमाने पर इसे आगे पीछे समायोजित किया जा सकता है

टी हत्था टेप रिंच (T hand tap wrench)

इस प्रकार का टेप रिंच दो उठे हुए भागों के बीच गहरी सतह वाले छेद में टेपिंग करने के लिए किया जाता है|
इस प्रकार की टेप रेंज में एक चक लगा होता है जिसे व्यवस्थित करके विभिन्न साइज के टेप पकड़ने के लिए उपयोग किया जाता है |

हस्त टेपिंग विधि|hand tapping method

हस्त टेपिंग करते समय निम्नलिखित विधि प्रयोग करनी चाहिए-
1. जॉब में टेप की साइज के अनुसार सही साइज का ड्रिल छिद्र कर लेना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि ड्रिल छिद्र बिल्कुल सीधा हो|
2. ड्रिलिंग करते समय छिद्र के मुख पर आई बर्र को हटाकर हल्का सा चेंबर कर लेना चाहिए
3. कार्य खंड या जॉब को अच्छी तरह से बांध लेना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि किया हुआ ड्रिल छिद्र वाइज के कार्य खंड या जॉब के लंबवत रहे
4. टेपर टेप को रिंच में अच्छी तरह पकड़ लेना चाहिए
5. टेपको ड्रिल छिद पर रख कर दो या तीन चक्कर घुमाने चाहिए फिर रिंच को निकालकर ट्राय स्क्वायर से चेक करना चाहिए कि टेप जॉब की सतह से 90 डिग्री में टेपिंग कर रहा है अथवा नहीं|
6. यदि टेप जॉब की सतह से 90 डिग्री में टेपिंग नहीं कर रहा है वह तो टेप को सीधा करके टेपिंग करनी चाहिए|
7. टेपर टेप द्वारा पूरी चूड़ियां काटने के बाद द्वितीय टेप का प्रयोग करना चाहिए और बाद में फर्निशिंग टेप का प्रयोग करना चाहिए|

टेप के बार बार टूटने का कारण|causes for breakage of Tap

1. टेप के साइंज के अनुसार किया हुआ ड्रिल छेद छोटा होना
2. क्या हुआ छेद टेपर में होना
3. टेपिंग करते समय अधिक बड़े या अधिक छोटे टेप रिंच का प्रयोग करना
4. टेपिंग करते समय टेप पर अधिक दबाव डालना
5. टेप के कटिंग टीथ(cutting teeth) का घिस जाना
6. कार्य खंड या जॉब को बेंच वाइस मैं अच्छी तरह नहीं बांधना
7. टाइपिंग करते समय टेप को आधा चक्कर आगे और आधा चक्कर पीछे नहीं घूमाना
8. बंद छेद मैं टेपिंग करते समय चिप्स की सफाई नहीं करना
9. टेपिंग करते समय स्नेहक का प्रयोग नहीं करना
10. टेपिंग करते समय टेप सेट के तीनों टेपो का क्रम से प्रयोग नहीं करना|

How many salary of pipe fitter mechanic?|पाइप फिटर मैकेनिक की सैलरी कितनी है?

 How many salary of pipe fitter mechanic?

एक पाइप फिटर मैकेनिक की सैलरी अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग निर्धारित की जाती है
कुछ ऐसे संस्थान है जहां पर पाइप फिटर मैकेनिक की सैलरी बहुत ज्यादा होती है तो कुछ ऐसे संस्थान भी हैं जहां पाइप फिटर मैकेनिक की सैलरी बहुत ही कम होती है 
आज हम उन सभी संस्थानों के बारे में चर्चा करेंगे जहां एक पाइप फिटर अपने व्यवसाय में अधिक से अधिक पैसा कमा सकता है तथा जहां पर पाइप फिटर की सैलरी बहुत ज्यादा होती है या मीडियम से कुछ ज्यादा होती है

पाइप फिटर का औसत वेतनPipe Fitter's Average Salary

अगर बात की जाए पाइप फिटर की तो पाइप फिटर का औसत वेतन लगभग 10000 से ₹15000 के बीच माना जाता है शुरुआती दौर में यह इससे कम भी हो सकता है लेकिन एक पाइप फिटर की कड़ी मेहनत और जुझारू परवर्ती के चलते आने वाले दिनों में या भविष्य में यह सैलरी इससे ज्यादा भी हो सकती है हां लेकिन अगर भारत की बात की जाए तो कैरियर के शुरुआती दिनों में यह सैलरी 1000 से ₹15000 के बीच में होती है

पाइप फिटर मैकेनिक को ज्यादा सैलरी देने वाले संस्थान

वैसे तो अनेकों ऐसे संस्थान हैं जो पाइप फिटर के महत्व को समझते हैं और उसे ज्यादा सैलरी देते हैं लेकिन हम कुछ संस्थान के बारे में चर्चा करेंगे जहां पर एक पाइप फिटर मैकेनिक जोब पाकर एक अच्छी कमाई अर्जित कर सकता है आइए देखते हैं इन संस्थानों के बारे में

सभी सरकारी संस्थान जहां पर पाइप फिटर मैकेनिक की स्थाई भर्ती होती है

उन सरकारी संस्थानों में एक पाइप फिटर मैकेनिक अच्छी सैलरी पाने की उम्मीद हमेशा होती है और ऐसे संस्थानों में एक पाइप फिटर मैकेनिक का न्यूनतम वेतन₹1800 पे बैंड से स्टार्ट होता है 
यानी अगर मंथली इनकम की बात करें तो लगभग ₹20000 न्यूनतम होता है

वह गैर सरकारी कंपनियां जो  लिमिटेड होती हैं

गैर सरकारी लिमिटेड कंपनियों में एक पाइप फिटर मैकेनिक की आवश्यकता होती है और यह कंपनियां कुछ समय पश्चात एक कामगार को कंपनी बेसिस पर नियुक्ति देती है और उन्हें वह सारी सुविधाएं और सारे वेतन प्रदान करती है जो एक सरकारी कर्मचारी को प्राप्त होते हैं इसलिए इन कंपनियों का फिक्स वेतन तो कहा नहीं जा सकता लेकिन एक सफल कारीगर जो लिमिटेड कंपनी में कंपनी रोल पर भर्ती हुआ है उसे सभी सरकारी फैकेल्टी जो वेतन देती हैं ठीक उसी प्रकार सारे वेतन और भत्ते दिए होते हैं

दोस्तों आज हमने बताया एक पाइप फिटर मैकेनिक की सैलरी कितनी होती है अगर आपका कोई सुझाव हो तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं

धन्यवाद



Tap and tapping operation|टेप ओर टेपिंग संक्रियाएं

Tape|टैप्स

टेप एक ऐसा  कटिंग टूल होता है जिसके द्वारा किसी जॉब के बेलनाकार छेद के अंदर चूड़ियां काटी जाती हैं टेप के द्वारा चूड़ियां काटने से पहले टेप के साइज के अनुसार ड्रिल द्वारा छेद करके रीमिंग प्रोसेस से फिनिश किया जाता है
उसके बाद टेप टूल के द्वारा चूड़िया बनाई जाती है
टेप उच्च कार्बन इस्पात(high Carbon steel) अथवा उच्च गति इस्पात (high speed steel) से बनाए जाते हैं और इनकी बॉडी (body) हार्ड और  टैम्पर की हुई होती है टेप की बेलनकार देह (cylindrical body) के चारों तरफ चूड़ियां बनी होती है
टेप की लंबाई की दिशा में कुछ खांचे (grooves)  या फ्लूटस (fluted) कटे होते हैं

