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फ्रोस्टिंग और प्रोटेक्टिव कोटिंग क्या है

 

दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे फ्रोस्टिंग और प्रोटेक्टिव कोटिंग क्या है| फ्रोस्टिंग संक्रिया, प्रोटेक्टिव कोटिंग के प्रकार, अस्थाई कोटिंग, अर्ध स्थाई कोटिंग, और स्थाई कोटिंग के बारे में विस्तारपूर्वक जानेंगे |

फ्रोस्टिंग(frosting)

फ्रोस्टिंग एक ऐसी संक्रिया(operation) है जिसके द्वारा जॉब की बाहरी सपाट सतह को चमकदार बनाया जाता है|
और नरम पदार्थ की बनी पिन तथा एमरी का प्रयोग करके गोलाकार के स्पोर्ट बनाए जाते हैं|

फ्रोस्टिंग संक्रिया (frosting operation)

फ्रोस्टिंग करने के लिए एक नरम पदार्थ की पिन को ड्रिलिंग मशीन के ड्रिल चक में बांध लिया जाता है |
जिस जॉब या कार्य खंड पर फ्रोस्टिंग करनी होती है उसे मशीन की मेज(table) के साथ बांध दिया जाता है और उस पर एमरी पेस्ट का लेप कर दिया जाता है|
इसके बाद मशीन को चालू करके पिन का हल्का सा दबाव कार्य खंड या जॉब पर दिया जाता है| जिससे जॉब या कार्यखंड पर गोल आकार के सपोर्ट बन जाते हैं |
इस प्रकार जॉब की पोजीशन बदलकर पूरे जॉब पर गोल आकार के स्पोर्ट बना लिए जाते हैं|
इस क्रिया को करने से सतह पर चमक बढ़ती है और देखने में यह अच्छी भी लगती है|

प्रोटेक्टिव कोटिंग (protective coating)

इसी जॉब या कार्य खंड को हवा और पानी के प्रभाव से बचाने के लिए कुछ उपचार किए जाते हैं, जिन्हें प्रोटेक्टिव कोटिंग कहा जाता है|
प्रोटेक्टिव कोटिंग करने के पश्चात जॉब या कार्यखंड पर जंग नहीं लगता है और जॉब की सतह देखने में सुंदर और आकर्षक लगती है|

प्रोटेक्टिव कोटिंग के प्रकार (types of protective coatings)

प्रोटेक्टिव कोटिंग मुख्यतः तीन प्रकार की होती है|
1. अस्थाई कोटिंग (temporary coating)
2. अर्ध स्थाई कोटिंग (semi permanent coating)
3. स्थाई कोटिंग (permanent coating)

1. अस्थाई कोटिंग (temporary coating)

इस प्रकार की कोटिंग जॉब पर अस्थाई रूप से की जाती है|
स्थाई कोटिंग के लिए जॉब को बनाने के पश्चात उसकी सतह पर तेल, ग्रीस, वार्निश, आदि लगा देते हैं| जिससे जॉब की सतह पर जंग नहीं लगती है और आवश्यकता पड़ने पर जॉब की सतह को साफ करके प्रयोग में लाया जा सकता है|

2. अर्ध स्थाई कोटिंग (semi permanent coating)

इस प्रकार की कोटिंग कार्य खंड या जॉब पर अर्ध स्थाई रूप से की जाती है|
अर्ध स्थाई कोटिंग ने निम्नलिखित विधियां आती हैं|
1. पेंटिंग(painting)
2. पीतल की कलरिंग(colouring off brush)
3. इस्पात की ब्लूइंग करना(bluing off steel)
4. इस्पात की ब्लैक फिनिश करना(black finishing of Steel)
5. टिनिंग(tinning)
6. गैल्वेनाइजिंग(galvanizing)

पेंटिंग(painting)

बाजारों में अनेक प्रकार के पेंट उपलब्ध होते हैं| पेंट के प्रयोग से जॉब की सतह की कोटिंग की जा सकती है |
जिससे कि जॉब की सतह पर पानी और हवा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|

पीतल की कलरिंग(colouring off brush)

इस विधि में पीतल को एक सुनहरे रंग में बदला जाता है |
इसमें पीतल के जॉब को 5 भाग कास्टिक सोडा, 10 भाग कॉपर कार्बोनेट और 50 भाग पानी के घोल में निश्चित समय के लिए डुबोकर रखा जाता है |
जब कार्य खंड पर इच्छा अनुसार परत आ जाती है, तब उसे घोल से बाहर निकाल कर अच्छी तरह साफ कर लिया जाता है|

इस्पात की ब्लूइंग करना(bluing off steel)

