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चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार तथा पिच और लीड में अंतर

इस पोस्ट में हम चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार तथा पिच और लीड के बीच अंतर एवंम सिंगल स्टार्ट चुड़ी तथा मल्टी स्टार्ट चूड़ियों में अंतर के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे|

चाल के आधार पर चूड़ियों के प्रकार

चाल के आधार पर चूड़ियां तीन प्रकार की होती हैं
1. सिंगल स्टार्ट थ्रेड(single start thread)
2. डबल स्टार्ट थ्रेड(double start thread)
3. मल्टी स्टार्ट थ्रेड(multi start thread)

सिंगल स्टार्ट थ्रेड(single start thread)

इन चूड़ियों में चूड़ी केवल एक स्थान से शुरू होकर अंत तक चली जाती है|
सिंगल स्टार्ट थ्रेड चूड़ी की लीड चूड़ी के पिच के बराबर होती है|

डबल स्टार्ट थ्रेड(double start thread)

डबल स्टार्ट थ्रेड मैं चूड़ी कि लीड चूड़ी की पिच के 2 गुना हो जाती है|
इस प्रकार की चूड़ियों में दो चूड़ियां दो अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर अंत तक चली जाती हैं|

मल्टी स्टार्ट थ्रेड(multi start thread)

मल्टी स्टार्ट थ्रेड मे तीन या अधिक चूड़ियां अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर अंत तक चली जाती है|
इन चूड़ियों में जितने स्टार्ट की चूड़ियां होती हैं उसमें लीड उस की पिच की उतने ही गुनी हो जाती है, जैसे- तीन स्टार्ट वाली चूड़ी की पिक्चर की तीन गुनी होगी|

पिच और लीड में अंतर(difference between pitch and lead)

1. पिच(pitch)

एक चूड़ी के केंद्र से दूसरी चूड़ी तक के बीच की दूरी को पिच कहते हैं |
पिच चूड़ियों के प्रति इन संख्या पर निर्भर करती है अर्थात पिच= 1/T.P.I.
एक मुंह वाली चूड़ी की पिच व लीड समान होती है|

लीड(Lead)

बोल्ट या पेच एक चक्कर पूरा करने में अपनी दूरी पर जितनी दूर आगे पीछे बड़ता है, उस दूरी को लीड कहते हैं |
लीड चूड़ी की पिक और उसके स्टार्ट पर निर्भर करती है अर्थात लीड= पिच×नंबर ऑफ स्टार्ट
जितने मुंह की चूड़ी होती है लिड पिच से उतनी ही गुना होती है |

सिंगल स्टार्ट चुड़ी तथा मल्टी स्टार्ट चूड़ियों में अंतर(difference between single start thread and multi start thread)

इकहरी चाल चूड़ी(single start thread)

यह एक चाल की चूड़ी होती है |
इन चूड़ियों का प्रारंभिक सिरा एक होता है |
इकहरी चाल चूड़ियां की पूरी लंबाई मैं केवल एक ही चूड़ी शुरू से अंत तक चलती है |
इकहरी चाल चूड़ी मैं लीड और पिच बराबर होते हैं|
यह चूड़ियां दो या दो से अधिक पार्ट्स को जोड़ने के लिए प्रयोग की जाती है|

बहु चाल चूड़ी(multi start thread)

यह चूड़ियां एक से अधिक चाल की जुड़ी होती है|
इन चूड़ियों में एक से अधिक प्रारंभिक सिरे होते हैं|
बहु चाल चूड़ी में समान दूरी पर दो या तीन या इससे अधिक एक ही माप वाली अलग-अलग चूड़ियां एक दूसरे के समांतर चलती हैं |
इस प्रकार की चूड़ी मे जितनी चूड़ियां अधिक होती है लिड उतनी ही गुना हो जाती है|
यह चूड़ियां शीघ्र चाल(quick drive) हेतु प्रयोग में लाई जाती है |

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स्क्रु थ्रेड (पेच चूड़ियों) के प्रकार और उपयोग

 इस पोस्ट में हम पेच चूड़ियों(screw threads) के प्रकार V चूड़ियों के प्रकार तथा स्क्वेअर एवं स्क्वेअर संशोधित चूड़ियों के बारे में विस्तार से जानेगे

स्क्रु थ्रेड(पेच चूड़ियों) के प्रकार | types of screw threads

स्क्रु थ्रेड(पेच चूड़ियों) को निम्नलिखित दो वर्गों में बांटा जा सकता है -
1. V चूड़ियां(V - threads)
2. स्क्वेयर एंड स्क्वेयर संशोधित चूड़ियां(square and Square modified threads)

1. V चूड़ियां(V - threads)

इस प्रकार की चूड़ियां अंग्रेजी के अक्षर V के आकार की होती है|
यह चूड़ियां मानक साइज(STANDARD SIZE) में पाई जाती है|