टैपिंग|taping

टेप के द्वारा किसी छेद (hole) के अंदर चूड़ी (thread) काटने की क्रिया को टैपिंग कहते हैं|

Parts name of tap|टेप के भागों के नाम

टेप के निम्नलिखित भाग होते हैं
1.देह|body
2. शैक|Shank
3. टैंग|tang
4. खांचे या फ्लूट्स|grooves aur flutes
5.लैंड|land
6. कर्तन फलक|cutting face
7. हील|heel
8. चैंम्फर|chamfor
9. पॉइंट व्यास|point diameter

देह|body

टेप में चूड़ी कटे हुए भाग(thread portion) की पूरी लंबाई को देह(body) कहते हैं

शैक|Shank

देह (body) के बाद समतल बेलनाकार भाग को शैक कहते हैं

टैंग|tang

शैंक के किनारे पर बने वर्गाकार भाग को टैंग कहते हैं
खांचे या फ्लूट्स|grooves aur flutes
टेप की देह मैं लंबाई की तरफ चूड़ियों को काटते हुए खाचे कटे होते हैं उन्हें फ्लूट्स कहते हैं
फ्लूट्स कर्तन कोण बनती है कटी हुई चिप्स बाहर निकलती है और स्नेहक दिया जाता है

लैंड|land

दो फ्लूटों के बीच में बनी धातु की सतह को जिस पर चूड़ियां कटी होती हैं| लैंड कहते हैं

कर्तन फलक|cutting face
लैंड के चूड़ीदार भाग के अगले भाग को कृर्तन फलक कहते हैं

हील|heel

लैंड के चूड़ीदार भाग के ऊपरी भाग को हिल कहते हैं

चैंम्फर|chamfor

देह का नीचे वाला भाग जहां पर कुछ चूड़ियों को टेपर में ग्राइंण्ड किया जाता है चैंम्फर कहलाता है

पॉइंट व्यास|point diameter

प्रथम टेप टेपर टेप के चैम्फर किए हुए आगे वाले सिरे के बाहरी व्यास को पॉइंट या व्यास या रूट व्यास कहते हैं|

Types of tap|टेप के प्रकार

1. हस्त टेप|hand tap
2. मशीन टेप|machine tap
3. एक्सटैंशन टेप|extension tap
4 मास्टर टेप|master tap
5. मशीन स्क्रू टेप|machine screw tap
6. नट टेप|nut tap

हस्त टेप|hand tap

इस प्रकार के टेप का उपयोग हाथ के द्वारा किया जाता है
इसके शैंक के सिरे पर एक वर्गाकार टैंग बनी होती है जिस पर टेप रिंच फिट किया जाता है
यह टेप अलग-अलग मानक चूड़ियों के लिए सेट के रूप में बनाए जाते हैं जैसे बी.एस.डब्ल्यू, बी.एस.एफ, और बी.ए, आदि|

मशीन टेप|machine tap

इस प्रकार की टेप का प्रयोग मशीन की सहायता से किया जाता है
इस प्रकार के टेप को इस प्रकार डिजाइन की किया जाता है की यह लगातार कार्य करें |
इस प्रकार के टेप का उपयोग ड्रिल मशीन अथवा लेथ मशीन पर किया जाता है

एक्सटैंशन टेप|extension tap

इस टेप को पुली टेप भी कहते हैं
इस प्रकार के टेप की शैंक साधारण हस्त टेप कि शैंक की अपेक्षा अधिक लंबी होती हैं |
इस टाइप का उपयोग किया जाता है जहां अधिक गहराई में बने छेदो में चूड़ियां काटनी हो |

मास्टर टेप|master tap

यह साधारण हस्त टेप की तरह ही होता है परंतु इसमें 6 से 10 फ्लूट बने होते हैं
इस टेप में अधिक फ्लुट होने से इस टेप से जो चूड़ियां बनाई जाती है वह अधिक सफाई वाली और सही होती है

मशीन स्क्रू टेप|machine screw tap

ये छोटे टाइप के हैंड टैप (hand tap) होते हैं, जिन पर स्क्रू के अनुसार नंबर लिखा रहता है। 0 नंबर के टैप का साइज 0.6″ तथा 12 नंबर का साइज 0.126″ होता है। साधारणतः 12 नंबर तक के टैप ही प्रयोग (use) किए जाते हैं।

नट टेप|nut tap

इस प्रकार की टैप की शैंक, एक्सटैन्शन टैप (extension tap) समान लम्बी होती है तथा बॉडी के आगे का प्वॉइण्ट कॉनिकल होता है। इसका प्रयोग नट को थ्रेडिंग मशीन (thread machine) के द्वारा या ड्रिल मशीन (drill machine) में पकड़कर चूड़ियाँ (threads) काटने के लिए किया जाता है।

Reamer | रीमर

 रीमर | Reamer

रीमर एक रोटरी कटिंग टूल (बेलनाकार या शंक्वाकार आकार का) है, जिसका उपयोग पहले से बने छेद को सटीक आयामों तक बढ़ाने या खत्म करने के लिए किया जाता है यह ड्रिल किए गए छेद को अंदर से परिष्कृत करता हैै यह भी ड्रिलिंग मशीन में पकड़कर कार्य किया जाता है 

 रीमर के द्वारा बहुत ही कम और छोटी चिप्स को काटा जाता है यह आमतौर पर दो या दो से अधिक परिधीय खांचे या बांसुरी से सुसज्जित होता है जो धुरी (सीधे रीमर) या दाएं या बाएं हाथ के हेलिक्स (फ्लूटेड या सर्पिल रीमर) के समानांतर हो सकते हैं। चिकनी कतरनी काटने के कारण बाद वाला प्रकार बेहतर फिनिश देता है। रीमर बॉडी पर बांसुरी दांतों को काटने और हटाए गए चिप्स को समायोजित करने के लिए खांचे के रूप में कार्य करती है।

रिमर का आकार दो किनारों पर मापे गए व्यास द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है, अत्याधुनिक रेखा पर और एक व्यास रेखा पर। इन्हें उच्च कार्बन स्टील, एचएसएस, कास्ट मिश्र धातु काटने की सामग्री, और सीमेंटेड कार्बाइड रूपों से बनाया जा सकता है। ये कई अलग-अलग रूपों में बने होते हैं । ये ठोस या सम्मिलित ब्लेड प्रकार, समायोज्य या गैर-समायोज्य प्रकार हो सकते हैं, मैनुअल ऑपरेशन (हैंड रीमर) या मशीन उपयोग (चकिंग रीमर) के लिए डिज़ाइन किए जा सकते हैं जिससे रिमिंग क्रिया में आसानी हो सके जॉब की धातुओं के आधार पर अलग-अलग प्रकार के रीमार प्रयोग किए जाते हैं
अधिक मात्रा में उत्पादन के लिए कार्बाइड वाले रीमार प्रयोग किए जाते है