इस विधि में पोलिस कीये गये इस्पात के कार्य खंड को लकड़ी की राख, रेति या लकड़ी के कोयले के चुरे के साथ गर्म किया जाता है|
और जब जॉब पर नीला रंग आ जाता है, तब उसे ठंडा कर दिया जाता है |

इस्पात की ब्लैक फिनिश करना(black finishing of Steel)

इस विधि में कठोर किए गए इस्पात के जॉब को सिलेंडर ऑयल में डालकर टैम्पर किया जाता है और इसके तुरंत बाद तेल के साथ मिट्टी में लगभग 150 डिग्री सेंटीग्रेड से 175 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर लगभग 5 से 8 मिनट तक गर्म किया जाता है|
इसके बाद जो को निकाल कर ठंडा कर दिया जाता है, जिससे जॉब की सतह पर ब्लैक फिनिश आ जाती है |

टिनिंग(tinning)

इस विधि के द्वारा किसी जॉब या कार्य खंड पर टिन की कोटिंग की जाती है|
यह विधि ज्यादातर धातु चद्दर के ऊपर की जाती है|
इस पर टिनिंग करने के पश्चात अच्छी चमक लाने के लिए लकड़ी के बुरादे के साथ चद्दरओं को कई प्लेन रोलरओं में से निकाला जाता है|

गैल्वेनाइजिंग(galvanizing)

इस विधि से काली लोहे की चददरों पर जस्ते(zinc) की कोटिंग की जाती है|
इस विधि में जस्ते की कोटिंग करने के पश्चात जॉब पर अच्छी फिनिश लाने के लिए उन्हें वायर ब्रश वाले रोलरो के बीच से निकाला जाता है |

3. स्थाई कोटिंग (permanent coating)

इस प्रकार की कोटिंग किसी जॉब या कार्यखंड पर स्थाई रूप से की जाती है|
स्थाई कोटिंग करने के लिए इलेक्ट्रोप्लाटिंग विधि अपनाई जाती है|
इलेक्ट्रोप्लेटिंग में विद्युत के द्वारा एक धातु की परत दूसरी धातु पर चढ़ाई जाती है|
इस विधि में जिससे धातु हटाई जाती है, उसे एनोड कहते हैं तथा जिस पर धातु चढ़ाई जाती है, उसे कैथोड कहते हैं|

इलेक्ट्रोप्लाटिंग की विधियां (method of electroplating)

इलेक्ट्रोप्लाटिंग में मुख्यतः तीन विधियों द्वारा की जाती है|
1. क्रोमियम प्लेटिंग (chromium plating)
2. निकिल प्लेटिंग (nickel plating)
3. सिल्वर प्लेटिंग (silver plating)

क्रोमियम प्लेटिंग (chromium plating)

इस विधि के द्वारा किसी जॉब या कार्य खंड पर क्रोमियम की पतली परत चढ़ाई जाती है|
इस विधि में जॉब को सल्फ्यूरिक अमल से साफ करने के पश्चात क्रोमियम के घोल में लगभग 1 घंटे तक डुबोकर रखा जाता है|
इस विधि में जॉब को कैथोड और घोल को एनोड से जोड़कर प्लेटिंग की जाती है|

निकिल प्लेटिंग (nickel plating)

इस विधि से जॉब पर निकिल   की प्लेटिंग की जाती है
प्लेटिंग करने के लिए जॉब पर लगे तेल गिरीश और जंग आदि को साफ करके प्राइमस पाउडर से चमका दिया जाता है|
इसके बाद जॉब को निकिल के घोल में लगभग 1 घंटे तक डुबोकर  रखा जाता है, यह क्रिया करने के लिए जॉब को कैथोड और कॉल को एनोड रखा जाता है |

सिल्वर प्लेटिंग (silver plating)

इस विधि से किसी जॉब पर सिल्वर की पतली परत चढ़ाई जाती है|
इस विधि में जॉब की सतह पर लगे तेल जंग, ग्रीश, आदि को साफ करने के पश्चात कॉपर प्लैटिग घोल में लगभग 1 घंटे तक रखकर अंडर कोटिंग की जाती है|
इसके बाद सिल्वर नाइट्रेट के गोल में अधिक विद्युत धारा पर जॉब को लगभग 1 मिनट तक डुबोकर रखा जाता है|
इसके बाद जॉब को साफ करके सिल्वर प्लेटिंग घोल डाल कर सिल्वर की पतली परत चढ़ा ली जाती है|

होनिंग प्रक्रिया क्या है और इसके क्या लाभ है

 

दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे कि होनिंग प्रक्रिया क्या है और इसके क्या लाभ है | होनस क्या होते हैं होनिंग मशीनों का वर्गीकरण तथा होनिंग औजार के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे|

होनिंग(honing)

यह एक घिसाई करने वाला प्रक्रम(process) होता है|
इस प्रोसेस के द्वारा पहले से मशीनिंग किए गए उत्पादों को फिनिश करने और उनका साइज़ ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है|
होनिंग के द्वारा सभी फर्निशिंग सक्रियाओं में सबसे अधिक पदार्थ हटाया जा सकता है|
होनिंग विधि के द्वारा अलग की जाने वाली धातु की मात्रा 0.1 मिली मीटर से 0.25 मिली मीटर तक होती है|
लेकिन अगर पूछा जाए कि होनिंग विधि के द्वारा अधिकतम कितनी धातु को हटाया जा सकता है या अलग किया जा सकता है | तो सही उत्तर होगा 0.75 मिलीमीटर तक|

होनिंग का प्रयोग(use of honing)

इसको अधिकतर प्रयोग आंतरिक बेलनाकार सतहों जैसै ड्रिलिंग अथवा बोरिंग के द्वारा बनाए गए छेदों को फिनिश करने के लिए किया जाता है |

होनिंग औजार(honing tools)

यह तीन 4 या 6 भुजाओं वाला औजार(tool) होता है|
इसकी प्रत्येक भुजा पर होनिंग स्टिक लगी होती है| इस पर लगे समायोजन पेच(adjustable screw) की सहायता से ही होनस के साइज को घटाया या बढ़ाया जा सकता है|
यह लगभग समायोज्य रीमर की तरह कार्य करता है|

honing-tools
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होनस(hones)

होनिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले औजार को होन(hone) कहते हैं|
यह एक प्रकार की धातु को पॉलिश करने वाली छड़ होती है, जोकि अल्युमिनियम ऑक्साइड, सिलीकान कार्बाईड, या डायमंड डस्ट के सूक्ष्म कणों को बोण्ड द्वारा जोड़कर बनाई जाती है|
इसे होनिंग स्टिक या होनिंग स्टोन भी कहां जाता है |
इसके द्वारा ढलवा लोहे, इस्पात, पीतल, कांसा, एलुमिनियम, चांदी, तथा कांच या प्लास्टिक आदि पर पॉलिश की जाती है|
होनस का वर्गीकरण (classification of hones)
होनस को तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है|

1. कोरस या रफ होनस

इस प्रकार के होनस का प्रयोग जॉब पर बोरीग के बाद रफ होनिंग के लिए किया जाता है|

2. मीडियम या फिनिश होनस

इस प्रकार के होनस का प्रयोग होनिंग या semi-finished सतहों को फिनिश करने के लिए किया जाता है|

3. फाइन या पाॅलिश होनस

इस प्रकार की होनस का प्रयोग फिनिश होने के बाद जॉब की आंतरिक सतहों को फिनिशिंग पाॅलिश अर्थात जॉब को शीशे की तरह चमकाने के लिए किया जाता है|

होनिंग मशीन(honing machine)

होनिंग प्रकरण को सामान्य कार्य करने वाली मशीनों जैसें लेथ मशीन और ड्रिलिंग मशीन पर भी किया जा सकता है
कार्य के अनुसार स्थिर प्रकार की मशीनें उपयुक्त सिद्ध नहीं होती हैं, ऐसी स्थिति में उस कार्य को करने के लिए सुगराही ड्रिलिंग मशीन(portable drilling machine) एड्रिल के स्थान पर होन को लगाकर प्रयोग किया जा सकता है|
बहु उत्पादन के लिए नियमित होने की मशीनों का प्रयोग किया जा सकता है इन मशीनों से इस संतोषजनक और सस्ते परिणाम प्राप्त होते हैं|

होनिंग प्रक्रम (honing process)

होनिंग क्रिया एक आंर्द(wet) प्रक्रम(process) होता है|
इस प्रकरण में यह अनिवार्य है कि संक्रिया के समय पर्याप्त मात्रा में उपयुक्त शीतलक का प्रयोग किया जाना चाहिए|
छोटे उत्पादों में यह क्रिया हाथ से की जा सकती है इसके लिए एक होन लगातार घुमाया जाता है और कार्य खंड या जॉब को घूमते हुए औजार पर हाथ के द्वारा आगे पीछे चलाया जाता है|
honing-process
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होनिंग प्रक्रम मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं
1. ड्राई होनिंग(dry honing)
2. वैट होनिंग(wet honing)

ड्राई होनिंग(dry honing)