V चूड़ियों के प्रकार(types of V threads)

V चूड़ियां सात प्रकार की होती है-
1. ब्रिटिश स्टैंडर्ड विटवर्थ थ्रेड(B.S.W.)
2. ब्रिटिश स्टैंडर्ड फाइन थ्रेड(B.S.F.)
3. ब्रिटिश स्टैंडर्ड पाइप थ्रेड(B.S.P.)
4. ब्रिटिश एसोसिएशन थ्रेड(B.A.)
5. शार्प वी थ्रेड(Sharp V threads)
6. अमेरिकन नेशनल थ्रेड(American national thread)
7. भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड(Indian standard thread)

ब्रिटिश स्टैंडर्ड विटवर्थ थ्रेड(B.S.W.)

इन चूड़ियों को बीएसडब्ल्यू चूड़ियां भी कहते है|
B.S.W. चूड़ियों का आविष्कार जोसफ विट वर्थ ने सन 1841 ईस्वी में किया|
B.S.W-thread,
B.S.W-thread


यह चूड़ियां मानक साइज(standard size) मैं मिलती हैं |
B.S.W. चूड़ियों का उपयोग साधारण कार्यों नट बोल्ट स्टड तथा पेचो में किया जाता है|
B.S.W. चूड़ियों कार कोण 55 डिग्री होता है|
इन चूड़ियों की गहराई=0.6403P होती है|

ब्रिटिश स्टैंडर्ड फाइन थ्रेड(B.S.F.)

यह चूड़ियां B.S.W. चूड़ियों के समान ही होती हैं परंतु अंतर केवल इतना होता है कि इन की पिच बारीक होती है|
B.S.W. चूड़ियों की अपेक्षा B.S.F. चूड़ियों की प्रति इंच संख्या अधिक होती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर प्रयोग कंपन्न वाले पार्ट के साथ किया जाता है |
चूड़ियों का उपयोग अधिकतर ऑटोमोबाइल्स वायुयान या मशीन टूल्स में किया जाता है|
B.S.F. चूड़ियों का कोण 55 डिग्री होता है |
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.)
चूड़ियों की गहराई =0.6403 P होती है|
चूड़ियों की त्रिज्या =0.1373 P होती है|

ब्रिटिश स्टैंडर्ड पाइप थ्रेड(B.S.P.)

इस प्रकार की चूड़िया पानी गैस तथा भाप के पाइपों में काटी जाती है|
B.S.P. चूड़ियों का उपयोग वाटर जॉइंट बनाने के लिए किया जाता है |
इस प्रकार की चूड़ियां व्यास में प्रति फुट 3/ 4 इंच टेपर होती हैं|
B.S.P. चूड़ियों का कोण 55 डिग्री होता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.) होती है|

ब्रिटिश एसोसिएशन थ्रेड(B.A.)

यह चूड़ियां बहुत बारीक होती है और यह छोटे-छोटे पेचों में काटी जाती है |
British-association-thread
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यह चूड़ियां 0 से 25 नवंबर तक होती है|
परंतु कार्यशाला मैं अधिकतर जीरो से 10 नंबर तक ही चूड़ियां प्रयोग की जाती है|
जीरो नंबर की इन चूड़ियों का आउटसाइड डायमीटर 6 मिलीमीटर तक होता है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग रेडियो घड़ियों कैमरो तथा टेलीफोन आदि में किया जाता है |
इन चूड़ियों को बीए (B.A.) चूड़ियां भी कहते हैं|
इन चूड़ियों का कौन 47 1/2 डिग्री होता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की पिच =1/प्रति इंच दांतो की संख्या(T.P.I.) होती है|
B.A चूड़ियों की गहराई = 0.6P होती है|
इनकी त्रिज्या = 2×P/11=0.1818P होती है|

शार्प वी थ्रेड(Sharp V threads)

इस  की चूड़ियां V आकृति में बनी होती है
इन चूड़ियों की रूट और क्रेस्ट बहुत ही नुकीले होते हैं तथा यह बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं |
इन चूड़ियों का कौन 60° डिग्री होता है
इन चूड़ियों की गहराई =0.866P होती है|

अमेरिकन नेशनल थ्रेड(American national thread)

इन चूड़ियों को सेलर चूड़ियां(seller thread) भी कहते हैं|
यह चूड़ियां अमेरिकन मशीनों में पाई जाती हैं|
यह कौरस और फाइंन दो ग्रेडों में पाई जाती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग हवाई जहाज मोटर गाड़ी आदि बनाने में किया जाता है|
इस प्रकार की चूड़ियों की रूट और क्रेस्ट चपटे(flat)
होते हैं|
इन चूड़ियों का कौन 60° डिग्री होता है|

भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड(Indian standard thread)