रीमर के भागों के नाम | name of Reamer parts

एक रीमर में 3  मुख्य भाग होते हैं:
1.     चैम्फर का कोण(angle of chamfer)
2.     देह (body)
3.     शैंक (shank)
फ्लुटेड भाग में चम्फर, स्टार्टिंग टेंपर, साइज़िंग सेक्शन और बैक टेंपर लेंथ होते हैं। चम्फर की लंबाई या बेवल लेड, छेद में रिएमर के उचित और आसान प्रवेश को सुनिश्चित करता है। रीमर की मुख्य कटिंग क्रिया टेपर, साइज़िंग सेक्शन को शुरू करके और रीमर को गाइड करने के लिए की जाती है और छेद को चिकना या आकार देने के लिए भी किया जाता है। पिछला टेपर राइमर और पूरी सतह के बीच घर्षण को कम करता है।

1.     चैम्फर का कोण(angle of chamfer)

यह रीमर  तले वाला भाग होता है जो धातु को काटता है यह इस प्रकार ग्राइंडर किया हुआ होता है कि चैंपर कर्तन को उनके पीछे कुछ क्लेरेंस रहे ऐसा रोज टाइपिंग नहीं होता है

2.   रीमार की  देह (body o f reamer)

रीमार की देह में बहुत सारे फ्लुट और लैड होते हैं
दो फ्लूटों के बीच की दूरी को लैंड कहा जाता है

3.     शैंक (shank )

शैंक रीमर का वह भाग होता है जो ड्रिल मशीन के स्पिंडल स्लीव चक या रिंच मैं फिट किया जाता है
रीमर के प्रकार | types of reamer
रीमर मुख्यतः दो प्रकार के होती हैं
1- हैंड रीमर (hand reamar)
2- मशीन रीमर (machine reamer)

हैंड रीमर | hand reamer

इन रीमरों को हाथ से संचालित किया जाता है
Hand reamer, taper remar
Hand-reamer


 जिसमें रिमर के अनुक्रम पर लगे टैप रिंच होते हैं। कार्य अधर में लटका हुआ है। बांसुरी सीधी या पेचदार हो सकती है। रिंच के लिए एक चौकोर स्पर्श के साथ टांग सीधा है। हस्त रीमर विभिन्न प्रकार के होते हैं

हैंड रीमर के प्रकार|types of hand reamer

1. समांतर रीमर|parallel reamer
2. टेपर रीमर | Taper reamer
3. समायोज्य रीमर | Adjustable reamer
4. एक्सपेंस रीमर | expansion reamer
5. पायलट रीमर | Polit reamer

समांतर रीमर|parallel reamer

इस प्रकार के रीमार की देह समांतर बनी होती है जिस पर सीधे या घुमावदार फ्लुट बने होते हैं
इस प्रकार के रीमार के निचले हिस्से पर हल्का सा पेपर बना होता है जिससे कि रीमिंग करते समय कार्य खंड में बने छेद में आसानी से बैठ जाएं और कार्य सरलता से शुरू किया जा सके

 टेपर रीमर | Taper reamer

इस प्रकार का रिमार एक मानक टेपर में बना होता है जिस पर सीधे या घुमावदार फ्लूट्स कटे होते हैं
इस प्रकार के रीमर जोड़े में पाई जाती है जिसमें एक रफ कार्य के लिए तथा दूसरा फिनिश कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है

 समायोज्य रीमर | Adjustable reamer

इस प्रकार के रीमर की देह में टेपर में स्लॉट बने होते हैं जिनमें टेपर में बने कर्तन ब्लेडों को फिट किया जाता है इस प्रकार के रिमर की देह पर दो नट लगे होते हैं जिनकी सहायता से कृतन ब्लेडो बोलेरो को समायोजित किया जा सकता है

 एक्सपेंस रीमर | expansion reamer

इस प्रकार के रीमर की देह में एक टेपर में छेद बना होता है जिसमें चूड़ियां कटी होती है और इसके देह(body) कटी(split) हुई होती है
इस प्रकार के रीमर के टेपर छेद में एक टेपर पलग फिट होता है टेपर प्लंग में भी चूड़ियां कटी होती है

 पायलट रीमर | Polit reamer

इस प्रकार का रिमर समांतर रीमर के समान होता है परंतु इसके निचले सिरे पर एक पायलट बना होता है जिससे एक सीध में रिमिंग करने में आसानी होती है

मशीन रीमर | Machine Reamer

ये हैंड रीमर के समान होते हैं, सिवाय इसके कि इनका एक टांग पतला होता है।
इस प्रकार के रीमर को चकिंग (chucking) रीमर भी कहते हैं

मशीन रीमर के प्रकार | Types of machine reamer

मशीन रीमर निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
1. रोज रीमर Rose reamer
2. शैल रीमर Shell reamer
3. मशीन ब्रिज रीमर Machine bridge reamer
4. मशीन जिग रीमर Machine jig reamer

रोज रीमर Rose reamer

इस प्रकार के रीमर के दांतो के निचले सिर को 45 डिग्री के कोण पर बेवल कर दिया जाता है जिससे कि निचला शिरा कर्तन का कार्य करता है

शैल रीमर | Shell reamer

सॉलिड रीमर (लगभग 20 मिमी व्यास तक या आमतौर पर एचएसएस से बने) बड़े रीमर की लागत को कम करने के लिए काटने वाले हिस्से को अलग शेल के रूप में बनाया जाता है जो कम लागत वाले स्टील से बने मानक शैंक्स पर लगाए जाते हैं। हालांकि ये रीमर बहुत कठोर नहीं होते हैं और गोले में दांत या प्लेट को और कम करके सीमेंटेड कार्बाइड के साथ टिप कर सकते हैं।

मशीन ब्रिज रीमर | Machine bridge reamer

इस प्रकार की रीमर का उपयोग पोर्टेबल इलेक्ट्रिक या न्यूमैट्रिक रीमिंग मशीन के द्वारा शिप बिल्डिंग और बनावट संबंधित कार्यों के लिए किया जाता है

मशीन जिग रीमर Machine jig reamer

इस प्रकार के रीमर की सैक और कर्तन कौर के बीच में एक गाइड बना होता है यह गाइड जिग कि बुश में फिट हो जाता है और फिर रीमिंग लोकेशन के अनुसार शुद्धता में होती है

रीमर का विनिर्देशन | specification of reamer

रीमर को काम में लेते समय निम्नलिखित विवरण का ध्यान रखा जाता है
1. रीमर का प्रकार
2. फ्लूट का प्रकार
3. रीमर का साइज
जैसे:- हस्त समांतर, सीधा फ्लूटेड 12mm रीमर

ड्रिलिंग और रीमिंग के बीच अंतर  | Difference Between Drilling and Reaming


एक ठोस सतह पर मैक्रो-स्केल छेद बनाने के लिए, फिनिश और सहिष्णुता स्तर की आवश्यकता के आधार पर विभिन्न मशीनिंग प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला की जाती  है| छेद की उत्पत्ति के लिए ड्रिलिंग की जाती है| विभिन्न स्तरों पर छेद की सतह को खत्म करने और आयामी सटीकता और सहनशीलता में सुधार करने के लिए रीमिंग किया जाता है। जिससे छेद परिष्कृत और सही मापदंड का बनता है

 