इस प्रकार की हानिंग क्रिया अधिक धातु और रफ कर्तन करने के लिए की जाती है|
इस क्रिया में किसी भी प्रकार का शीतलक(coolant) प्रयोग नहीं किया जाता है|
इसमें 80 से 120 अपघर्षक ग्रीट वाले होनस का प्रयोग किया जाता है|

वैट होनिंग(wet honing)

इस प्रकार की होनिंग अच्छी फिनिश और चमक के लिए की जाती है|
इस प्रक्रिया में धातु कम कटती है|
इस प्रकार की होनिंग में शीतलक का प्रयोग किया जाता है|
इस क्रिया में 120 से 300 अपघर्षक ग्रीट वाले होनस का प्रयोग किया जाता है|

होनिंग के लाभ (advantage of honing)

1. इससे शतहो में घर्षण लगभग सुनने के बराबर रह जाती है|
2. इससे घूमने वाले पुर्जे बड़ी सरलता से घूमते हैं|
3. होनिंग के माध्यम से पूर्जों को टॉलरेंस की अंतिम सीमा तक परिशुद्ध बना सकते हैं|
4. होनिंग के माध्यम से सतहो में अच्छी फिर्निशिंग पोलिश और स्मूदनेस लाकर उसकी विशेषता बढ़ा सकते हैं|
5. इससे भारी तथा टेढ़े मेढ़े जॉब या सिलेंडर आदि जिनको मशीन पर बांधकर आंतरिक ग्राइंडिंग नहीं की जा सकती उनकी आसानी से होर्निंग क्रिया की जा सकती है|

दोस्तों इस पोस्ट में हमने जाना होनिंग प्रक्रिया क्या है और इसके क्या लाभ है | होनस क्या होते हैं होनिंग मशीनों का वर्गीकरण तथा होनिंग औजार के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी साझा की है अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया तो कृपया ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और हम एक फॉलो करें
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सरफेस फिनिश का परिचय, इसके मापने की इकाई, ग्रेड, मापन की विधियां, और सरफेस फिनिश के लाभ

 इस पोस्ट में हम जानेंगे सरफेस फिनिश का परिचय, इसके मापने की इकाई, ग्रेड, मापन की विधियां, और सर्फेस फिनिश के लाभ |

सरफेस फिनिश का परिचय(introduction of surface finish)

किसी भी पुर्जे (parts) की सतह(surface) पर स्मूथनेस(smoothness) और रफनैस(roughness) के संबंध को सरफेस फिनिश कहते हैं|
जैसा कि हम सब जानते हैं वर्तमान औद्योगिक युग में हर दिन नई नई मशीनों का आविष्कार हो रहा है | इन मशीनों में कुछ पुर्जे ऐसे होते हैं जिन्हें अधिक फिनिश की आवश्यकता नहीं होती है और कुछ ऐसे पुर्जे होते हैं, जिनको बहुत अधिक परिशुद्धता में फिनिश करने की आवश्यकता होती है इस प्रकार फनिशिंग किसी भी कार्य की प्रकृति पर निर्भर करता है|

सरफेस फिनिश से संबंधित पद(relative steps of surface finish)

1. सरफेस(surface)
2. प्रोफाइल(profile)
3. रफनैस(roughness)
4. वेवीनैस(weariness)
5. फ्लाॅज(flaws)
6.ले(lay)

Relative-steps-of-surface-finish


1. सरफेस(surface)

यह किसी जॉब या पदार्थ की वह सीमा होती है, जो किसी एक जॉब या पदार्थ को दूसरे से अलग करती है|

2. प्रोफाइल(profile)

किसी भी सरफेस की रूपरेखा या आकृति को प्रोफाइल कहते हैं|

3. रफनैस(roughness)

जब किसी जॉब के सतह  पर किसी औजार की कर्तन धार से जो बारीक तथा सूक्ष्म विषमताएं बनती है, उन्हें  रफनैस(roughness) कहते हैं |

4. वेवीनैस(weariness)

जब किसी जॉब की सतह पर रफनैस की अपेक्षा अधिक चोड़ी विषमताएं बनती है तो उन विषमताओं को वेवीनैस कहते हैं |

5. फ्लाॅज(flaws)

यह किसी जॉब की सतह पर वह विषमता होती है, जो किसी एक स्थान पर या कहीं-कहीं अनेक स्थान पर पड़ती हैं | जैसे:- स्क्रेच, लिए आदि |

6.ले(lay)

किसी जॉब की सतह पर जिस दिशा में फिनिशिंग की जाती है, उसे ले(lay) कहते हैं |

सरफेस फिनिश के माप की इकाई(unit measurement of surface finish)