यह चूड़ियां भारतीय मानक संस्थान आई एस आई,(I. S. I.) से मान्यता प्राप्त होती हैं|
Indian-standard-thread
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यह चूड़ियां आई एस आई के अनुसार जीरो  0.25 मिलीमीटर से 300 मिली मीटर तक के व्यासों में पाई जाती हैं|
भारतीय स्टैंडर्ड थ्रेड का कोण 60 डिग्री होता है|

स्क्वेयर एंड स्क्वेयर संशोधित चूड़ियां(square and Square modified threads)

यह चूड़ियां V आकार की चूड़ियों से अधिक मजबूत होती हैं तथा ये निम्नलिखित प्रकार में पाई जाती हैं|
1. स्क्वेयर थ्रेड(square thread)
2. एक्मे थ्रेड(acme thread)
3. नकल थ्रेड(knuckle thread)
4. बटरैस थ्रेड(buttress thread)

स्क्वेयर थ्रेड(square thread)

यह चूड़ियां अधिक मजबूत होती हैं|
स्क्वेयर थ्रेड का अधिकतम उपयोग वॉइस के स्पिण्डल, प्रेस, स्क्रु जैक, आदि में किया जाता है |
इन चूड़ियों के लिए फ्लैट की मोटाई = 0.5P होती है|
इन चूड़ियों के लिए स्पेस की मोटाई = 0.5P होती है|

एक्मे थ्रेड(acme thread)

यह चूड़ियां बहुत ही अधिक मजबूत होती है|

acme-thread
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इनका अधिकतर प्रयोग पावर संचरण(power transmission) मैं किया जाता है|
लेथ मशीन की लीड स्क्रु पर इस प्रकार की चूड़ियां बनाई जाती है, जिससे स्प्लिट नट को आसानी से जोड़ करने और अलग करके ऑटोमेटिक फिड ली जा सकती है|
एक्मे चूड़ियों का कौण 29 डिग्री होता है|

नकल थ्रेड(knuckle thread)

नकल चूड़ियों में चूड़ी के रूट और क्रेस्ट अर्ध्द गोल(half round) बने होते हैं|
यह चूड़ियां रोल करके बनाई जाती है क्योंकि रोल करके बनाई गई चूड़ी टुल से बनी चूड़ी की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है|
इन चूड़ियों का अधिकतर उपयोग रेलवे कपलिंग बनाने के लिए किया जाता है|

बटरैस थ्रेड(buttress thread)

यह चूड़ियां एक साइड अक्ष के समकोण पर तथा दूसरी साइड 45 डिग्री के कोण पर बनी होती है|

buttress-thread
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इन चूड़ियों का अधिकतर प्रयोग वहां किया जाता है जहां एक ही दिशा में अधिक दबाव पड़ता हो |
बटरैस चूड़ी का कोण 45 डिग्री होता है |

चूड़ियों का परिचय, उपयोग, गति के आधार पर प्रकार, और चूड़ी के भाग

आज हम जानेंगे चूड़ियों(threads) का परिचय, कार्य के अनुसार चूड़ियों के उपयोग, गति के आधार पर चूड़ियों के प्रकार, तथा चूड़ी के भाग के बारे में |

चूड़ियों का परिचय(introduction of threads)

किसी गोल आकार को जॉब के बाहरी या भीतरी सतह पर एक समान दूरी से लगातार बढ़ती हुई घुमावदार झुकी हुई झिर्रियों(grooves) को चूड़ियां कहते हैं|

बाहरी चूड़ियां(external threads)

जॉब के बाहरी सतह पर बनी चूड़ियों को बाहरी चूड़ियां(external threads) कहते हैं| जैसे-बोल्ट, स्टड, पेच और स्पिन्डल आदि में कटी चूड़ियां |

भीतरी चूड़ियां(internal threads)

जॉब के गोल छेद में कटी चूड़ियों को भीतरी चूड़ियां(internal threads) कहते हैं, जैसे- नट, या जॉब के अन्य छेदो में कटी चूड़ियां |

कार्य के अनुसार चूड़ियों के उपयोग (threads use according to works)

अलग-अलग कार्यों के अनुसार चूड़ियों का उपयोग निम्न प्रकार से कर सकते हैं|
1. बंधक की तरह(as a fastener)
2. गति देने के लिए(for transmit motion)
3. भार उठाने के लिए(for load lifting)
4. सही माप के लिए(for accurate measurement)
5. गति को कम करने के लिए(for speed reduction)
6. समायोजन के लिए(for adjustment)

बंधक की तरह(as a fastener)

पेच चूड़ियों(screw threads) की सहायता से दो या दो से अधिक भागों(parts) को आपस में आसानी से जोड़ा जा सकता है, जैसे- नट, बोल्ट, तथा स्क्रू द्वारा

गति देने के लिए(for transmit motion)