ड्रिलिंग एक पारंपरिक मशीनिंग प्रक्रिया है जो एक छेद उत्पन्न करने के लिए ठोस सतह में डुबकी लगाने के लिए दो-बांसुरी ड्रिल का उपयोग करती है। छेद का व्यास ड्रिल व्यास द्वारा सीमित है; वास्तव में, वे बराबर हैं। कभी-कभी छेद के व्यास को बड़ा करने के लिए ड्रिलिंग के बाद बोरिंग की जाती है। ये दोनों प्रक्रियाएं थोक निष्कासन की पेशकश करती हैं जो उच्च सामग्री हटाने की दर (MRR) को इंगित करती है। हालांकि, न तो ड्रिलिंग और न ही बोरिंग उच्च स्तर की आयामी सटीकता और सतह खत्म प्रदान कर सकते हैं। सतह की गुणवत्ता और सहनशीलता के स्तर में सुधार के लिए, कभी-कभी ड्रिलिंग या बोरिंग के बाद रीमिंग की जाती है। कभी-कभी असेंबली उद्देश्यों के लिए बहुत अधिक सटीकता और सख्त सहनशीलता की आवश्यकता होती है, खासकर प्रेस फिट या रिसाव-सबूत में शामिल होने में। रीमिंग प्रक्रिया आयामी सटीकता और सहनशीलता में सुधार करने के लिए बहुत कम मात्रा में सामग्री को हटाने के लिए एक बहु-बिंदु कटर (रीमर कहा जाता है) का उपयोग करती है। चूंकि रीमिंग छेद की सतह को चिकना करता है, इसलिए रीमिंग के लिए एक छेद पूर्वापेक्षा है, और इस प्रकार ड्रिलिंग से पहले ड्रिलिंग की जानी चाहिए। हमेशा की तरह रीमिंग से ड्रिलिंग की तुलना में बेहतर सतह खत्म होती है। निम्नलिखित खंड ड्रिलिंग और रीमिंग के बीच विभिन्न समानताओं और अंतरों  को स्पष्ट करते हैं

एक ठोस सतह पर एक छेद उत्पन्न करने के लिए ड्रिलिंग की जाती है। मौजूदा छेद की आंतरिक सतह को खत्म करने के लिए रीमिंग की जाती है।

ड्रिलिंग छेद बनाने का पहला चरण है। ड्रिलिंग के बाद आवश्यकता के आधार पर या तो बोरिंग या रीमिंग की जा सकती है। छेद होने पर ही रीमिंग की जा सकती है। इसलिए रीमिंग ड्रिलिंग (या बोरिंग) के बाद ही की जाती है।

ड्रिलिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले कटिंग टूल को ड्रिल कहा जाता है। रीमिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले कटिंग टूल को रीमर कहा जाता है।

मेटल कटिंग ड्रिल में आमतौर पर दो कटिंग एज होते हैं। इसलिए ड्रिल को डबल पॉइंट कटिंग टूल माना जाता है। रीमर में बड़ी संख्या में काटने वाले किनारे होते हैं । तो रीमर एक बहु-बिंदु काटने वाला उपकरण है।

एक ड्रिल किए गए छेद की सतह अत्यधिक समाप्त नहीं होती है (यानी उच्च सतह खुरदरापन)। छिद्रों की आंतरिक सतह को अत्यधिक खत्म करने (अर्थात खुरदरापन को कम करने) के लिए रीमिंग की जाती है।

अकेले ड्रिलिंग ऑपरेशन से सख्त सहिष्णुता प्राप्त नहीं की जा सकती है। कभी-कभी असेंबली के लिए सख्त सहनशीलता की आवश्यकता होती है, खासकर प्रेस फिट अनुप्रयोगों के लिए। रीमिंग आसानी से सख्त सहनशीलता प्रदान कर सकता है।

ड्रिलिंग ऑपरेशन द्वारा छेद की अक्षीय लंबाई को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। छेद की अक्षीय लंबाई को रीमिंग द्वारा बदला नहीं जा सकता है। केवल छेद का व्यास थोड़ा बढ़ाया जा सकता है।


ड्रिलिंग और रीमिंग के बीच समानताएं |simlarity Between Drilling and Reaming



ड्रिलिंग और रीमिंग दोनों प्रक्रियाएं होल फैब्रिकेशन से जुड़ी हैं।

दोनों प्रक्रियाओं को पारंपरिक मशीनिंग या धातु काटने के संचालन के रूप में माना जाता है। तो यहां एक काटने का उपकरण चिप्स के रूप में इसे हटाने के लिए वर्कपीस सामग्री की एक पतली परत को संपीड़ित करता है।

दोनों प्रक्रियाएं घटिया निर्माण दृष्टिकोण (या टॉप-डाउन दृष्टिकोण) के अंतर्गत आती हैं क्योंकि अतिरिक्त सामग्री की परतें धीरे-धीरे ठोस रिक्त स्थान से हटा दी जाती हैं। यह एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग दृष्टिकोण के विपरीत है जहां 3-डी घटक के निर्माण के लिए परत दर परत सामग्री को एक दूसरे के ऊपर जोड़ा जाता है।

चिप्स दोनों प्रक्रियाओं में निहित हैं क्योंकि चिप्स के रूप में सामग्री को हटा दिया जाता है।

गर्मी उत्पन्न करना, गड़गड़ाहट का निर्माण और अवशिष्ट तनाव भी दोनों प्रक्रियाओं में निहित हैं; हालांकि, स्तर अलग हैं। यदि आवश्यक हो तो दोनों प्रक्रियाओं में तरल पदार्थ काटना भी लागू किया जा सकता है।



Drills and Drilling Operations | ड्रिल और ड्रिलिंग संचालन

 Drills and Drilling Operations | ड्रिल और ड्रिलिंग संचालन

ड्रिलिंग वह प्रक्रिया है जो आमतौर पर मशीनी छेद बनाने से जुड़ी होती है यह प्रक्रिया इसलिए भी अधिक प्रचलित है क्योंकि यह सरल, त्वरित और किफायती है।

Drill, drilling tools
Drill


फिटर मशीनिस्ट और टर्नर ट्रेड की आईटीआई स्टूडेंट के लिए यह औजार काफी महत्वपूर्ण है
ड्रिलिंग सबसे जटिल मशीनिंग प्रक्रियाओं में से एक है। इसकी मुख्य विशेषता जो इसे अन्य मशीनिंग संचालन से अलग करती है, ड्रिल के केंद्र में छेनी के किनारे पर धातु की संयुक्त कटाई और बाहर निकालना इसकी प्रमुख विशेषताएं है। अधिक गति के कारण होने वाला उच्च-जोर बल पहले छेनी के किनारे के नीचे धातु को बाहर निकालता है। फिर यह एक नकारात्मक रेक कोण उपकरण की कार्रवाई के तहत कटाई की क्रिया करता है।

ट्विस्ट ड्रिल का नामकरण (Nomenclature of a Twist Drill)

यह ड्रिल के होठों के साथ काटने की क्रिया अन्य मशीनिंग प्रक्रियाओं के विपरीत नहीं है बल्कि चर रेक कोण और झुकाव के कारण इसका नाम ट्विस्ट ड्रिल रखा गया हालांकि, कटिंग किनारों पर विभिन्न रेडी में काटने की क्रिया में अंतर हैं। यह चिप के साथ किसी भी बिंदु पर चिप प्रवाह पर पूरे चिप की बाधा द्वारा जटिल है। फिर भी, धातु हटाने की क्रिया सही कटिंग है, और चर ज्यामिति और बाधा की समस्याएं मौजूद हैं। क्योंकि यह कुल ड्रिलिंग ऑपरेशन का इतना छोटा हिस्सा है, हालांकि, यह प्रक्रिया की एक विशिष्ट विशेषता नहीं है बल्कि इस प्रक्रिया में यह धातु को सीतलन करने का कार्य भी करता है