सरफेस फिनिश की इकाई मीट्रिक प्रणाली में माइक्रोन होती है|
तथा ब्रिटिश प्रणाली में इसे माइक्रो इंच मे मापते हैं|
भारतीय मानक (I.S.I.) मैं RZ और ra सूत्रों के मान की इकाई को माइक्रोन से संबोधित करते हैं |
एक माइक्रोन = 0.001 मिली मीटर
एक माइक्रोन इंच = 0.0001 इंच

सरफेस फिनिश की ग्रेड(grade of surface finish)

भारतीय मानक (I.S.I.) में ra सूत्र की माप के अनुसार सर्फेस फिनिश के स्टैंडर्ड ग्रेड होते हैं, जिनको निम्न तालिका द्वारा प्रदर्शित किया जाता है|

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सरफेस फिनिश को मापने की विधियां(method of measuring surface finish)

सरफेस फिनिश को दो विधियों द्वारा मापा जा सकता है|
1. तुलना द्वारा( by comparison)
2. प्रत्यक्षमापी उपकरणों द्वारा(by direct measuring instruments)

1. तुलना द्वारा( by comparison)

जब किसी सरफेस फिनिश का निरीक्षण(inspection) तुलना द्वारा किया जाता है|
तो यह सात विधियां अपनाई जाती हैं|
1. स्पर्श निरीक्षण द्वारा
2. दृष्टिगत निरीक्षण द्वारा
3. माइक्रोस्कोपिक निरीक्षण द्वारा
4. सतह फोटोग्राफ द्वारा
5. रिफ्रैक्टिव लाइट इंटेसिटी द्वारा
6. माइक्रो इंटर फेयरोमीटर द्वारा
7. वाॅलाक सतह डायनमो मीटर द्वारा

2. प्रत्यक्षमापी उपकरणों द्वारा(by direct measuring instruments)

किसी भी सतह फिनिश का निरीक्षण प्रत्यक्ष माफी उपकरणों द्वारा भी किया जा सकता है |
इसके लिए यह 3 उपकरण प्रयोग में लाए  जाते है|
1. प्रोफाइलोमीटर(profilometer)
2. स्टाइल्स प्रोब उपकरण
3. टामलिम्सन सरफेस मीटर
4. टेलर हाॅबसन टेलीसर्फ

प्रोफाइलोमीटर(profilometer)

इस उपकरण के द्वारा किसी सतह की हिल्स और वैलीज को सूक्ष्म से सूक्ष्म 0.0025 मिलीमीटर तक माप सकते हैं|
प्रोफाइलोमीटर डायल टेस्ट इंडिकेटर की तरह ही कार्य करता है|
यह दो प्रकार के होते हैं
1. यांत्रिक(mechanical)
2. इलेक्ट्रॉनिक(electronic)

1. यांत्रिक(mechanical)

यांत्रिक(mechanical) उपकरण को स्टाइलस कहते है|
यह उपकरण की चाल को यांत्रिक विधि द्वारा पढ़कर इंडिकेटर की सहायता से हिल्स और वैलीज को मापा जा सकता है|
इसका स्टाइलस डायमंड धातु का बना होता है|

2. इलेक्ट्रॉनिक(electronic)

इस उपकरण को टेलीसर्फ के नाम से भी जाना जाता है|
यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जिसका उपयोग प्रयोगशाला में किया जाता है|
यह एक मोटर की सहायता से चलता है यह चलती हुई सतह से प्राप्त विद्युत तरंगों को बढ़ाकर सतह एंपलीफायर एनालाइजर को भेजता है|
यह एनालाइजर सतह के पैरामीटर की गणना करके अक्षरों के रूप में दर्शाता है|

सरफेस फिनिश के लाभ (advantage of surface finish)

1. अच्छी सर्फेस फिनिश मशीन की गति बढ़ती है|
2. मशीन का जीवनकाल बढ़ता है|
3. मशीन के पुर्जे कम घिसते हैं|
4. घर्षण कम पैदा होता है|
5. लुब्रिकेंट का बहाव स्वतंत्र रूप से रहता है|


इस पोस्ट में हमने जाना सरफेस फिनिश का परिचय, इसके मापने की इकाई, ग्रेड, मापन की विधियां, और सर्फेस फिनिश के लाभ | अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया था क्या इसलिए और कमेंट करना ना भूले

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आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड Document upload in Aadhar Card

 इस पोस्ट में हम जानेगे आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करना क्यों जरुरी है और आधार कार्ड में दस्तावेज़ अपलोड करने की प्रक्रिया क्या है | आधा...