पेच चूड़ियों की सहायता से गति भी दी जा सकती है, जैसे-लेथ मशीन की लीड स्क्रु और रैक एवं पिनियन |

भार उठाने के लिए(for load lifting)

पेच चूड़ियों(screw threads) की सहायता से कम बल लगाकर अधिक भार को आसानी से उठाया जा सकता है, जैसे-स्क्रु जैक की सहायता से भारी वाहनों को आसानी से उठाया जा सकता है |

सही माप के लिए(for accurate measurement)

पेच चूड़ियों(screw threads) का प्रयोग करके सही माप ले सकते हैं, जैसे- माइक्रोमीटर द्वारा मांप लेना |
गति को कम करने के लिए(for speed reduction)
चूड़ियों की सहायता से गति को कम किया जा सकता है|जैसे- वर्म तथा वर्म व्हील  के द्वारा गति को कम करना |

समायोजन के लिए(for adjustment)

चूड़ियों(threads) की सहायता से किसी वस्तु को समायोजन कर सकते हैं, जैसे- डाई स्टॉक में समायोजन(adjustment) करना |

गति के आधार पर चूड़ियों के प्रकार(types of threads according to speed)

गति के आधार पर सभी चूड़ियां दो प्रकार की होती हैं|
1. वामाव्रत चूड़ियां(left hand threads)
2. दक्षिणावर्त चूड़ियां(right hand threads)


वामाव्रत चूड़ियां(left hand threads)

Left-hand-threads,वामावर्त-चुडिया
Left-hand-threads


यह चूड़ियां घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में घूमाते समय कसी जाती है|
इन चूड़ियों का झुकाव(inclination) बायी और होता है |

दक्षिणावर्त चूड़ियां(right hand threads)

Right-hand-threads,दक्षिणावर्त-चूड़ियां
Right-hand-threads


दक्षिणावर्त चूड़ियां घड़ी की सुई की दिशा(clockwise) में घूमाते समय कसी जाती हैं |
इन चूड़ियों का झुकाव(inclination) दायीं और होता है | इन चूड़ियों का उपयोग अधिकतर इंजीनियरिंग कार्यों में किया जाता है |

चूड़ी के भाग(parts of threads)

चूड़ी के भागों को आप इस चित्र के माध्यम से देख व समझ सकते हैं|

Parts-of-threads,चूड़ी-के-भाग
Parts-of-threads

1. मेजर डायमीटर(major diameter)

यह किसी चूड़ी का सबसे बड़ा व्यास होता है|

2. माइनर डायमीटर(minor diameter)

यहां किसी चूड़ी का सबसे छोटा व्यास होता है |

3. पिच डायमीटर(pitch diameter)

यह किसी चूड़ी का काल्पनिक व्यास होता है जो कि मेजर डायमीटर तथा माइनर डायमीटर के बीच में स्थित होता है यदि मेजर डायमीटर में से चूड़ी की अकेली गहराई घटा दी जाए तो पिच डायमीटर ज्ञात हो जाता है |

4. अक्ष(axis)

किसी पेज(screw) के बीचो बीच केंद्र(centre) से उसकी पूरी लंबाई तक गुजरती हुई सीधी रेखा को अक्ष(axis) कहते हैं |

5. पिच(pitch)

एक चूड़ी(thread) के केंद्र(centre) से दूसरी चूड़ी के केंद्र के बीच की दूरी को पिच कहते हैं |

6. लीड(lead)

पेज चूड़ी(screw thread) एक चक्कर में जितनी दूरी तय करती है वह उसकी लीड कहलाती है सिंगल स्टड वाली चूड़ी में लीड और पिच बराबर होती है |

7. क्रेस्ट(crest)

चूड़ी की दोनों साइडें ऊपर की तरफ जिस स्थान पर आकर मिलती हैं उसे क्रेस्ट कहते हैं |
8. रूट(root)
पेच चूड़ी की दोनों साइडें नीचे की तरफ जिस स्थान पर आकर मिलती हैं उसे रूट कहते हैं |

9. फ्लेंक या साइड(falank aur side)

यह चूड़ी की तिरछी सतह होती है, जो क्रेस्ट और रूट को मिलाती है |

10. चूड़ी का कोण(angle of thread)

पेज चूड़ी की दोनों साइड आपस में मिलने के बाद जो कौण बनता है उसे चूड़ी का कौण कहते हैं |

11. हेलिक्स कोण(helix angle)

पिच डायमीटर अक्ष के लंबवत पेच चूड़ी के हेलिक्स के द्वारा बनाया हुआ कोण हेलिक्स कोण कहलाता है |

12. चूड़ी की गहराई(depth of threads)

पेच चूड़ी के क्रेस्ट और रूट के बीच की दूरी को यदि अक्ष के लंबवत मान लिया जाए तो वह चूड़ी की गहराई कहलाती है |

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