ड्रिलिंग में प्रयुक्त मशीन सेटिंग्स इस छेद-उत्पादक ऑपरेशन की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं को प्रकट करती हैं। कट की गहराई, अन्य काटने की प्रक्रियाओं में एक मौलिक आयाम, ड्रिल त्रिज्या के सबसे निकट से मेल खाती है। तथा ड्रिल किया गया चित्र सटीक एवं नियमित आयाम का होता है  विकृत चिप चौड़ाई ड्रिल होंठ की लंबाई के बराबर होती है, जो बिंदु कोण के साथ-साथ ड्रिल आकार पर भी निर्भर करती है। किसी दिए गए सेट-अप के लिए, गैर-विकृत चिप चौड़ाई ड्रिलिंग में स्थिर है। ड्रिलिंग के लिए निर्दिष्ट फ़ीड आयाम स्पिंडल की प्रति क्रांति फ़ीड है। प्रति होंठ फ़ीड एक अधिक मौलिक मात्रा है। सामान्य दो-बांसुरी ड्रिल के लिए, यह प्रति चक्कर आधा फीड है। गैर-विकृत चिप मोटाई बिंदु कोण के आधार पर फ़ीड प्रति होंठ से भिन्न होती है।

ड्रिलिंग मशीन के स्पिंडल की गति किसी भी एक ऑपरेशन के लिए स्थिर होती है, जबकि काटने की गति सभी कटाई के किनारे बदलती रहती है। काटने की गति आमतौर पर बाहरी व्यास के लिए गणना की जाती है। छेनी के किनारे के केंद्र में काटने की गति शून्य होती है; होंठ पर किसी भी बिंदु पर यह उस बिंदु के त्रिज्या के समानुपाती होता है। काटने के किनारों के साथ गति काटने में यह भिन्नता ड्रिलिंग की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

एक बार जब ड्रिल वर्कपीस को संलग्न कर लेता है, तो संपर्क तब तक जारी रहता है जब तक कि ड्रिल भाग के नीचे से टूट न जाए या छेद से वापस न ले लिया जाए। इस संबंध में, ड्रिलिंग मोड़ जैसा दिखता है और मिलिंग के विपरीत है। निरंतर काटने का मतलब है कि ड्रिल और वर्कपीस के बीच संपर्क के तुरंत बाद स्थिर बलों और तापमान की उम्मीद की जा सकती है।

ड्रिल: (Drill)

ड्रिल छेद बनाने के लिए एक एंड-कटिंग टूल है। इसमें एक या अधिक कटिंग एज होते हैं, और फ्लूड्स को प्रवेश करने और चिप्स को बाहर निकालने की अनुमति देने के लिए बांसुरी होती है। ड्रिल एक टांग, शरीर और बिंदु से बना है।
जहां से इसका साइज लिया जाता है

शंक: (Shank)

टांग उस ड्रिल का वह हिस्सा है जो आयोजित और संचालित होता है। यह सीधा या पतला हो सकता है

तांग:( Tang)

टांग टांग के सिरे पर एक चपटा हिस्सा होता है जो मशीन के धुरी पर ड्रिल होल्डर के ड्राइविंग स्लॉट में फिट हो जाता है जिससे पकड़ मजबूत होती है

शरीर:(Body)

 ड्रिल का शरीर टांग से बिंदु तक फैला होता है, और इसमें फ्लूट कटी होती है  तेज करने के दौरान, यह ड्रिल का शरीर है जो आंशिक रूप से जमीन से दूर है।

पॉइंट: (Point)


पॉइंट खांचे होते हैं जो ड्रिल के शरीर में काटे जाते हैं या बनते हैं ताकि तरल पदार्थ बिंदु तक पहुंच सकें और चिप्स वर्कपीस की सतह तक पहुंच सकें। हालांकि कुछ मामलों में सीधे बांसुरी का उपयोग किया जाता है, वे सामान्य रूप से पेचदार होते हैं ऐसा कुछ सर्किल आकार भी होते

भूमि:( Flutes)

बांसुरी काटने के बाद भूमि ड्रिल बॉडी के बाहर का शेष भाग है। निकासी प्रदान करने के लिए बाहरी ड्रिल व्यास से कुछ हद तक जमीन काटा जाता है।

मार्जिन:(Margin)

 मार्जिन भूमि का एक छोटा हिस्सा है जो निकासी के लिए दूर नहीं है। यह पूर्ण ड्रिल व्यास को बरकरार रखता है।

वेब:(Web)

 वेब ड्रिल बॉडी का केंद्रीय भाग है जो भूमि को जोड़ता है।


छेनी की धार:(Chisel edge)

 वेब के साथ टूल पॉइंट पर स्थित किनारे की जमीन को छेनी की धार कहा जाता है। यह कटे होठों को जोड़ता है।

होंठ:(Lips)

 होंठ ड्रिल के प्राथमिक काटने वाले किनारे हैं। वे छेनी बिंदु से ड्रिल की परिधि तक विस्तारित मे होते हैं।

अक्ष:(Axis)

 ड्रिल की धुरी उपकरण की केंद्र रेखा है। यह वेब के माध्यम से चलता है और व्यास के लंबवत होता है

गर्दन:(Neck)

ड्रिल के कुछ अभ्यास शरीर और टांग के बीच एक राहत वाले हिस्से के साथ किए जाते हैं। इसे ड्रिल नेक कहा जाता है। ड्रिल के विभिन्न भागों को परिभाषित करने वाली इन शर्तों के अलावा, कई ऐसे पद हैं जो ड्रिल के आयामों पर लागू होते हैं, जिसमें महत्वपूर्ण ड्रिल कोण भी शामिल हैं। इन शर्तों में से एक हैं

लंबाई:(Length)

 ड्रिल के बाहरी व्यास के साथ, ड्रिल का आकार दिए जाने पर ड्रिल की अक्षीय लंबाई सूचीबद्ध होती है। इसके अलावा, टांग की लंबाई, बांसुरी की लंबाई और गर्दन की लंबाई अक्सर उपयोग की जाती है।

शरीर के व्यास की निकासी:(Body diameter clearance)

 हाशिये से जमीन तक के कदम की ऊंचाई को शरीर के व्यास की निकासी कहा जाता है।

हेलिक्स कोण:(helix angle)

ड्रिल के भूमि का प्रमुख किनारा ड्रिल अक्ष के साथ बनाता है जिसे हेलिक्स कोण कहा जाता है। विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं के लिए विभिन्न हेलिक्स कोणों के साथ अभ्यास उपलब्ध हैं।

बिंदु कोण:(Point angle)

 ड्रिल होठों के बीच शामिल कोण को बिंदु कोण कहा जाता है। यह विभिन्न वर्कपीस सामग्री के लिए विविध है। अलग अलग धातु के लिए अलग-अलग एगल प्रयोग की हैं

लिप रिलीफ एंगल:(Lip relief angle)

एक ड्रिल टूल पर अन्य टूल्स पर पाए जाने वाले सामान्य रिलीफ एंगल के अनुरूप लिप रिलीफ एंगल होता है। इसे परिधि पर मापा जाता है।

छेनी का किनारा कोण:(Chisel edge angle)

 छेनी का किनारा कोण होंठ और छेनी के किनारे के बीच का कोण है, जैसा कि ड्रिल के अंत से देखा जाता है।

ड्रिल के प्रकार(types of Drills)

विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए अभ्यास के विभिन्न वर्ग हैं। वर्कपीस सामग्री इस्तेमाल किए गए ड्रिल के वर्ग को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह आमतौर पर काम के लिए सबसे उपयुक्त सामान्य प्रकार की ड्रिल के बजाय बिंदु ज्यामिति को निर्धारित करती है। ट्विस्ट ड्रिल सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है। ट्विस्ट ड्रिल के सामान्य वर्ग के भीतर विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन के लिए कई प्रकार के ड्रिल प्रकार होते हैं।

हेवी-ड्यूटी ड्रिल्स:(Heavy-duty drills)

 इस प्रकार की ड्रिल में गंभीर तनावों के अधीन अभ्यास, वेब मोटाई बढ़ाने जैसे तरीकों से मजबूत बनाया जा सकता है।

लेफ्ट हैंड ड्रिल:(Left hand drills)

 स्टैंडर्ड ट्विस्ट ड्रिल को लेफ्ट हैंड टूल के रूप में बनाया जा सकता है। इनका उपयोग कई ड्रिल हेड्स में किया जाता है जहाँ स्पिंडल को अलग-अलग दिशाओं में घुमाने की अनुमति देकर हेड डिज़ाइन को सरल बनाया जाता है।

क्रैंकशाफ्ट ड्रिल:(Crankshaft drills)

 विशेष रूप से क्रैंकशाफ्ट काम के लिए डिज़ाइन किए गए ड्रिल कठिन सामग्री में गहरे छेद मशीनिंग के लिए उपयोगी पाए गए हैं। उनके पास एक भारी वेब और हेलिक्स कोण है जो सामान्य से कुछ अधिक है में प्रयोग की जाती है

स्टेप ड्रिल:(Step drill)

 इस प्रकार के ड्रिल स्टेप्ड डायमीटर के साथ एक छेद बनाने के लिए ट्विस्ट ड्रिल पर दो या दो से अधिक डायमीटर ग्राउंड हो सकते हैं।

फ्लैट ड्रिल:(flat drill)

 फ्लैट बार को अंत में एक पारंपरिक ड्रिल पॉइंट के साथ ग्राउंड किया जा सकता है। यह बहुत बड़े चिप स्थान देता है, लेकिन कोई हेलिक्स नहीं। उनका प्रमुख अनुप्रयोग रेल ट्रैक की ड्रिलिंग के लिए है।

थ्री- और फोर-फ्लूटेड ड्रिल्स:(Three- and four-fluted drills)

 तीन या चार बांसुरी वाली ड्रिल्स हैं जो स्टैंडर्ड ट्विस्ट ड्रिल्स से मिलती-जुलती हैं, सिवाय इसके कि उनके पास कोई छेनी का किनारा नहीं है। उनका उपयोग उन छेदों को बड़ा करने के लिए किया जाता है जिन्हें पहले ड्रिल या छिद्रित किया गया है। इन अभ्यासों का उपयोग किया जाता है क्योंकि वे एक मानक ड्रिल की तुलना में एक ही काम पर बेहतर उत्पादकता, सटीकता और सतह खत्म करते हैं।

ड्रिल और काउंटरसिंक:(Drill and countersink)

 एक संयोजन ड्रिल और काउंटरसिंक मशीनिंग के लिए "सेंटर होल" मशीनिंग के लिए एक उपयोगी उपकरण है जिसे बार में घुमाया जाता है या केंद्रों के बीच रखा जाता है। इस उपकरण का अंत एक मानक ड्रिल जैसा दिखता है। काउंटरसिंक शरीर पर थोड़ी दूरी पर वापस शुरू होता है।

ठोस कार्बाइड ड्रिल:(Solid carbide drills)

 हल्के मिश्र धातुओं और अधातु सामग्री में छोटे छेदों की ड्रिलिंग के लिए, ठोस कार्बाइड की छड़ें मानक ड्रिल ज्यामिति के आधार पर हो सकती हैं। बिना झटके के लाइट कट लेना चाहिए क्योंकि कार्बाइड काफी भंगुर होता है और इनके टूटने का खतरा बना रहता है

संबंधित ड्रिलिंग ऑपरेशन (Related Drilling Operations)

ड्रिलिंग मशीन ऑपरेशन कई ऑपरेशन ड्रिलिंग से संबंधित हैं। निम्नलिखित सूची में, सेंटरिंग और स्पॉटफेसिंग को छोड़कर अधिकांश ऑपरेशन ड्रिलिंग का पालन करते हैं, जो ड्रिलिंग से पहले होते हैं। पहले ड्रिलिंग द्वारा एक छेद बनाया जाना चाहिए और फिर छेद को अन्य कार्यों में से एक द्वारा संशोधित किया जाना चाहिए। इनमें से कुछ ऑपरेशन नीचे दिए गए हैं। देखते हैं ड्रिलिंग संबंधित अन्य संक्रियाएं

रीमिंग:(reaming)

 एक रिएमर (Reamar)का उपयोग पहले से ड्रिल किए गए छेद को बड़ा करने के लिए किया जाता है, उच्च सहिष्णुता प्रदान करने और छेद की सतह खत्म करने के लिए। इसका प्रयोग किया जाता है|

टैपिंग: (tipping)

 पहले से ड्रिल किए गए छेद पर आंतरिक धागे (आंतरिक चूड़ी) प्रदान करने के लिए एक टैप का उपयोग किया जाता है।

काउंटरबोरिंग:(counterboring)

 काउंटरबोरिंग एक छेद में एक बड़ा कदम पैदा करता है ताकि बोल्ट सिर को भाग की सतह के नीचे बैठाया जा सके। और बोल्ट लगने के बाद भी जॉब की सतह परिष्कृत बनी रहे

काउंटरसिंकिंग:(Countersinking)

 काउंटरसिंकिंग काउंटरबोरिंग के समान है, सिवाय इसके कि सतह के नीचे फ्लैट-हेड स्क्रू को बैठने की अनुमति देने के लिए चरण कोणीय है। के लिए काउंटर इस किंग का उपयोग किया जाता है

केंद्रीकरण:(Centering)

 बाद में ड्रिल किए जाने वाले छेद का सटीक पता लगाने के लिए केंद्र ड्रिलिंग का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में सेंटर पंच का भी उपयोग किया जाता है

स्पॉटफेसिंग:(Spotfacing)

 स्पॉटफेसिंग का उपयोग किसी हिस्से पर एक सपाट-मशीनीकृत सतह प्रदान करने के लिए किया जाता है।

संचालन की शर्तें(Operating Conditions)

 - अलग-अलग स्थितियां, जिनके तहत ड्रिल का उपयोग किया जाता है, गति और फ़ीड के लिए निर्धारित नियम देना मुश्किल बना देता है। ड्रिल निर्माता और विभिन्न संदर्भ ग्रंथ विभिन्न सामग्रियों की ड्रिलिंग के लिए उचित गति और फ़ीड के लिए सिफारिशें प्रदान करते हैं। जो कि अलग-अलग पदार्थ के लिए अलग-अलग होते हैं इसी को मद्देनजर रखते हुए ड्रिल और ड्रिल मशीन का संचालन किया जाता है

What is the work of ITI fitter? |आईटीआई फिटर का क्या काम है?

 आईटीआई फिटर का कार्य

आईटीआई फिटर का कार्य बहुत ही व्यापक है वह व्यक्ति जो फिटर से आईटीआई पास किया उस का कार्यभार तथा उसके कार्य का विभाजन बड़े पैमाने पर किया जाता है फिटर वही व्यक्ति होता है जो किसी भी मशीन पार्ट्स या ऐसे सीरीज को फिट करने का कार्य करता है फिटर की कार्य भी बहुत अधिक होती हैं अलग-अलग कार्य के लिए अलग-अलग फिटर की आवश्यकता होती है

जैसे-  डाई के लिए डाई फिटर 

असेंबली के लिए असेंबलिंग फिटर 

पाइप फिटिंग के लिए पाइप फिटर

मेंटेनेंस कार्य के लिए मेंटेनेंस फिटर

फिटर के कार्य|fitter work

1 फिटर का कार्य होता है किसी भी पार्ट को फिट करना तथा किसी खराब हुई या बंद पड़ी हुई मशीन के पार्ट्स को खोलना तथा उनकी सफाई करके खराब पार्ट का पता लगाकर उसकी जगह पर नए पुर्जे डालकर मशीन को चालू करें
इसी के साथ मशीन के रखरखाव तथा उसके संचालन का पूर्ण भार एक फिटर के कंधों पर होता है

औद्योगिक संस्थानों में आईटीआई फिटर पास व्यक्ति इन सभी कार्यों को बड़े ही आसानी से करता है

क्योंकि आईटीआई के दौरान फिटर को सभी हस्त औजारों तथा मशीनिंग सन क्रियाओं के बारे में भली-भांति अवगत कराया जाता है

आईटीआई फिटर को बड़े औद्योगिक इकाइयों में मशीन ऑपरेटर के रूप में भी देखा जाता है जहां वह अपनी कार्यकुशलता से सभी प्रकार की आधुनिक एवं पौराणिक मशीनों का संचालन भली-भांति करता है आईटीआई फिटर से पास कारीगर सीएनसी मशीन ओं तथा विभिन्न प्रकार की मैथ मशीनों की ऑपरेटर बड़ी आराम से कर लेता है

चित्र से आईटीआई करने वाला व्यक्ति बड़े ही जुझारू किस्म का व्यक्ति होता है जो कि बिना थके बिना रुके लगातार अपने कार्य को करता रहता है 

फिटर के अन्य कार्य

फिटर के और अन्य कार्य भी होती हैं जैसे रेती चलाना ड्रिलिंग मशीन चलाना सत्य परिष्करण के लिए सरफेस ग्राइंडर तथा वेल्डिंग जैसे कार्यक्षेत्र बड़ी निपुणता के साथ करता है

फिटर से आईटीआई पास व्यक्ति ड्राइंग को भलीभाति पड़ सकता है तथा ड्रॉइंग के अनुसार कोई भी पार्ट्स का निर्माण कर सकता है

फिटर अपने कार्य का 75% कार्य हाथ के द्वारा तथा शेष 25% कार्य मशीनों के द्वारा करता है

फिटर अपने कार्य को सही एक्यूरेसी एवं मापदंड प्रदान करता है जिससे जॉब रक्षा एवं सटीक बनता है

फिटर के कार्य

फाइलिंग
पंचिंग
हेक्सा
हैमरिंग
ड्रिलिंग
रिमिंग
कटिंग
ग्राइंडिंग
ड्रिफ्टिंग
सतह परिष्कृत



What is salary after ITI | आईटीआई के बाद कितनी सैलरी मिलती है

 आईटीआई के बाद कितनी सैलरी मिलती है

आईटीआई करने वाले सभी स्टूडेंट तथा आईटीआई कर रही सभी विद्यार्थियों के मन में बार-बार एक ही सवाल उत्पन्न होता है कि अगर आईटीआई पास करने के बाद हमें कोई औद्योगिक संस्थान कितना वेतन प्रदान करेगा आज हम इस बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे जानेंगे आईटीआई के महत्व के बारे में तथा आईटीआई पास करने के बाद मिनिमम और मैक्सिमम कितनी सैलरी एक आईटीआई होल्डर खुद ही जाती है इंडिया में वैसे तो सभी औद्योगिक इकाइयो में आईटीआई की महत्वता तथा उसके उज्जवल भविष्य की कामना हर विद्यार्थी करता है लेकिन क्या सभी विद्यार्थियों को यह सभी आईटीआई पास विद्यार्थियों को एक अच्छी सैलरी का पैकेज औद्योगिक संस्थानों से प्राप्त होता है साथी हम यह भी चर्चा करेंगे कि आईटीआई पास करने के बाद किन किन संस्थानों में अच्छी सैलरी में नौकरी पा सकते हैं

आईटीआई के बाद सैलरी

माना जाता है कि आईटीआई करने के बाद सभी औद्योगिक संस्थानों में आईटीआई होल्डर व्यक्ति की आवश्यकता होती है तथा एक कुशल कारीगर के रूप में वह अच्छी खासी कमाई भी करता है साथ ही साथ में एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाता है लेकिन जैसा कि हमने बताया हम सभी विद्यार्थियों का भविष्य आईटीआई करने के बाद उज्जवल नहीं हो पाता है वहीं कुछ विद्यार्थी आईटीआई पास करने के बाद एक अच्छे पैकेज पाने में कामयाब होते हैं

आईटीआई करने के उपरांत औसत वेतन

अगर भारत की बात करें तो आईटीआई करने के उपरांत आईटीआई स्टूडेंट्स को औसत वेतन लगभग 10 से 15000 प्रतिमा प्राप्त होता है लेकिन कुछ कारणवश या औद्योगिक संस्थानों में हो रहे ठेकेदारी प्रथा के चलन के तहत शुरुआती दिनों में एक आईटीआई पास विद्यार्थियों को 7 से ₹10000 प्रति माह प्राप्त होते हैं

अप्रेंटिस करने के बाद वेतन

जहां तक बात करें आईटीआई पास करने की तो ज्यादातर स्टूडेंट आईटीआई पास करके औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों या अन्य औद्योगिक इकाइयों में जॉब के लिए अप्लाई करते हैं तथा जॉब करने लगती है शुरुआती दिनों में उनको कम वेतन प्राप्त होता है तथा कुछ विद्यार्थी जो 3 से 4 वर्ष का अनुभव प्राप्त कर लेते हैं तथा अपने जॉब के प्रति सजग और जागरूक रहते हैं उन्हें बाद में धीरे-धीरे अच्छे पैकेज मिलने शुरू हो जाते हैं लेकिन अप्रेंटिस करने वाले विद्यार्थियों को उससे भी अच्छा वेतन प्राप्त होता है क्योंकि अप्रेंटिस करने के बाद वह व्यक्ति जो आईटीआई पास है एक अकुशल कारीगर होता है जबकि अप्रेंटिस करने के उपरांत में एक कुशल कारीगर बन जाता है इसी के साथ उसे अच्छे वेतन में जॉब मिलने की संभावना ज्यादा रहती हैं भारतीय वेज के अनुसार कुशल कारीगर का वेतन एक कुशल कारीगर के वेतन से अधिक होता है तथा कुशल कारीगर का वेतन सर्वोपरि वेतन माना जाता है इसलिए अप्रेंटिस पास विद्यार्थी को अधिक वेतन पर जो पाना आसान होता है तथा वह अपनी कुशलता के फल स्वरूप अपनी तरक्की के रास्ते भी खोज लेता है

अप्रेंटिस पास विद्यार्थी का औसत वेतन

जैसा कि हम सब जानते हैं अप्रेंटिस हमने जिस कंपनी के जिस संस्थान से की है यह अप्रेंटिस  करते वक्त हमने जो काम सीखा है उसी से संबंधित औद्योगिक इकाई में अगर काम किया जाए तो वहां पर हमें अप्रेंटिस के पेज पर एक कुशल कारीगर की तौर पर रखा जाता है तथा हमें अधिक वेतन दिया जाता है
भारत में अप्रेंटिस  विद्यार्थियों का औसत वेतन लगभग 13000 से 18000 माना जाता है
लेकिन मेरे श्याम की की गई अनुभव के आधार पर अगर देखा जाए तो बढ़ती बेरोजगारी के चलते यह वेतन लगभग 12 से 15000 तक ही सिमट कर रह गया है
फिर भी एक अप्रेंटिस पास व्यक्ति को एक कुशल कारीगर के तौर पर रखा जाता है तथा उसके तरक्की की राह आसान होती है अगर अप्रेंटिस पास व्यक्ति को अप्रेंटिस के बलबूते जॉब पाने में कामयाबी मिलती है तो वह एक अच्छी इनकम पा सकता है तथा भविष्य मैं उज्जवल भविष्य की ओर कदम रखते हुए एक अच्छी पोस्ट भी पा लेता है

उच्च वेतन के लिए कौन सा आईटीआई कोर्स सबसे अच्छा है?(Which ITI course is best for high salary?)

वैसे तो सभी आईटीआई कोर्स अच्छे ही होते हैं किंतु अधिक वेतन पाने के लिए कुछ अच्छे आईटीआई ट्रेड्स जिन की आवश्यकता प्रत्येक इंडस्ट्री में अधिक पैमाने पर होती है
इसके लिए मैं आपको सलाह दूंगा वह कोर्स जो 2 वर्ष की अवधि का हो उसी ट्रेड से आईटीआई करना अच्छा माना जाता है क्योंकि जब 2 साल तक एक आईटीआई ट्रेड के बारे में जानते है तो हमें उसका अच्छा अनुभव होता है तथा औद्योगिक संस्थानों में उसकी अधिक आवश्यकता भी होती है इसलिए 2 वर्ष की अवधि वाला आईटीआई ट्रेड ही अच्छा माना जाता है जिस ट्रेड की प्रशिक्षण अवधि अधिक होती है उसका कार्य क्षेत्र भी उतना ही अधिक होता है इसलिए हमें ज्यादा अवधि के कोर्स को करना ज्यादा उचित समझा जाता है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि कम समय अवधि वाली आईटीआई ट्रेड की महत्वता नहीं होती है कुछ ट्रेड हैं चीन की महत्वता बहुत अधिक है तथा आईटीआई ट्रेड को करने की समय अवधि 6 महीने 1 वर्ष है
जैसे डीजल मैकेनिक 
आज का युग ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का युग है जिसमें डीजल मैकेनिक की आवश्यकता बहुत अधिक पैमाने पर होती है एक डीजल मैकेनिक ही इंजन के पार्ट्स और उसकी मरम्मत को अच्छे ढंग से समझ कर कर पाता है इसलिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग से संबंधित व्यवसायिक संस्थानों तथा औद्योगिक संस्थानों में एक डीजल मैकेनिक की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है

2 साल की अवधि वाले आईटीआई ट्रेड

2 साल की अवधि में पूरे होने वाले आईटीआई ट्रेड अनेक है लेकिन इनमें से भी कुछ ऐसे ट्रेड हैं जिनकी आवश्यकता औद्योगिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर होती है तथा इनका कार्य क्षेत्र बाहर भी अधिक होता है इसलिए इन ट्रेड से आईटीआई करनी पर जल्दी और आसानी से नौकरी मिलने की संभावना ज्यादा होती है
जैसे - इलेक्ट्रिशियन फिटर टर्नर मशीनिस्ट आदि

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 आईटीआई उपकरण(ITI TOOLS)

हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे आईटीआई करने पर कौन-कौन से उपकरण प्रयोग मे लीए जाते हैं
वह कौन से उपकरण हैं जिनको आईटीआई का कोर्स करते वक्त पढ़ना बहुत जरूरी होता है आईए इसकी विस्तार से चर्चा करते हैं

आईटीआई करने वाले व्यक्ति को कई प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं जैसे कि ड्रिलिंग,मिलिंग,टर्निंग, कटिंग्स, रिमिंग इत्यादि. तो इन सभी कार्यों को करने के लिए अलग-अलग प्रकार के औजारों की आवश्यकता पड़ती है जैसे कि कार्य खंड को पकड़ना, तारों को काटना, पाइप फिटिंग इत्यादि, तो कौन से काम को करने के लिए किस प्रकार के औजार की आवश्यकता होती है आज की इस पोस्ट में आपको इसी के बारे में जानने को मिलेगा.

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कार्य खंड को पकड़ने वाले औजार: 

सबसे पहले इन्हें औजारों की बात करते हैं जो कि जॉब को पकड़ के रखने में मदद करते हैं किसी भी कार्यक्रम को पकड़ने के लिए वॉइस का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कार्य कांड मजबूती से पकड़ा जा सके और उस पर किसी प्रकार का कोई भी कार्य करने पर वह बिल्कुल भी ना हिले वॉइस कई प्रकार के होते हैं जिनकी जानकारी इस प्रकार है

वाईस(Vice)

वाईस का प्रयोग प्रायः जॉब को रेतने (Filing), हैक्सा से धातु को काटने (Sawing), चुड़ी काटने (Threading), छैनी से धातु छिलने (Chipping) तथा अन्य कार्यों के लिए कार्यखंड को पकड़ने के लिए किया जाता है

वॉइस के प्रकार | types of voice

वॉइस मुख्यतः प्रकार की होती है निम्न प्रकार हैं-
1.-बैंच वाईस (Bench Vice)
2.-शीघ्रता से खुलने वाले वाइस (Quick Releasing Vice)
3-.पाइप वाइस (Pipe Vice)
4.-दस्ती वाइस (Hand Vice)
5.-पिन वाइस (Pin Vice)
6.-टूल मेकर्स वाइस (Tool Makers Vice)
7.-लैग वाइस (Leg Vice)
8.-मशीन वाइस (Machine Vice)

वॉइस के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें

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चोट मारने वाले औजार-

आईटीआई का कोर्स करते वक्त हमें चोट मारने वाले औजारों के बारे में जानना बहुत जरूरी होता है सबसे अधिक चोट मारने में प्रयुक्त होने वाला हो जा रहे हैं हथोड़ा जिसे हैमर के नाम से भी जाना जाता है आइए देखते हैं इनके बारे में


हथोड़ा (hammer)

हथौड़ा एक चोट मारने वाला औजार है। जिसके द्वारा विभिन्न कार्य किये जाते है। 

हथौड़े के प्रयोग (Uses Of Hammer) 

 हथौड़ा एक चोट मारने वाला औजार  है। जिसके द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाते हैं  जो इस प्रकार हैं
1.पचिंग (Punching)
2.मोड़ना (Bending)
3.सीधा करना (Straightening)
4.चिपिंग करना (Chipping)
5.फोर्जिग (Forging)
6.रिवेटिंग (Riveting)

हथौड़े के भाग|parts of hammer

हथौड़े के भाग इस प्रकार हैं
1.फलक (Face)
2.पीन (Pein)
3.चीक (Cheek)

4.नेत्र छिद्र (Eye Hole)

संपूर्ण जानकारी के लिए कृपया यहां क्लिक करें

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